ईरान-इजराइल तनाव से भारत को बड़ा झटका! उड़ सकती है अर्थव्यवस्था की नींद
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भारत
चेतना मंच
25 Jun 2025 10:38 PM
International News : ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव को लेकर भले ही अब सीजफायर की बात हो रही हो लेकिन इसके आर्थिक झटके आने वाले वक्त में भारत की अर्थव्यवस्था को गहरा नुकसान पहुंचा सकते हैं। भारत के सबसे बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक SBI की रिसर्च रिपोर्ट में आशंका जताई गई है कि यह संघर्ष भारत के लिए तेल कीमतों में भारी उछाल और सप्लाई चेन में बाधा का कारण बन सकता है।
क्यों खतरे में है भारत की ऊर्जा सुरक्षा?
रिपोर्ट में खासतौर पर 'होर्मुज स्ट्रेट' का जिक्र किया गया है, जो एक अहम समुद्री मार्ग है। दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल इसी रास्ते से होकर गुजरता है। भारत प्रतिदिन करीब 5.5 मिलियन बैरल कच्चा तेल आयात करता है, जिसमें से लगभग 2 मिलियन बैरल प्रतिदिन इसी रूट से आता है। अगर ईरान इस मार्ग को अवरुद्ध करता है, तो भारत की तेल आपूर्ति पर सीधा असर पड़ेगा।भले ही भारत सीधे तौर पर ईरान से तेल न खरीद रहा हो, लेकिन 40% से अधिक तेल आयात इस मार्ग से होता है। ऐसे में कोई भी अवरोध या संघर्ष तेल की वैश्विक कीमतों को अस्थिर कर सकता है, जिसका असर भारत की जेब पर सीधा पड़ेगा।
तेल महंगा तो महंगाई बेलगाम
SBI रिसर्च का अनुमान है कि आने वाले समय में कच्चे तेल की कीमतें 82-85 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। अगर हालात और बिगड़ते हैं तो यह कीमत 130 डॉलर प्रति बैरल तक भी जा सकती है। ऐसी स्थिति में सीपीआई (महंगाई दर) में 25-35 बेसिस पॉइंट्स तक बढ़ोतरी हो सकती है। जीडीपी ग्रोथ में 20-30 बेसिस पॉइंट्स की गिरावट आ सकती है। गंभीर हालात में देश की जीडीपी 5.1% तक सिमट सकती है। यह परिदृश्य भारत की अर्थव्यवस्था, महंगाई और भुगतान संतुलन (Balance of Payments) पर भारी दबाव डाल सकता है।
वैश्विक राजनीति और भारत की मुश्किलें
रिपोर्ट में बताया गया कि 1979 की ईरानी क्रांति से पहले ईरान और इजराइल के रिश्ते सामान्य थे, लेकिन उसके बाद से ईरान का नजरिया पूरी तरह बदल गया।
ईरान के परमाणु कार्यक्रम
हिजबुल्ला और हमास जैसे संगठनों को समर्थन
और अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप
इन सबने स्थिति को और उलझा दिया है। हाल ही में इजराइल द्वारा ईरान की परमाणु और सैन्य ठिकानों पर किए गए हमलों और अमेरिका के सैन्य समर्थन ने संघर्ष को और गहरा बना दिया है।भारत जो अब रूस और अमेरिका से भी बड़ी मात्रा में तेल खरीद रहा है, फिर भी होर्मुज स्ट्रेट पर निर्भर है। 2022 के बाद भारत ने पारंपरिक आपूर्तिकर्ताओं जैसे सऊदी अरब और इराक से इतर रूस और अमेरिका से अधिक तेल खरीदना शुरू किया।फिर भी, यह मार्ग भारत की तेल रणनीति की कमजोर कड़ी बना हुआ है। International News