ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच ऐसी खबर सामने आई है, जिसने वैश्विक स्तर पर हलचल तेज कर दी है। ईरान ने दावा किया है कि उसने अमेरिकी वायुसेना के दो लड़ाकू विमानों को निशाना बनाकर गिरा दिया।

Iran-US War : ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच ऐसी खबर सामने आई है, जिसने वैश्विक स्तर पर हलचल तेज कर दी है। ईरान ने दावा किया है कि उसने अमेरिकी वायुसेना के दो लड़ाकू विमानों को निशाना बनाकर गिरा दिया। अगर यह दावा पूरी तरह सही साबित होता है, तो यह पिछले करीब 20 वर्षों में पहली बार होगा जब किसी विदेशी मोर्चे पर अमेरिका को इस तरह का बड़ा सैन्य नुकसान उठाना पड़ा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक अमेरिकी पायलट को सुरक्षित निकाल लिया गया है, जबकि दूसरे पायलट का अब तक पता नहीं चल पाया है। इस घटनाक्रम ने युद्ध की गंभीरता और अमेरिका-ईरान टकराव की तीव्रता को और बढ़ा दिया है। खास बात यह है कि एक तरफ डोनाल्ड ट्रंप यह कह चुके हैं कि ईरान पूरी तरह कमजोर पड़ चुका है, वहीं दूसरी ओर तेहरान लगातार जवाबी कार्रवाई की क्षमता दिखाने का दावा कर रहा है।
ईरान की ओर से कहा गया है कि शुक्रवार को उसने अमेरिकी वायुसेना के एफ-15ई स्ट्राइक ईगल को मार गिराया। अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से यह भी सामने आया कि विमान में सवार एक पायलट को बचा लिया गया, जबकि दूसरे की तलाश जारी है। ईरानी मीडिया ने यह दावा भी किया है कि अमेरिका के ए-10 विमान को भी निशाना बनाया गया।
माना जा रहा है कि अगर इन दावों की पुष्टि होती है, तो यह इराक युद्ध के बाद अमेरिकी सैन्य इतिहास की बड़ी घटनाओं में शामिल हो सकता है। इससे पहले वर्ष 2003 में इराक युद्ध के दौरान ए-10 थंडरबोल्ट-II विमान के गिराए जाने की घटना सामने आई थी। अमेरिकी सैन्य हलकों में इस घटनाक्रम को बेहद गंभीर माना जा रहा है, क्योंकि लंबे समय से किसी विरोधी देश द्वारा अमेरिकी लड़ाकू विमान गिराए जाने की घटना सामने नहीं आई थी।
इस संघर्ष में अमेरिका को सिर्फ हवाई मोर्चे पर ही नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर भी नुकसान उठाना पड़ा है। रिपोर्ट के अनुसार, अब तक 13 अमेरिकी सैनिकों की मौत हो चुकी है, जबकि 365 सैनिक घायल हुए हैं। यह आंकड़े अमेरिकी रक्षा विभाग के हवाले से सामने आए बताए जा रहे हैं। घायलों में अमेरिकी सेना के 247 जवान, नौसेना के 63 कर्मी, वायुसेना के 36 सदस्य और 19 मरीन शामिल बताए गए हैं। हालांकि यह अभी साफ नहीं हो पाया है कि हाल में लड़ाकू विमान गिराए जाने के बाद चलाए गए रेस्क्यू ऑपरेशन में घायल हुए सैनिक भी इसी सूची में जोड़े गए हैं या नहीं।
अमेरिकी प्रशासन की ओर से आधिकारिक स्तर पर स्थिति को लेकर सावधानी बरती जा रही है। नाम न बताने की शर्त पर एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि शुरुआती स्तर पर यह स्पष्ट नहीं था कि विमान तकनीकी खराबी की वजह से दुर्घटनाग्रस्त हुआ या उसे मार गिराया गया। साथ ही यह भी तत्काल स्पष्ट नहीं हो सका कि घटना में ईरान की सीधी भूमिका थी या नहीं। विमान के क्रैश होने की सटीक जगह और चालक दल की वास्तविक स्थिति को लेकर भी शुरू में संशय बना रहा। यही वजह है कि इस मामले ने सैन्य और कूटनीतिक दोनों स्तरों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
दो दिन पहले डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा था कि अमेरिका ने ईरान को बुरी तरह कमजोर कर दिया है और अपने मिशन को तेजी से पूरा कर रहा है। लेकिन ईरान की तरफ से सामने आ रहे दावे इस बयान के बिल्कुल उलट तस्वीर पेश कर रहे हैं। तेहरान यह दिखाने की कोशिश कर रहा है कि वह सिर्फ जवाब देने की स्थिति में ही नहीं, बल्कि अमेरिकी सैन्य ताकत को चुनौती देने में भी सक्षम है। Iran-US War