New Year के मौके पर स्विट्जरलैंड में बड़ा धमाका, कई लोगों की मौत की आशंका

Switzerland blast: स्विट्ज़रलैंड से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। नए साल के पहले दिन स्विट्ज़रलैंड के लग्जरी अल्पाइन स्की रिसॉर्ट में भीषण धमाका हुआ। धमाके में कई लोगों के मारे जाने और घायल होने की आशंका जताई जा रही है।

स्विट्जरलैंड
नए साल में स्विट्जरलैंड में बड़ा धमाका
locationभारत
userअसमीना
calendar01 Jan 2026 12:28 PM
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नए साल के पहले दिन स्विट्जरलैंड के एक लग्जरी अल्पाइन स्की रिजॉर्ट में स्थित बार में भीषण धमाका होने की खबर है। इस हादसे में कई लोगों के मारे जाने की आशंका जताई जा रही है। स्थानीय प्रशासन के मुताबिक पुलिस ने पूरे इलाके को घेर लिया है और राहत व बचाव कार्य जारी है।

स्विट्जरलैंड में बड़ा धमाका

जानकारी के मुताबिक, स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि धमाके के कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है लेकिन इस घटना में कई लोगों के हताहत होने की संभावना है। धमाके के तुरंत बाद रिजॉर्ट में भीषण आग लग गई जिससे अफरातफरी मच गई।

अचानक हुआ जोरदार धमाका

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, लोग नए साल का जश्न मना रहे थे तभी अचानक जोरदार धमाका हुआ। धमाके के बाद लोग चीखते-चिल्लाते हुए बाहर की ओर भागते नजर आए। पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंच गई है। 

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नव वर्ष का असली इतिहास: 1 जनवरी की परंपरा कहां से आई?

मगर क्या आपने कभी सोचा है कि नववर्ष मनाने की यह परंपरा शुरू कैसे हुई और आखिर 1 जनवरी ही दुनिया के लिए नए साल की तारीख क्यों बन गई? हमें यह सब आज सामान्य लगता है, लेकिन इसके पीछे सत्ता, धर्म, राजनीति से जुड़े सदियों पुराने फैसलों की एक दिलचस्प कहानी जुड़ी हुई है।

1 जनवरी ही नया साल क्यों बना
1 जनवरी ही नया साल क्यों बना?
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar01 Jan 2026 12:08 PM
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New Year 1 January History : नव वर्ष 2026 की शुरुआत हो चुकी है। नव वर्ष 2026 की शुरुआत के साथ ही दुनिया भर में जश्न की रौशनी फैल चुकी है। भारत से लेकर अमेरिका, इंग्लैंड और जर्मनी तक हर जगह आतिशबाजियां, पार्टियां और शुभकामनाओं का सिलसिला जारी है। मगर क्या आपने कभी सोचा है कि नववर्ष मनाने की यह परंपरा शुरू कैसे हुई और आखिर 1 जनवरी ही दुनिया के लिए नए साल की तारीख क्यों बन गई? हमें यह सब आज सामान्य लगता है, लेकिन इसके पीछे सत्ता, धर्म, राजनीति से जुड़े सदियों पुराने फैसलों की एक दिलचस्प कहानी जुड़ी हुई है।

जनवरी नहीं मार्च से शुरू होता था प्राचीन रोम का साल

आज जिस जनवरी को हम नए साल की शुरुआत मानते हैं, कभी वह रोमन कैलेंडर के वजूद में था ही नहीं। शुरुआती दौर में रोम का कैलेंडर सिर्फ 10 महीनों का माना जाता था और साल की पहली सुबह मार्च महीने से शुरू होती थी। इसके पीछे की वजह भी व्यावहारिक थी,मार्च का महीना खेती के काम और युद्ध अभियानों के लिए अनुकूल माना जाता था। फिर लगभग 713 ईसा पूर्व में रोमन राजा न्यूमा पोम्पिलियस ने समय-गणना को नया आकार देते हुए जनवरी और फरवरी को कैलेंडर में शामिल किया। जनवरी का नाम रोमन देवता जानूस (Janus) के नाम पर रखा गया, जिसे दो चेहरों वाला देवता माना जाता था। एक चेहरा अतीत की ओर और दूसरा भविष्य की ओर देखता है। यही प्रतीकवाद जनवरी को नई शुरुआत और पुराने साल के समापन का संदेश देने लगा और आगे चलकर यही सोच 1 जनवरी को New Year की तारीख बनाने की नींव बनी।

1 जनवरी को न्यू ईयर मानने की शुरुआत कैसे हुई?

शुरुआती दौर में रोम में नया साल मार्च से ही गिना जाता था, लेकिन समय के साथ सत्ता ने कैलेंडर की दिशा भी बदल दी। 153 ईसा पूर्व में रोमन सीनेट ने बड़ा निर्णय लेते हुए तय किया कि सरकारी कामकाज और शीर्ष शासकीय पदों की जिम्मेदारी अब 1 जनवरी से संभाली जाएगी। इसके पीछे वजहें पूरी तरह व्यावहारिक थीं युद्ध की तैयारियों, प्रशासनिक योजना और शासन व्यवस्था को एक तय शुरुआत की जरूरत थी। यही फैसला धीरे-धीरे जनता की आदत और परंपरा में भी उतरता गया। इसके बाद 46 ईसा पूर्व में सम्राट जूलियस सीज़र ने समय-गणना को नई शक्ल देते हुए जूलियन कैलेंडर लागू किया। इसी कैलेंडर में साल की अवधि तय हुई, लीप ईयर की व्यवस्था बनी और 1 जनवरी को आधिकारिक तौर पर New Year का दर्जा मिल गया। यहीं से 1 जनवरी को नया साल मनाने की परंपरा ने दुनिया के इतिहास में अपनी जगह पक्की कर ली।

कैसे 1 जनवरी बना ग्लोबल न्यू ईयर?

मध्यकाल के यूरोप में न्यू ईयर की तारीख हर जगह एक जैसी नहीं थी। कई देशों में नया साल कभी 25 मार्च को मनाया जाता, तो कहीं क्रिसमस के आसपास साल बदलने की परंपरा चल पड़ी। इसी दौर में चर्च ने 1 जनवरी को मनाए जाने वाले उत्सवों को पगान/मूर्तिपूजक परंपरा मानकर इसे अपनाने में हिचक दिखाई, इसलिए 1 जनवरी लंबे समय तक सर्वमान्य तारीख नहीं बन पाई। फिर इतिहास ने एक निर्णायक मोड़ लिया। 1582 में पोप ग्रेगरी XIII ने समय-गणना की खामियों को दुरुस्त करते हुए ग्रेगोरियन कैलेंडर लागू किया। इसी कैलेंडर ने 1 जनवरी को आधिकारिक रूप से नए साल की शुरुआत का दर्जा दिया। इसके बाद यूरोप के देश धीरे-धीरे इसी व्यवस्था के साथ चलते गए और फिर यही कैलेंडर दुनिया के बड़े हिस्से का मानक बन गया। नतीजा यह हुआ कि 1 जनवरी आज वैश्विक स्तर पर New Year की पहचान बन चुकी है।

भारत में 1 जनवरी का न्यू ईयर कब से मनाया जाता है?

भारत में नववर्ष की परंपराएं हमेशा से विविध रही हैं विक्रम संवत, शक संवत, चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, बैसाखी, पोहेला बोइशाख जैसी कई मान्यताएं अलग-अलग क्षेत्रों में प्रचलित हैं। लेकिन आधुनिक शासन-प्रशासन में बदलाव ब्रिटिश काल में आया, जब भारत में सरकारी और कानूनी कामकाज के लिए ग्रेगोरियन कैलेंडर अपनाया गया। चूंकि सरकारी दस्तावेज, अदालतें, बजट, शैक्षणिक और प्रशासनिक व्यवस्था इसी कैलेंडर पर चलने लगी, इसलिए भारत में भी 1 जनवरी को “इंग्लिश न्यू ईयर” के रूप में मनाने की परंपरा स्थापित हो गई। New Year 1 January History

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रूस भारत को एक और अत्याधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम देगा, वायु सुरक्षा होगी अभेद्य

एस-350 वित्याज रूस द्वारा विकसित एक आधुनिक सर्फेस टू एयर मिसाइल (एसएएम) प्रणाली है। इसे खास तौर पर ऐसे खतरों से निपटने के लिए तैयार किया गया है जो कम और मध्यम ऊँचाई पर तेजी से हमला करते हैं।

s 350
एस-350 सिस्टम
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar31 Dec 2025 02:57 PM
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India-Russia Security : रूस ने भारत को एक बार फिर अपना आधुनिक मध्यम दूरी का एयर डिफेंस सिस्टम एस-350 वित्याज देने का प्रस्ताव रखा है। इस पेशकश की खास बात यह है कि इसमें तकनीक हस्तांतरण का विकल्प भी शामिल है, जिससे भारत में स्वदेशी उत्पादन की राह खुल सकती है।

एस-350 वित्याज क्या है?

एस-350 वित्याज रूस द्वारा विकसित एक आधुनिक सर्फेस टू एयर मिसाइल (एसएएम) प्रणाली है। इसे खास तौर पर ऐसे खतरों से निपटने के लिए तैयार किया गया है जो कम और मध्यम ऊँचाई पर तेजी से हमला करते हैं। यह सिस्टम रूस की बहु-स्तरीय वायु रक्षा रणनीति का हिस्सा है, जहाँ लंबी दूरी के लिए एस-400, मध्यम दूरी के लिए एस-350 और नजदीकी रक्षा के लिए छोटे सिस्टम एक साथ काम करते हैं।

एस-350 की प्रमुख खूबियाँ

* एक साथ कई हवाई लक्ष्यों को पहचानने और नष्ट करने की क्षमता

* फाइटर जेट, ड्रोन और क्रूज मिसाइल जैसे खतरों के खिलाफ प्रभावी

* आधुनिक रडार और तेज प्रतिक्रिया प्रणाली

* एस-400 की तुलना में कम लागत और आसान तैनाती

भारत के लिए इसका महत्व

भारत को दो सक्रिय सुरक्षा चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, पाकिस्तान और चीन। 

पाकिस्तान के संदर्भ में कम ऊँचाई पर उड़ने वाले फाइटर जेट और क्रूज मिसाइलों द्वारा अचानक हमले कोएस-350 ऐसे खतरों को समय रहते रोकने में सक्षम है। दूसरी ओर चीन के संदर्भ में बड़ी संख्या में ड्रोन और आधुनिक लड़ाकू विमान सीमावर्ती इलाकों में तेज और लचीली वायु रक्षा की जरूरत के मुताबिक यहाँ एस-350 एक संतुलित और प्रभावी समाधान बन सकता है।

भारत की मौजूदा एयर डिफेंस प्रणाली में भूमिका

भारत पहले से ही आकाश मिसाइल सिस्टम, बाराक-8, एस-400 जैसी प्रणालियाँ इस्तेमाल कर रहा है। एस-350 इन सभी के बीच की खाली जगह को भरते हुए पूरी एयर डिफेंस चेन को और मजबूत कर सकता है। हालिया उच्च-स्तरीय वातार्ओं में अतिरिक्त एस-400 यूनिट और भविष्य के एस-500 सिस्टम पर भी चर्चा हुई है। हालाँकि, रूस फिलहाल एस-350 को सबसे तुरंत उपलब्ध और व्यावहारिक विकल्प मान रहा है। यह सिस्टम भारत की वायु सुरक्षा क्षमता को नया स्तर दे सकता है। दो-मोर्चों पर रक्षा को मजबूत करेगा

और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के कारण आत्मनिर्भर भारत की दिशा में सहायक होगा।

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