पाकिस्तान में अभिनंदन को पकड़ने वाला पाक अधिकारी आतंकियों का शिकार बना
भारत
चेतना मंच
30 Nov 2025 12:07 PM
Islamabad : पाकिस्तान सेना के लिए एक बड़ा झटका सामने आया है। देश के स्पेशल सर्विस ग्रुप (एसएसजी) से जुड़े मेजर मुईज को दक्षिणी वजीरिस्तान में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के आतंकवादियों ने घात लगाकर मार डाला। गौरतलब है कि मेजर मुईज वही अफसर हैं, जिन्होंने 2019 में भारतीय वायुसेना के विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान को पकड़ने का दावा किया था। सूत्रों के अनुसार, मेजर मुईज सरगोगा इलाके में 6 कमांडो बटालियन के साथ तैनात थे। खुफिया सूचना के आधार पर वह लांस नायक जिब्रानउल्लाह के साथ आॅपरेशन पर निकले थे। इसी दौरान आतंकियों ने उन्हें निशाना बनाकर हत्या कर दी। इस हमले में दोनों अफसरों की जान चली गई।
मेजर मुईज : एक चर्चित और विवादित नाम
2019 में बालाकोट एयरस्ट्राइक के बाद जब भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर था, उसी दौरान मुईज चर्चा में आए थे। पाकिस्तानी मीडिया में उन्होंने यह दावा किया था कि विंग कमांडर अभिनंदन को उनकी टीम ने जिंदा पकड़ा था। वह मूल रूप से पंजाब प्रांत के चकवाल जिले से ताल्लुक रखते थे और सेना में एक तेजतर्रार अफसर माने जाते थे।
आतंकियों ने क्यों बनाया निशाना?
पाकिस्तान सेना का कहना है कि दक्षिणी वजीरिस्तान में हाल ही में एक बड़ा आॅपरेशन चलाकर 11 आतंकियों को मारा गया था। इसी का बदला लेने के लिए आतंकियों ने यह हमला किया। लेकिन जिस तरह से सेना के विशेष बल के अधिकारियों को घेरकर मारा गया, उसने पाकिस्तान की सुरक्षा रणनीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने मेजर मुईज और जिब्रानउल्लाह की मौत पर गहरा दुख व्यक्त किया है। पाकिस्तान मीडिया के अनुसार, मुईज अपने पीछे पत्नी और दो बच्चों को छोड़ गए हैं।
सुरक्षा बलों पर भारी पड़ता आतंकवाद
साउथ एशिया टेररिज्म पोर्टल की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले दो वर्षों में पाकिस्तान के 1200 से ज्यादा सैन्यकर्मी आतंकी हमलों में मारे जा चुके हैं। वर्ष 2024 में 754 सैन्यकर्मी मारे गए थे, जबकि 2025 में अब तक यह आंकड़ा 500 के करीब पहुंच चुका है। आतंकियों ने अब सीधे सेना के उच्च अधिकारियों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है, जो पाकिस्तान के लिए खतरे की घंटी है। यह घटना पाकिस्तान के भीतर आतंकी संगठनों के बढ़ते दुस्साहस को उजागर करती है और इस सवाल को फिर से जीवित करती है कि क्या पाकिस्तान अपनी ही बनाई रणनीतियों का शिकार हो रहा है?