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मध्य पूर्व में एक बार फिर हालात विस्फोटक होते जा रहे हैं। ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच जारी टकराव अब खुली सैन्य झड़पों के करीब पहुंचता दिख रहा है। दोनों देशों के बीच बढ़ती आक्रामकता ने न सिर्फ क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है।

Iran-US Conflict : मध्य पूर्व में एक बार फिर हालात विस्फोटक होते जा रहे हैं। ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच जारी टकराव अब खुली सैन्य झड़पों के करीब पहुंचता दिख रहा है। दोनों देशों के बीच बढ़ती आक्रामकता ने न सिर्फ क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह तनाव अचानक नहीं बल्कि लंबे समय से चल रहे राजनीतिक, सैन्य और आर्थिक विवादों का परिणाम है। परमाणु कार्यक्रम को लेकर ईरान पर लगातार आरोप लगते रहे हैं, जबकि संयुक्त राज्य अमेरिका ने कई बार कड़े प्रतिबंध लगाए हैं। हाल के दिनों में खाड़ी क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों और ड्रोन हमलों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।
सूत्रों के मुताबिक, ईरान ने अपने मिसाइल सिस्टम और नौसेना की गतिविधियों को तेज कर दिया है। वहीं संयुक्त राज्य अमेरिका ने भी अपने युद्धपोत और फाइटर जेट्स को रणनीतिक रूप से तैनात कर दिया है। खाड़ी क्षेत्र में लगातार युद्धाभ्यास और निगरानी मिशन चलाए जा रहे हैं।
इस टकराव का सबसे ज्यादा असर पूरे मध्य पूर्व पर पड़ रहा है। इज़राइल, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था को हाई अलर्ट पर रखा है। तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका से वैश्विक बाजारों में भी हलचल देखने को मिल रही है।
संयुक्त राष्ट्र और कई वैश्विक संगठनों ने दोनों देशों से संयम बरतने की अपील की है। संयुक्त राष्ट्र ने साफ कहा है कि अगर हालात नहीं सुधरे तो यह संघर्ष एक बड़े युद्ध में बदल सकता है, जिसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा।
भारत जैसे देशों के लिए यह स्थिति बेहद संवेदनशील है। भारत की बड़ी आबादी खाड़ी देशों में काम करती है और तेल आयात का बड़ा हिस्सा भी इसी क्षेत्र से आता है। ऐसे में यदि संघर्ष बढ़ता है तो पेट्रोल-डीजल की कीमतों में उछाल और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा चिंता का विषय बन सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कूटनीतिक प्रयास सफल नहीं हुए तो हालात और बिगड़ सकते हैं। हालांकि बैक-चैनल बातचीत की खबरें भी सामने आ रही हैं, जिससे उम्मीद की जा रही है कि दोनों देश सीधे युद्ध से बचने की कोशिश करेंगे। ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच बढ़ता यह तनाव केवल दो देशों का विवाद नहीं रह गया है, बल्कि यह वैश्विक स्थिरता के लिए एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद अहम होगा कि क्या कूटनीति जीतती है या दुनिया एक और बड़े युद्ध की ओर बढ़ती है। Iran-US Conflict