International News : ब्रिटेन की तीसरी महिला पीएम लिज के लिए आसान नहीं होगा चुनौतियों से निबटना
भारत
चेतना मंच
01 Dec 2025 11:24 AM
International News : लिज ट्रस ब्रिटेन की तीसरी महिला प्रधानमंत्री चुनी गईं हैं। इससे पहले मार्गेट थेचर और थेरेसा मे को यह गौरव प्राप्त हो चुका है। लिज ने भारतीय मूल के ब्रितानी ऋषि सुनक को कड़े मुकाबले में मात दी। ब्रिटेन के पीएम के रूप में उन्होंने भले ही जीत हासिल कर ली है, लेकिन देश के हालात के मद्देनजर आने वाले दिन उनके लिए आसान नहीं होने वाले हैं। उनके सामने कई चुनौतियां खड़ी हैं, जिनसे निबटना आसान नहीं होने वाला है।
देश के सामने सबसे बड़ी समस्या बेरोजगारी की है। कोरोना महामारी से बुरी तरह से टूट चुके ब्रिटेन में लगातार बेरोजगारी की दर बढ़ी है। मौजूदा वर्ष की दूसरी तिमाही में बेरोजगारी की दर करीब चार फीसद तक जा पहुंची है। जनवरी से मार्च के बीच ये काफी कम थी। देश में बीते तीन माह के दौरान ही करीब 51 हजार बेरोजगार बढ़ गए हैं। इससे पहले इस तरह से बेरोजगारों की संख्या फरवरी-मार्च 2021 में देखी गई थी। बाजार की हालत इस कदर खराब है कि जानकारों ने अनुमान लगाया था कि मौजूदा वर्ष की पहली तिमाही में करीब ढाई लाख लोगों को रोजगार उपलब्घ्ध कराया जा सकेगा। लेकिन, ऐसा नहीं हुआ। इस दौरान 1.60 लाख लोगों को ही नौकरियां मिलीं। ऐसे में देश के युवाओं को सबसे बड़ी जरूरत नौकरी की है। लिज के लिए ये एक बड़ी चुनौती है।
देश में फैली महंगाई एक ऐसा मुद्दा है, जिस पर यदि लिज ने पार पा लिया तो वो खुद को बेहतर पीएम साबित कर सकेंगी। मौजूदा समय में महंगाई की दर 10 फीसद को पार कर चुकी है। जून में ये दर 9.4 फीसद थी। सरकारी आंकड़ों की मानें तो तीन देशक के बाद देश में महंगाई की दर अपने चरम पर दिखाई दे रही है। जनवरी में ही सके 11 फीसद तक जाने की आशंका जताई गई थी, उस वक्त ये सात फीसदी से कम थी। रोजगार की कमी और महंगाई में उछाल से देशवासियों के लिए समस्याएं बढ़ गई हैं। हर कोई इनका निवारण जल्द चाहता है। ये देखना दिलचस्प होगा कि लिज इन मुद्दों पर क्या कदम उठाती है।
ब्रिटेन में कोरोना के अब तक 2.35 करोड़ मामले सामने आ चुके हैं। इस महामारी ने दो लाख से अधिक लोगों की जान भी ली है। अब भी ब्रिटेन में 25 हजार से अधिक ही मामले सामने आ रहे हैं। सरकार के ताजा आंकड़ों के मुताबिक इससे होने वाली हालिया मौतों की संख्या कम भले ही हुई है, लेकिन अब भी ये 400 से अधिक बनी हुई है। इसी तरह से देश में वैक्सीनेशन की बात करें तो देश में 93.5 फीसदी लोगों को पहली डोज, 88.1 फीसद को दोनों खुराक और 69.3 फीसद को बूस्टर डोज दी जा चुकी है।
मंकीपाक्स के मामले में भी ब्रिटेन की हालत नाजुक कही जा सकती है। यहां के आंकड़े बताते हैं कि देश में 3195 से अधिक मंकीपाक्स के मामले सामने आ चुके हैं। इनमें से सबसे अधिक मामले पुरुषों में हैं। खास बात है कि ये मामले अधिकतर 36 वर्ष की आयु के वयस्कों में सामने आए हैं।
ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था में मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर का 21 फीसदी, हैल्थ सेक्टर का 19 फीसदी, रियल स्टेट का 12 फीसदी, रिटेल का 11 फीसदी, फाइनेंस और इंश्योरेंस का 8 फीसदी, कंस्ट्रक्शन सेक्टर का 6 फीसदी और कृषि का एक फीसदी योगदान है। मौजूदा समय में ये सभी सेक्टर कम उत्पादन कर रहे हैं। इसकी वजह एनर्जी क्राइसिस, इंफ्लेशन, कोरोना महामारी और दूसरे अंतरराष्ट्रीय कारण भी हैं। लिज को अन्य मुद्दों के साथ इनके सामने आने वाली चुनौतियों से भी निपटना जरूरी होगा।