International Tiger Day: जानिए कहां हैं सबसे ज्यादा बाघ और क्या है सबसे बड़ा खतरा?
International Tiger Day
भारत
चेतना मंच
02 Dec 2025 01:16 AM
हर साल 29 जुलाई को इंटरनेशनल टाइगर डे (International Tiger Day) मनाया जाता है। 29 जुलाई सिर्फ बाघों की खूबसूरती और ताकत का जश्न नहीं बल्कि उनके तेजी से घटते अस्तित्व पर चेतावनी भी है। एक सदी पहले तक जहां टाइगर लाखों की संख्या में जंगलों में गूंजते थे वहीं आज उनकी संख्या घटकर महज 3,890 से 4,000 तक रह गई है। लेकिन इस संकट के बीच भारत एक उम्मीद की रोशनी बनकर उभरा है। दुनिया के कुल बचे बाघों में से 75% यानी करीब 3,682 टाइगर भारत में हैं। यह आंकड़ा बताता है कि भारत ने न केवल टाइगर को बचाया बल्कि उनकी संख्या बढ़ाने में भी बड़ी सफलता पाई है। International Tiger Day
कहां कितने बचे हैं टाइगर?
100 साल पहले टाइगर पूरे एशिया के जंगलों में आजादी से घूमते थे लेकिन शिकार, जंगलों की कटाई और अंगों की तस्करी ने उन्हें लुप्तप्राय प्रजाति बना दिया। 2022 के आंकड़ों के अनुसार इन देशों में इतने टाइगर हैं।
भारत: 3,682 टाइगर
रूस (साइबेरियन टाइगर): 500-600
इंडोनेशिया (सुमात्रा टाइगर): लगभग 400 (गंभीर रूप से संकटग्रस्त)
नेपाल: 350-400
मलेशिया: लगभग 150
बांग्लादेश (सुंदरबन): 100-120
थाईलैंड: 150
म्यांमार, भूटान, चीन: 50 से भी कम
भारत बाघों की सबसे सुरक्षित पनाहगाह
ग्लोबल टाइगर फोरम चेतावनी दे चुका है कि यदि संरक्षण प्रयासों में तेजी नहीं लाई गई, तो टाइगर कुछ इलाकों से पूरी तरह गायब हो सकते हैं। भारत में 1973 में शुरू हुए 'प्रोजेक्ट टाइगर' ने संरक्षण की दिशा में क्रांतिकारी काम किया। आज देश में 53 टाइगर रिजर्व हैं। 2018 की तुलना में 2022 में टाइगर की संख्या 2967 से बढ़कर 3682 हो गई यानि 24% की छलांग। यह उपलब्धि NTCA (नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी) और फॉरेस्ट गार्ड्स की मेहनत का नतीजा है।
मध्य प्रदेश – 785 टाइगर
कर्नाटक – 563
उत्तराखंड – 560
क्यों खतरे में हैं बाघ?
शिकार और अवैध व्यापार: खाल, हड्डी और अंगों की अंतरराष्ट्रीय मांग।
जंगलों की कटाई: रिहाइश क्षेत्र सिकुड़ रहे हैं।
शिकार की कमी: हिरण और सुअर जैसे जानवरों की घटती संख्या।
इंसान-वन्यजीव संघर्ष: गांवों के पास आने पर टाइगर को मार दिया जाता है।
ड्रोन और कैमरा ट्रैप से निगरानी।
सख्त कानून: वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन एक्ट।
एंटी-पोचिंग टीम और रैपिड रेस्पॉन्स फोर्स।
इको-टूरिज्म और स्थानीय समुदायों की भागीदारी से संरक्षण में सहयोग।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
वन्यजीव विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत का टाइगर संरक्षण मॉडल दुनिया के लिए रोल मॉडल बन चुका है। लेकिन चेतावनी भी है, “अगर जंगल और शिकार की आबादी नहीं बढ़ी और इंसान-टाइगर संघर्ष नहीं घटा तो यह बढ़ोतरी स्थायी नहीं रह पाएगी।” इंटरनेशनल टाइगर डे सिर्फ बाघों की गिनती नहीं बल्कि यह प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारी का दिन है।