ईरान पर हमले के लिए बेस न देने पर भड़के ट्रंप

ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि यूनाइटेड किंगडम ईरान पर हुए हमले में शामिल नहीं है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो संदेश जारी करते हुए स्टार्मर ने कहा, "ईरान ब्रिटिश संपत्तियों पर हमला कर रहा है।

US President Donald Trump attacks Iran
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar02 Mar 2026 06:56 PM
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US Iran Conflict: ईरान के साथ चल रहे सैन्य संघर्ष के बीच अमेरिका और ब्रिटेन के बीच गहरे तनाव के संकेत मिल रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर से खुलकर नाराजगी जताई है। ट्रंप इसलिए गुस्से में हैं क्योंकि ब्रिटेन ने ईरान पर हमला करने के लिए अमेरिका को हिंद महासागर में स्थित रणनीतिक द्वीप 'डिएगो गार्सिया' का उपयोग करने की अनुमति नहीं दी थी।

'द टेलीग्राफ' को दिया बयान

ब्रिटिश अखबार 'द टेलीग्राफ' को दिए एक विशेष साक्षात्कार में राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे प्रधानमंत्री स्टार्मर से "बहुत निराश" हैं। ट्रंप ने कहा, "शायद हमारे देशों के बीच ऐसा पहले कभी नहीं हुआ होगा।" उन्होंने आरोप लगाया कि स्टार्मर ने अपने देश में विरोध के डर और वैधानिक जटिलताओं के कारण अमेरिकी सेना को इस महत्वपूर्ण बेस का इस्तेमाल करने से रोका, जो कष्टदायक है।

क्या है विवाद की वजह?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ब्रिटेन ने अंतरराष्ट्रीय कानून का हवाला देते हुए अमेरिका को डिएगो गार्सिया और RAF फेयरफोर्ड जैसे अपने बेस से ईरान पर हमला करने की इजाजत देने से इनकार कर दिया था। हालांकि, बाद में रविवार रात को स्थिति बदली और प्रधानमंत्री स्टार्मर ने "विशेष और सीमित रक्षात्मक उद्देश्यों" के लिए अमेरिका को डिएगो गार्सिया का उपयोग करने की मंजूरी दे दी।

चागोस डील से समर्थन वापस लिया

इस विवाद का असर द्विपक्षीय समझौतों पर भी दिख रहा है। डिएगो गार्सिया को लेकर हुए झगड़े के चलते राष्ट्रपति ट्रंप ने प्रधानमंत्री स्टार्मर की विवादित 'चागोस डील' से अपना समर्थन वापस ले लिया है। इस डील के तहत हिंद महासागर के चागोस क्षेत्र का मालिकाना हक मॉरीशस को सौंपने और बदले में सैन्य अड्डे को लीज पर वापस रखने की बात थी। ट्रंप का यह कदम ब्रिटिश सरकार के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।

'हम जंग में शामिल नहीं हैं': स्टार्मर

इस बीच, ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि यूनाइटेड किंगडम ईरान पर हुए हमले में शामिल नहीं है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो संदेश जारी करते हुए स्टार्मर ने कहा, "ईरान ब्रिटिश संपत्तियों पर हमला कर रहा है और ब्रिटिश लोगों को खतरे में डाल रहा है, इसलिए ब्रिटिश जेट खाड़ी में 'समन्वित रक्षात्मक अभियान' (Coordinated Defensive Operation) के हिस्से के तौर पर हवा में हैं।" उन्होंने पुष्टि की कि अमेरिका को रक्षात्मक आवश्यकताओं के लिए ब्रिटिश बेस का उपयोग करने की अनुमति दी गई है, लेकिन ब्रिटेन सीधे आक्रामक कार्रवाई का हिस्सा नहीं है।

डिएगो गार्सिया का महत्व

डिएगो गार्सिया चागोस द्वीप समूह का सबसे बड़ा द्वीप है, जो हिंद महासागर में स्थित है। यहां स्थित सैन्य अड्डा अमेरिका के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। वर्तमान में ब्रिटेन के पास इस द्वीप पर 99 साल का लीज है, जिसके तहत वे यहां सैन्य बेस बिना किसी रुकावट के संचालित करते हैं। US Iran Conflict

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अमेरिका-इजराइल को कितनी क्षति, युद्ध के 8 बड़े सवालों के जवाब

अमेरिका और इजराइल ने ईरान के करीब 24 प्रांतों को अपना निशाना बनाया। तेहरान, इस्फहान, कोम जैसे बड़े शहरों में भारी तबाही मची। फोर्डो और नतांज जैसे प्रमुख परमाणु ठिकानों पर भी हमले किए गए, जिससे ईरान का परमाणु कार्यक्रम गंभीर रूप से कमजोर हो गया है। हमलों के पहले दिन ही 201 नागरिकों की मौत हो गई।

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तबाही का दृश्य (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar01 Mar 2026 04:42 PM
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Iran-Israel War : मध्य पूर्व में तनाव अब खुले सैन्य टकराव में बदल चुका है। ईरान और इजराइल के बीच छिड़े इस युद्ध ने पूरी दुनिया को दहशत में डाल दिया है। ईरान के कई शहरों पर हवाई हमले किए गए हैं, जबकि जवाबी कार्रवाई में ईरान ने अमेरिका और इजराइल को भारी नुकसान पहुंचाया है। इस लड़ाई का असर दुनिया की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ने लगा है। 

आइए, इस युद्ध से जुड़े 8 सबसे बड़े सवालों के जवाब जानते हैं...

1. सबसे बड़ा झटका: खामेनेई की मौत

इस युद्ध का सबसे बड़ा और सनसनीखेज खुलासा ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत है। 28 फरवरी की सुबह तेहरान के पास्तुर जिले में उनके सुरक्षित बंकर पर अमेरिका और इजराइल ने सुसाइड ड्रोन से हमला किया। इस हमले में खामेनेई के साथ ही उनके परिवार के कई सदस्य और शीर्ष ईरानी अधिकारी भी मारे गए। इसके बाद ईरान में सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया तेजी से शुरू हो गई है, जिसे लेकर दुनिया की निगाहें टिकी हुई हैं।

2. ईरान में कितना हुआ विनाश?

अमेरिका और इजराइल ने ईरान के करीब 24 प्रांतों को अपना निशाना बनाया। तेहरान, इस्फहान, कोम जैसे बड़े शहरों में भारी तबाही मची। फोर्डो और नतांज जैसे प्रमुख परमाणु ठिकानों पर भी हमले किए गए, जिससे ईरान का परमाणु कार्यक्रम गंभीर रूप से कमजोर हो गया है। हमलों के पहले दिन ही 201 नागरिकों की मौत हो गई और 747 से अधिक घायल हुए। मीनाब में एक लड़कियों के स्कूल पर हुए हमले में 118 छात्राओं की जान चली गई, जो इस संघर्ष की भयावहता दर्शाता है।

3. ईरान का जवाबी हमला: अमेरिकी ठिकानों को निशाना

ईरान ने चुप्पी नहीं साधी और उसने अमेरिका के मध्य पूर्व में मौजूद 27 सैन्य ठिकानों पर जबरदस्त मिसाइल और ड्रोन हमले किए। कतर का अल उदीद एयर बेस, बहरीन में अमेरिकी नौसेना का 5वां बेड़ा और UAE-कुवैत के ठिकाने इसकी जद में आए। हालांकि, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने दावा किया कि उन्हें हल्का नुकसान हुआ है और कोई बड़ी जान-माल की क्षति नहीं हुई। वहीं, इराक में ईरानी हमलों में दो लोगों की मौत हुई।

4. इजराइल पर भारी पड़ाव

ईरान ने इजराइल पर भी बैलिस्टिक मिसाइलों की बौछार कर दी। तेल अवीव और हाइफा में सायरन बजते रहे और हवाई हमलों के डर से एयरस्पेस बंद कर दिया गया। इजराइल के पास मौजूद एयर डिफेंस सिस्टम ने अधिकांश मिसाइलों को रोक लिया, लेकिन फिर भी तेल अवीव में एक महिला की मौत हुई और 121 लोग घायल हुए। उत्तरी इजराइल में एक 9 मंजिला इमारत को भी नुकसान पहुंचा।

5. युद्ध का कारण: परमाणु विवाद

इस भीषण युद्ध का मुख्य कारण ईरान का परमाणु कार्यक्रम है। अमेरिका और इजराइल का आरोप है कि ईरान परमाणु हथियार बना रहा है। 6 से 27 फरवरी तक जिनेवा में हुई वार्ता के बावजूद, जब ईरान समझौते के लिए तैयार दिखा, तब भी अमेरिका और इजराइल ने हमला शुरू कर दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ कर दिया है कि हमले तब तक जारी रहेंगे जब तक परमाणु खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हो जाता।

6. किसका साथ किसने दिया?

इस युद्ध में किसी भी देश ने सार्वजनिक रूप से सैन्य समर्थन नहीं दिया। यह अमेरिका और इजराइल का संयुक्त अभियान है। हालांकि, सऊदी अरब, कतर, UAE जैसे देश अमेरिकी ठिकानों की मेजबानी करते हैं, लेकिन उन्होंने ईरानी हमलों की निंदा करते हुए अपने हवाई क्षेत्र को बंद कर दिया और अमेरिका-इजराइल के हमलों का खुलकर समर्थन नहीं किया।

7. खामेनेई के बाद ईरान में सत्ता

खामेनेई की मौत के बाद ईरान के संविधान के अनुच्छेद 111 के अनुसार, असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स नए सुप्रीम लीडर का चुनाव करेगी। जब तक नया नेता चुना नहीं जाता, एक अंतरिम परिषद शासन संभालेगी, जिसमें राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान शामिल होंगे। अमेरिका और इजराइल की नजर ईरान में शासन परिवर्तन पर टिकी है।

8. सोने के दामों में उछाल

युद्ध का सीधा असर वैश्विक बाजार पर पड़ा है। विशेषज्ञों का मानना है कि सोने के दाम में तेज उछाल आएगा। केडिया एडवाइजरी के निदेशक अजय केडिया के मुताबिक, मार्च तक सोना 15% तक बढ़कर 1.85 लाख रुपये तक पहुंच सकता है। निवेशक इस अनिश्चित दौर में सुरक्षित विकल्प के तौर पर सोने की ओर भाग रहे हैं। Iran-Israel War

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खामेनेई की मौत के बाद पाकिस्तान में भड़की हिंसा, 8 की मौत

डेली पाकिस्तान मीडिया की रिपोर्ट का दावा है कि पुलिस की जवाबी कार्रवाई में 8 लोगों की मौत हो गई, जबकि 30 से ज्यादा लोग जख्मी हो गए। घायलों को एंबुलेंस के जरिए सिविल अस्पताल पहुंचाया गया है।

Protesters outside the US Embassy in Karachi
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे तोड़फोड़ के वीडियो (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar02 Mar 2026 08:36 AM
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Attack on US Embassy in Pakistan: ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई की मौत की खबर के बाद पाकिस्तान में हालात बेकाबू हो गए हैं। कराची में गुस्साई भीड़ ने अमेरिकी दूतावास पर हमला कर दिया और वहां आग लगा दी। पुलिस द्वारा भीड़ को नियंत्रित करने के दौरान हुई कार्रवाई में 8 प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई और 30 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।

अमेरिकी दूतावास पर हमला और आगजनी

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान के सुप्रीम लीडर की मौत के विरोध में कराची में लोगों का एक बड़ा समूह सड़कों पर उतर आया। प्रदर्शनकारियों ने पहले जमकर नारेबाजी की और फिर अमेरिकी दूतावास की तरफ बढ़ गए। भीड़ ने दूतावास पर हमला करते हुए जमकर तोड़फोड़ की और वहां आग लगा दी। सूचना पर पहुंची पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले दागे, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने पत्थरबाजी करते हुए पुलिस का मुकाबला किया।

पुलिस कार्रवाई में 8 की मौत

डेली पाकिस्तान मीडिया की रिपोर्ट का दावा है कि पुलिस की जवाबी कार्रवाई में 8 लोगों की मौत हो गई, जबकि 30 से ज्यादा लोग जख्मी हो गए। घायलों को एंबुलेंस के जरिए सिविल अस्पताल पहुंचाया गया है। हालांकि, प्रशासन ने अभी तक मौतों की संख्या की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए कराची में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है और दूतावास के आसपास भारी पुलिस बल तैनात है।

अन्य शहरों में भी तनाव

कराची के अलावा पाकिस्तान के अन्य शहरों में भी शिया समुदाय के लोग सड़कों पर निकल आए हैं। लाहौर, पेशावर और रावलपिंडी में भी प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। प्रशासन अन्य शहरों में भी हिंसा भड़कने की आशंका से चौकस है और सड़कों पर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। सिंध के गृह मंत्री जियाउल हसन लांजर ने कराची के अतिरिक्त पुलिस महानिरीक्षक से घटना की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

खामेनेई की मौत का सच

इस पूरे हंगामे की वजह ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई की दर्दनाक मौत है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शनिवार को अमेरिका और इजराइल ने तेहरान पर संयुक्त हमला बोला, जिसमें खामेनेई के घर और ऑफिस को निशाना बनाया गया। इस हमले में खामेनेई के साथ ही उनकी बेटी, दामाद और परिवार के कई सदस्यों की मौत हो गई। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने इसकी पुष्टि की थी, जिसके बाद ईरान ने भी रविवार को खामेनेई की मौत को स्वीकार कर लिया। इस खबर ने पूरे देश में अमेरिका के खिलाफ गुस्सा भड़का दिया है। Attack on US Embassy in Pakistan

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