भारत-चीन के छात्रों की बढ़ी मुश्किलें, ट्रंप ने इंटरनेशनल स्टूडेंट प्रोग्राम पर लगाया ब्रेक
Donald Trump
भारत
RP Raghuvanshi
01 Dec 2025 02:33 AM
International News : अमेरिका के ट्रंप प्रशासन द्वारा हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में इंटरनेशनल स्टूडेंट्स प्रोग्राम को बंद करने के फैसले ने दुनियाभर के छात्रों, खासकर भारतीय और चीनी छात्रों के बीच चिंता की लहर दौड़ा दी है। इस फैसले के बाद अब वहां पढ़ रहे हज़ारों विदेशी छात्र-छात्राओं को या तो अमेरिका छोड़ना पड़ेगा या किसी अन्य संस्थान में ट्रांसफर होना होगा।
कानूनी स्थिति पर भी मंडरा रहा खतरा
हार्वर्ड में फिलहाल 6,800 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय छात्र हैं, जिनमें 788 भारतीय और 2126 चीनी छात्र शामिल हैं। यह संख्या कुल छात्रों का लगभग 27% है, जो हर साल लगातार बढ़ती जा रही थी। ट्रंप प्रशासन ने यह कदम यहूदी-विरोधी घटनाओं, चीन से कथित संबंधों और विश्वविद्यालय के भीतर 'संवेदनशील गतिविधियों' के आरोपों के चलते उठाया है। होमलैंड सिक्योरिटी द्वारा स्टूडेंट्स और एक्सचेंज विजिटर्स प्रोग्राम (SEVP) को रद्द कर दिया गया है, जिससे विदेशी छात्रों की कानूनी स्थिति पर भी खतरा मंडराने लगा है। इसके साथ ही विश्वविद्यालय के रिसर्च फंडिंग और फेडरल ग्रांट्स में भी लगभग 3 बिलियन डॉलर की कटौती कर दी गई है।
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी ने कोर्ट में दायर किया मुकदमा
इस फैसले का असर न केवल भारत और चीन के छात्रों पर पड़ेगा, बल्कि नेपाल, पाकिस्तान, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे देशों के सैकड़ों छात्र भी प्रभावित होंगे। हालांकि, ट्रंप प्रशासन के इस कठोर कदम के खिलाफ हार्वर्ड यूनिवर्सिटी ने कोर्ट में मुकदमा दायर किया है और एक फेडरल जज ने फिलहाल छात्रों की कानूनी स्थिति को रद्द करने से रोक लगा दी है। हार्वर्ड के प्रेसिडेंट एलन गार्बर ने इस फैसले को गैरकानूनी और शिक्षण की स्वतंत्रता के खिलाफ बताया है। यह पूरा मामला अब केवल शिक्षा से जुड़ा नहीं रह गया, बल्कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति और नस्लीय संवेदनशीलता से भी गहराई से जुड़ गया है। ऐसे में भारतीय छात्रों और उनके परिवारों के मन में यह सवाल गूंज रहा है कि क्या अमेरिका अब विदेशी छात्रों के लिए भरोसेमंद शैक्षणिक गंतव्य रह पाएगा? International News