ये क्या बेवकूफी करने चली है अमेरिका? इस फैसले से टूट सकती हैं लाखों सांसें
भारत
चेतना मंच
01 Dec 2025 05:45 PM
International News : अमेरिका द्वारा अचानक HIV कार्यक्रमों के लिए दी जा रही अंतरराष्ट्रीय फंडिंग पर रोक लगाए जाने का असर अब वैश्विक स्तर पर दिखने लगा है। इलाज, जांच और जीवनरक्षक दवाओं की आपूर्ति की व्यवस्था कई देशों में चरमराने लगी है। UNAIDS की ताजा रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि अगर यह फंडिंग जल्द बहाल नहीं हुई, तो 2029 तक दुनिया में 40 लाख लोगों की जान जा सकती है और 60 लाख से ज्यादा लोग HIV संक्रमण की चपेट में आ सकते हैं
एक उम्मीद जो रह गई अधूरी
साल 2003 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश द्वारा शुरू किया गया PEPFAR (President’s Emergency Plan for AIDS Relief) प्रोग्राम, HIV के खिलाफ दुनिया का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय सहायता कार्यक्रम था। इसने 80 करोड़ से ज्यादा लोगों की जांच और करीब 2 करोड़ संक्रमित लोगों को मुफ्त इलाज उपलब्ध कराया। लेकिन जनवरी 2025 में डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद अमेरिका ने इस प्रोग्राम की वैश्विक फंडिंग अचानक रोक दी। इसके चलते अफ्रीकी और एशियाई देशों में क्लीनिक बंद हो गए, सप्लाई चेन टूट गई और हजारों स्वास्थ्यकर्मियों की नौकरी चली गई।
HIV कंट्रोल की रफ्तार पर ब्रेक
UNAIDS का कहना है कि इस फैसले से सबसे बड़ा झटका उन गरीब और मध्यम आय वाले देशों को लगा है, जहां HIV संक्रमण पहले से ही बड़ी चुनौती है। जांच अभियान रुक गए हैं, जनजागरूकता कार्यक्रम ठप हो गए हैं, और कम्युनिटी आधारित संस्थाएं दम तोड़ रही हैं। WHO समेत कई वैश्विक एजेंसियों को अब इन ढांचे को फिर से खड़ा करने की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।
डेटा हो गया था गायब
अमेरिका की फंडिंग सिर्फ दवाओं और उपकरणों तक सीमित नहीं थी। PEPFAR अफ्रीकी देशों में HIV से जुड़ा विस्तृत डेटा इकट्ठा करता था, जिससे सरकारें और एजेंसियां भविष्य की रणनीति बनाती थीं। अब जब ये सपोर्ट बंद हुआ है तो न तो मरीजों का पूरा डेटा है और न ही भविष्य की कार्ययोजना का कोई ठोस आधार।
गरीब देशों के लिए मुश्किल
उधर एक नई HIV रोधी दवा Yeztugo ने आशा की एक किरण जरूर जगाई है। यह दवा साल में सिर्फ एक बार लेने पर संक्रमण को लगभग 100% तक रोकने में सक्षम है। अमेरिकी FDA ने इसे मंजूरी दी है और दक्षिण अफ्रीका इसे लागू करने की तैयारी में है। लेकिन इस दवा को बनाने वाली अमेरिकी फार्मा कंपनी Gilead ने इसे केवल गरीब देशों को रियायती दर पर देने की बात कही है। लैटिन अमेरिका और कई मिड-इनकम देशों को इस लिस्ट से बाहर कर दिया गया है जबकि वहीं HIV संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है।
...तो दुनिया बढ़ सकती है स्वास्थ्य आपदा की ओर
अमेरिका के इस एकतरफा फैसले ने वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। एड्स के खिलाफ दशकों की मेहनत अब जोखिम में है। अगर जल्द अंतरराष्ट्रीय सहयोग नहीं बहाल हुआ, तो न केवल लाखों जिंदगियां दांव पर होंगी, बल्कि पूरी दुनिया एक बड़ी स्वास्थ्य आपदा की ओर बढ़ सकती है।