परमाणु ठिकाने तो बहाना हैं, असली खेल ईरान में सत्ता बदलने का चल रहा
भारत
चेतना मंच
01 Dec 2025 08:59 PM
Iran-Israel War : ईरान और इजरायल को नजदीक से देखने और उसपर निगाह रखने वालों का यह मानना है कि ईरान पर इजरायल का हमला महज परमाणु ठिकानों को निशाना बनाने तक सीमित नहीं है। अंदरखाने कुछ और ही चल रहा है। एक बड़ा और जोखिम भरा जुआ, जिसका मकसद तेहरान की सत्ता की चूलें हिलाना हो सकता है। हालांकि शुरुआत परमाणु बम कार्यक्रम को निष्क्रिय करने के नाम पर हुई, लेकिन अब संकेत कुछ और ही कहानी कह रहे हैं।
सत्ता परिवर्तन की रणनीति?
इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की हालिया अपील इशारा करती है कि यह युद्ध सिर्फ सैन्य नहीं, राजनीतिक मोर्चे पर भी लड़ा जा रहा है। उन्होंने ईरानी जनता से 'दमनकारी शासन' के खिलाफ उठ खड़े होने की अपील की है। उनके इस बयान को सत्ता परिवर्तन की एक कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। हमलों में ईरान के कई शीर्ष सैन्य अफसरों की मौत और सरकार पर बढ़ता दबाव इसी दिशा में एक कदम हो सकता है।
विपक्ष में एकता का अभाव
लेकिन नेतन्याहू की उम्मीदों पर पानी फिर सकता है, क्योंकि ईरान में कोई एकजुट विपक्ष नहीं है। बीबीसी की एक विश्लेषणात्मक रिपोर्ट बताती है कि फिलहाल कोई ऐसा राजनीतिक चेहरा नहीं है जो सत्ता संभाल सके। रजा पहलवी (पूर्व शाह का बेटा), मोजाहिदीन-ए-खल्क जैसे विपक्षी समूह मौजूद तो हैं, लेकिन उनकी विचारधाराएं बंटी हुई हैं। कोई लोकतांत्रिक शासन की मांग करता है, तो कोई राजशाही की वापसी चाहता है।
ईरान भी दोराहे पर
ईरान खुद भी दुविधा में है। एक ओर उसे जवाबी हमला तेज करना है, दूसरी ओर वह अमेरिका जैसे देशों से फिर परमाणु समझौते की संभावना भी टटोल रहा है। हालिया जन आंदोलन, जिसने कुछ समय के लिए सत्ताधारियों को चुनौती दी थी, वह भी टिक नहीं सका। ऐसे में न तो कोई स्थायी विकल्प दिख रहा है और न ही क्षेत्रीय स्थिरता की गारंटी।
नतीजे हो सकते हैं विनाशकारी
यदि सत्ता परिवर्तन सफल नहीं हुआ और देश अराजकता में डूब गया, तो नतीजा मध्य एशिया में गंभीर संकट के रूप में सामने आ सकता है। गृह युद्ध, आतंकी संगठनों का पुनरुत्थान और बाहरी शक्तियों का सीधा हस्तक्षेप, ये सभी आशंकाएं अब सिर उठाने लगी हैं। सच तो यह है कि इजरायल ने एक बड़ा दांव खेला है। लेकिन अगर यह जुआ उल्टा पड़ा, तो इसके झटके सिर्फ तेहरान नहीं, पूरी दुनिया महसूस करेगी।