पाकिस्तान फिर तानाशाही की राह पर? मुनीर के हाथों में सत्ता सौंपने की तैयारी, बिलावल को बनाया जाएगा पीएम
Islamabad News
भारत
चेतना मंच
01 Dec 2025 03:17 AM
Islamabad News : पाकिस्तान एक बार फिर संवैधानिक लोकतंत्र से तानाशाही की ओर बढ़ता दिख रहा है। सूत्रों के हवाले से खबर है कि राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी जल्द ही पद से हट सकते हैं और उनकी जगह देश की कमान प्रत्यक्ष रूप से सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर के हाथों में सौंपने की योजना पर काम हो रहा है। इसके साथ ही देश में मौजूदा संसदीय प्रणाली को समाप्त कर राष्ट्रपति प्रणाली लागू करने की चर्चा भी तेज हो गई है। राजनीतिक हलकों में इसे एक 'सॉफ्ट तख्तापलट' करार दिया जा रहा है, जिसकी पटकथा सैन्य प्रतिष्ठान की गुप्त मंजूरी से तैयार की गई है।
मुनीर को मिल चुका है आजीवन सैन्य संरक्षण
हाल ही में फील्ड मार्शल बनाए गए असीम मुनीर को आजीवन सैन्य विशेषाधिकार और कानूनी सुरक्षा प्रदान की जा चुकी है। उनकी विदेश यात्राएं अमेरिका, चीन और सऊदी अरब यह संकेत दे चुकी हैं कि वे अब न केवल सैन्य नेतृत्व, बल्कि पाकिस्तान की पूरी शासन प्रणाली पर नियंत्रण की ओर बढ़ रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि अब सिर्फ "औपचारिक मुहर" की देर है।
शरीफ बाहर, बिलावल अंदर : सत्ता संतुलन की नई कहानी
राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। संभावना है कि नवाज और शहबाज शरीफ को किनारे किया जाएगा, जबकि बिलावल भुट्टो को सत्ता का 'लोकतांत्रिक चेहरा' बनाया जाएगा। बताया जा रहा है कि इसी फार्मूले के तहत जरदारी, अपने बेटे बिलावल की कीमत पर मुनीर को राष्ट्रपति पद सौंपने के लिए राजी हो गए हैं। हालांकि, पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (पीपीपी) के भीतर इस फैसले को लेकर असंतोष है। वहीं, पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) में भी हलचल मची है और शरीफ परिवार अब सेना के अन्य गुटों से संपर्क साधने की कोशिश कर रहा है।
जनरल जिया की याद दिलाता घटनाक्रम
पूरा घटनाक्रम इस मायने में प्रतीकात्मक है कि यह जनरल जिया-उल-हक के 1977 में हुए तख्तापलट की बरसी के आसपास सामने आ रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह एक बार फिर पाकिस्तान में छलावरण के नीचे छिपी सैन्य तानाशाही की वापसी का संकेत हो सकता है। गौरतलब है कि पाकिस्तान का इतिहास रहा है कि अयूब खान, जिया-उल-हक और परवेज मुशर्रफ जैसे सैन्य जनरलों ने सत्ता पर कब्जा कर राष्ट्रपति की कुर्सी संभाली थी। मौजूदा हालात भी वैसी ही स्क्रिप्ट दोहराते दिख रहे हैं। हालांकि इस बार एक अहम सवाल यह है कि इस घटनाक्रम पर पाकिस्तान की जनता का रुख क्या होगा? इमरान खान जैसे बड़े नेता अभी भी जेल में हैं और विपक्ष का स्वर दबा हुआ है। लेकिन यह स्पष्ट है कि पाकिस्तान एक बार फिर एक "नियंत्रित लोकतंत्र" की ओर बढ़ रहा है। जहां बागडोर जनप्रतिनिधियों के नहीं, बल्कि वदीर्धारी जनरलों के हाथ में होगी।