पाकिस्तान दिवालिया होने की कगार पर, 6.50 लाख करोड़ का कर्ज बना ज्वालामुखी!
Islamabad :
भारत
चेतना मंच
02 Dec 2025 03:05 AM
Islamabad : आर्थिक कुप्रबंधन, अस्थायी बेलआउट और कूटनीतिक उधार पर टिका पाकिस्तान अब उस मोड़ पर आ खड़ा हुआ है, जहां से लौट पाना लगभग असंभव दिख रहा है। वर्ष 2025-26 के वित्तीय वर्ष में पाकिस्तान को 6.50 लाख करोड़ रुपये (करीब 23 अरब डॉलर) का विदेशी कर्ज चुकाना है। अगर वह इस राशि की अदायगी नहीं कर पाया, तो दक्षिण एशिया का यह परमाणु शक्ति संपन्न देश आधिकारिक रूप से दिवालिया घोषित हो सकता है।
पाकिस्तान का कर्ज लगातार बढ़ रहा
पाकिस्तान के वित्त मंत्रालय द्वारा जारी आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 के मुताबिक, मार्च 2025 तक देश पर कुल सार्वजनिक कर्ज 76.01 ट्रिलियन पाकिस्तानी रुपये तक पहुंच गया है। इसमें 51.52 ट्रिलियन रुपये (लगभग 180 अरब डॉलर) का घरेलू कर्ज और 24.49 ट्रिलियन रुपये (करीब 87.4 अरब डॉलर) का विदेशी ऋण शामिल है।
कर्ज चुकाने के लिए उधारी पर निर्भरता
इस्लामाबाद को मौजूदा वित्त वर्ष में जिन 23 अरब डॉलर की जरूरत है। उसमें से 12 अरब डॉलर तथाकथित मित्र देशों सऊदी अरब (5 अरब), चीन (4 अरब), यूएई (2 अरब) और कतर (1 अरब) से टेम्पररी डिपॉजिट के रूप में मिलेंगे। ये रकम स्थायी नहीं है और केवल तभी सहायक है जब ये रोलओवर यानी आगे बढ़ाई जाएं। अगर इनमें से कोई भी देश अपनी जमा राशि समय से पहले वापस मांग लेता है, तो पाकिस्तान के पास भुगतान का कोई विकल्प नहीं बचेगा।
कूटनीति की डोर पर लटकी आर्थिक सांसें
द न्यूज की रिपोर्ट में साफ चेतावनी दी गई है कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था अब केवल आर्थिक नहीं, बल्कि पूरी तरह से कूटनीतिक सद्भावना पर निर्भर है। जो दिन-ब-दिन कमजोर होती जा रही है। अगर मित्र देश अपना समर्थन वापस लेते हैं, तो पाकिस्तान के पास ऋण भुगतान की कोई मजबूत योजना नहीं है।
11 अरब डॉलर का दबाव अभी बाकी
मान लें कि पाकिस्तान को सभी अस्थायी डिपॉजिट रोलओवर मिल भी जाएं, तो भी उसे इस वर्ष करीब 11 अरब डॉलर की सीधी देनदारी चुकानी होगी। इनमें शामिल हैं:
$1.7 अरब डॉलर इंटरनेशनल बॉन्ड भुगतान
$2.3 अरब डॉलर कॉमर्शियल लोन
$2.8 अरब डॉलर वर्ल्ड बैंक, एशियाई विकास बैंक, इस्लामिक डेवलपमेंट बैंक को
$1.8 अरब डॉलर बाइलेटरल यानी द्विपक्षीय ऋण
जबकि विदेशी मुद्रा भंडार पहले से ही दबाव में है और कोई नया बड़ा आय स्रोत फिलहाल नजर नहीं आ रहा है।
बजट का आधा हिस्सा सिर्फ कर्ज चुकाने में खर्च
पाकिस्तान ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 17.573 ट्रिलियन रुपये का संघीय बजट पेश किया है, जिसमें से 8.2 ट्रिलियन रुपये सिर्फ कर्ज चुकाने के लिए निर्धारित हैं। यानी कुल बजट का करीब 47% हिस्सा। ये आंकड़े बताते हैं कि इस्लामाबाद के पास विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा के लिए बहुत कम संसाधन शेष हैं। सरकारी खर्चों में ब्याज भुगतान अब शीर्ष स्थान पर है।
दुर्दशा में भी नहीं थम रहा रक्षा खर्च
आश्चर्यजनक बात यह है कि इस जबरदस्त वित्तीय दबाव के बावजूद पाकिस्तान का रक्षा बजट जस का तस बना हुआ है। रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान ने हाल ही में तुर्की के साथ लगभग 900 मिलियन डॉलर की ड्रोन डील को अंतिम रूप दिया है, जिसमें 700 से ज्यादा लोइटरिंग हथियार भी शामिल हैं। वहीं, चीन से 40 जे-35ए स्टील्थ फाइटर जेट्स की खरीद की योजना भी सामने आई है।
इन सौदों को लेकर पाकिस्तानी सैन्य सूत्रों का कहना है कि ये कदम भारत के खिलाफ रणनीतिक संतुलन बनाए रखने के लिए उठाए गए हैं, लेकिन आर्थिक हालात के आलोक में यह रणनीति ज्यादा खतरनाक और आत्मघाती प्रतीत होती है। कर्ज में आकंठ डूबा पाकिस्तान अब एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहां से या तो संरचनात्मक सुधारों की राह पकड़ी जा सकती है, या फिर पूरी अर्थव्यवस्था को ध्वस्त होते हुए देखा जा सकता है। फिलहाल, आईएमएफ की अगली किश्त, मित्र देशों की कृपा और सैन्य बजट में कटौती ही इसके भविष्य की दिशा तय करेंगी।