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मध्य पूर्व में लंबे समय से जारी तनाव के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा दावा करते हुए कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित शांति समझौते पर रविवार को हस्ताक्षर हो सकते हैं।

Middle East Conflict : मध्य पूर्व में लंबे समय से जारी तनाव के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा दावा करते हुए कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित शांति समझौते पर रविवार को हस्ताक्षर हो सकते हैं। ट्रंप के अनुसार, यदि समझौता तय समय पर संपन्न हो जाता है तो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक स्ट्रेट आफ होर्मुज को फिर से सभी देशों के लिए खोल दिया जाएगा। ट्रंप के इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक हलकों के साथ-साथ ऊर्जा बाजारों का भी ध्यान अपनी ओर खींचा है, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति की जीवनरेखा माना जाता है।
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अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने बयान में पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में हुए जेसीपीओए (जॉइंट कॉम्प्रिहेंसिव प्लान आॅफ एक्शन) का उल्लेख करते हुए कहा कि वह समझौता ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के बजाय उसके लिए रास्ता आसान बना सकता था। ट्रंप ने दावा किया कि उनकी सरकार द्वारा तैयार किया गया नया ढांचा पहले की नीतियों से पूरी तरह अलग है और इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान किसी भी परिस्थिति में परमाणु हथियार विकसित न कर सके।
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विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह खुलता है तो इसका असर केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा। दुनिया के बड़े हिस्से की ऊर्जा आपूर्ति इसी समुद्री मार्ग से गुजरती है। ऐसे में जहाजों की आवाजाही सामान्य होने से कच्चे तेल की सप्लाई स्थिर हो सकती है और वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता कम हो सकती है। ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों के अनुसार, हाल के महीनों में क्षेत्रीय तनाव के कारण तेल बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। ऐसे में किसी भी शांति पहल को निवेशकों और आयातक देशों द्वारा सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
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परमाणु कार्यक्रम पर अमेरिका का सख्त रुख बरकरार
ट्रंप ने अपने बयान में यह भी कहा कि क्षेत्र में हालात सामान्य होने के बाद अमेरिका ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी सामग्री की निगरानी और निष्क्रियकरण की दिशा में काम करेगा। उन्होंने संकेत दिया कि वाशिंगटन भविष्य में भी ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर कड़ी नजर बनाए रखेगा। हालांकि, इस संबंध में अमेरिकी प्रशासन की ओर से विस्तृत योजना सार्वजनिक नहीं की गई है और न ही ईरानी पक्ष ने ट्रंप के सभी दावों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया दी है। इस बीच शहबाज शरीफ ने भी संकेत दिया है कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रही वातार्एं निर्णायक चरण में पहुंच चुकी हैं। उनका कहना है कि अगले 24 घंटों के भीतर समझौते को अंतिम रूप दिया जा सकता है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने भी बातचीत की प्रगति का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई है कि यह पहल पूरे क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता स्थापित करने में मददगार साबित होगी।
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हालांकि ट्रंप और पाकिस्तान की ओर से आशावादी बयान सामने आए हैं, लेकिन खबर लिखे जाने तक ह्वाइट हाउस तथा ईरानी अधिकारियों की ओर से समझौते पर हस्ताक्षर की समय-सीमा को लेकर कोई औपचारिक पुष्टि नहीं की गई थी। ऐसे में दुनिया की निगाहें अब संभावित समझौते पर टिकी हैं। यदि यह पहल सफल होती है तो न केवल अमेरिका-ईरान संबंधों में नई शुरुआत हो सकती है, बल्कि पूरे मध्य पूर्व में स्थिरता और आर्थिक गतिविधियों को भी नया बल मिल सकता है। अमेरिका और ईरान के बीच दशकों से अविश्वास और टकराव का इतिहास रहा है। परमाणु कार्यक्रम, आर्थिक प्रतिबंध, क्षेत्रीय प्रभाव और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर दोनों देशों के बीच कई बार तनाव चरम पर पहुंचा। ऐसे में यदि शांति समझौता वास्तव में साकार होता है, तो इसे हाल के वर्षों की सबसे महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धियों में गिना जा सकता है। दुनिया अब इस बात का इंतजार कर रही है कि क्या यह घोषणा केवल राजनीतिक संदेश साबित होगी या वास्तव में मध्य पूर्व में एक नए दौर की शुरुआत करेगी।
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