इस बात पर भड़के NATO चीफ, भारत-चीन-ब्राजील को दी धमकी
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भारत
चेतना मंच
29 Nov 2025 05:04 AM
International News : यूक्रेन युद्ध को लेकर वैश्विक ध्रुवीकरण लगातार तेज होता जा रहा है। अब नाटो (NATO) के नए महासचिव मार्क रूटे ने भारत, चीन और ब्राजील को लेकर बेहद तीखा बयान दिया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर ये देश रूस से तेल और गैस की खरीद जारी रखते हैं तो अमेरिका द्वारा उन पर 100 फीसदी सेकेंडरी सैंक्शंस (दंडात्मक शुल्क) लगाए जा सकते हैं।
व्यापार करने पर हो सकती है कड़ी कार्रवाई
रूटे की यह टिप्पणी ऐसे समय पर आई है जब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही यह संकेत दे चुके हैं कि रूस के साथ व्यापार करने वाले देशों पर कड़ी कार्रवाई हो सकती है। हालांकि ट्रंप ने सीधे तौर पर किसी देश का नाम नहीं लिया था, लेकिन नाटो चीफ ने साफ कर दिया कि उनका इशारा भारत, चीन और ब्राजील की ओर है तीनों देश जो यूक्रेन पर 2022 में रूसी हमले के बाद से अब तक रूसी तेल और गैस खरीद रहे हैं।
"अगर आप भारत के प्रधानमंत्री हैं... तो ये बात गंभीरता से लीजिए"
अमेरिकी सीनेटरों के साथ एक बैठक में रूटे ने कहा, “अगर आप चीन के राष्ट्रपति, भारत के प्रधानमंत्री या ब्राजील के राष्ट्रपति हैं और अब भी रूस के साथ व्यापार कर रहे हैं, तो समझ लीजिए कि मैं 100% सेकेंडरी सैंक्शंस लगाने जा रहा हूं। ये प्रतिबंध भारी पड़ेंगे।” उन्होंने आगे कहा कि इन देशों को पुतिन पर सीजफायर और शांति वार्ता के लिए दबाव डालना चाहिए। "अगर बीजिंग, दिल्ली और ब्राज़ीलिया में बैठी सरकारें अब भी चुप हैं, तो उन्हें इस चुप्पी की कीमत चुकानी पड़ सकती है।"
अमेरिका के भीतर भी उठी सख्त कार्रवाई की मांग
जानकारी के मुताबिक अमेरिकी सीनेट में एक ऐसा प्रस्ताव पेश किया गया है, जिसमें रूस से तेल या किसी भी तरह का व्यापार करने वाले देशों पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की बात कही गई है। रूटे ने कहा, “शायद इन देशों को अभी तक अंदाजा नहीं है कि ये प्रतिबंध किस स्तर के होंगे। लेकिन जब समझ में आएगा, तब बहुत देर हो चुकी होगी। अब वक्त है कि पुतिन पर दबाव बनाया जाए नहीं तो असर सीधे भारत, ब्राजील और चीन की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ेगा।”
भारत-चीन हैं रूस के सबसे बड़े तेल खरीदार
बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, थिंक टैंक Centre for Research on Energy and Clean Air के आंकड़े बताते हैं कि रूस से सबसे अधिक कच्चा तेल चीन और भारत ने खरीदा है। भारत ने 2024 में प्रतिदिन 1.8 से 2.07 मिलियन बैरल कच्चा तेल रूस से आयात किया, जो उसके कुल तेल आयात का करीब 44% है। इसकी अनुमानित वैल्यू 52.73 बिलियन डॉलर रही। वहीं, चीन ने इसी अवधि में प्रतिदिन 1.76 से 2 मिलियन बैरल रूसी तेल मंगवाया, जो उसके कुल आयात का 20-22% है। इसकी वैल्यू 78 बिलियन यूरो तक आंकी गई। मार्च 2023 में इन दोनों देशों ने मिलकर रूस के 91% तेल निर्यात का हिस्सा बन गए थे।
सामरिक संतुलन या कूटनीतिक दबाव?
भारत ने शुरू से ही यूक्रेन युद्ध पर एक संतुलित रुख अपनाया है। रूस के साथ पुराने रक्षा और ऊर्जा संबंधों को बनाए रखते हुए भी भारत ने संयुक्त राष्ट्र में युद्ध की आलोचना की है। लेकिन अब नाटो की धमकी भारत के लिए एक नई कूटनीतिक चुनौती लेकर आई है एक तरफ ऊर्जा सुरक्षा की ज़रूरतें हैं और दूसरी तरफ अमेरिका और यूरोपीय देशों का दबाव।
जानकारी है कि भारत और अमेरिका के बीच एक नया व्यापार समझौता तैयार हो रहा है, जिसमें अमेरिका द्वारा भारत पर 20% तक टैरिफ लगाए जाने की संभावनाएं हैं। ऐसे में सेकेंडरी सैंक्शंस लागू हुए तो भारत-अमेरिका संबंधों पर भी असर पड़ सकता है।