
संकटग्रस्त सिलिकॉन वैली की प्रमुख चिप निर्माता कंपनी इंटेल ने अमेरिकी सरकार को अपने कारोबार में 10 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने पर सहमति जताई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को संवाददाता सम्मेलन में इस ऐतिहासिक सौदे की घोषणा की। यह 2008 के वित्तीय संकट के बाद किसी अमेरिकी कंपनी में सरकार का सबसे बड़ा निवेश माना जा रहा है। America News
राष्ट्रपति ट्रंप ने बताया कि यह समझौता उनके और इंटेल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी लिप-बू टैन के बीच हाल ही में हुई बातचीत के बाद तय हुआ। ट्रंप ने कहा कि टैन उनके सुझावों से सहमत हुए और यह उनके लिए भी एक महत्वपूर्ण कदम है। इंटेल ने बताया कि अमेरिका उसके शेयरों में 8.9 अरब डॉलर का निवेश करेगा। इसके अलावा सरकार ने 2022 में पारित चिप्स एंड साइंस एक्ट के तहत कंपनी को 2.2 अरब डॉलर का भुगतान भी किया है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य अमेरिकी सेमीकंडक्टर निर्माण को पुनर्जीवित करना और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में नवाचार को प्रोत्साहित करना है।
इंटेल के सीईओ लिप-बू टैन ने स्पष्ट किया कि सरकार को कंपनी के बोर्ड में कोई सीट नहीं दी जाएगी और अन्य प्रशासनिक अधिकार भी नहीं होंगे। टैन ने कहा, "हम राष्ट्रपति और प्रशासन का भरोसा पाकर आभारी हैं। अब हम अमेरिकी प्रौद्योगिकी और विनिर्माण क्षेत्र में नेतृत्व को मजबूत करने के लिए तत्पर हैं।"
अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लुटनिक ने इस समझौते को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह अमेरिका के सेमीकंडक्टर उद्योग में वैश्विक नेतृत्व को मजबूत करेगा। इस खबर के बाद इंटेल के शेयरों में 6 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई। 1968 में स्थापित इंटेल ने दशकों तक तेज और शक्तिशाली चिप्स का उत्पादन कर उद्योग में अग्रणी भूमिका निभाई है। कंपनी के कारण सिलिकॉन वैली अमेरिकी तकनीकी क्षेत्र की नींव बन गई। हालांकि, स्मार्टफोन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी नई तकनीकी लहरों में पिछड़ने के कारण इंटेल हाल के वर्षों में चुनौतियों का सामना कर रही है। America News