International : भारत सरकार ने लक्षद्वीप के एक बड़े द्वीप को डिफेंस के लिए अधिग्रहित (Defense Acquisition) करने का प्लान बनाया है। इसका मतलब है कि अब वहां डिफेंस बेस बनेगा। सरकार का कहना है कि ये कदम देश की समुद्री सुरक्षा (Maritime Security) के लिए जरूरी है। दरअसल, हिंद महासागर (Indian Ocean) में लगातार हलचल बढ़ रही है इसलिए वहां से निगरानी करना जरूरी हो गया है। ये फैसला पूरी तरह से रणनीतिक (Strategic Move) है ताकि देश की सीमाएं और समंदर दोनों सुरक्षित रह सकें। अब लक्षद्वीप भारत की डिफेंस पॉवर में नया रोल निभाएगा।
क्यों लिया जा रहा है ये फैसला?
लक्षद्वीप भारत के लिए सामरिक (Strategic) रूप से बहुत अहम है। यहां से हिंद महासागर में निगरानी रखना आसान होता है। कई देशों की नजर भी इस क्षेत्र पर रहती है। ऐसे में भारत सरकार वहां अपनी सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करना चाहती है।
कौन सा द्वीप है निशाने पर?
रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत सरकार मिनिकॉय द्वीप या उससे जुड़े किसी अहम इलाके को डिफेंस बेस बनाने की सोच रही है। हालांकि अभी तक आधिकारिक तौर पर किसी द्वीप का नाम सामने नहीं आया है। अगर सरकार यह कदम उठाती है तो वहां पर डिफेंस से जुड़े काम शुरू होंगे। इससे सेना के लिए एक नया बेस तैयार होगा। इससे देश की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा और भी मजबूत होगी।
स्थानीय लोगों की चिंता
लक्षद्वीप के लोग इस खबर से थोड़े परेशान हैं। उन्हें डर है कि कहीं इसका असर उनकी रोज़मर्रा की जिंदगी पर न पड़े। हालांकि सरकार ने भरोसा दिलाया है कि आम लोगों की सुविधा का पूरा ध्यान रखा जाएगा। सरकार का कहना है कि यह कदम देश की सुरक्षा के लिए जरूरी है। पड़ोसी देशों की बढ़ती हलचल को देखते हुए हिंद महासागर में निगरानी रखना बेहद ज़रूरी हो गया है।
लक्षद्वीप में डिफेंस बेस बनाने का फैसला भारत की सुरक्षा नीति का एक अहम हिस्सा बन सकता है। इससे देश की समुद्री सुरक्षा मजबूत होगी। सरकार ने कहा है कि इसका असर आम जनता पर नहीं पड़ेगा और सभी नियमों का पालन किया जाएगा।