दमिश्क पर इजराइल का बड़ा हमला : रक्षा मंत्रालय और सेना मुख्यालय ध्वस्त, युद्ध की आहट?
Israel Syria Conflict
भारत
चेतना मंच
16 Jul 2025 05:56 PM
Israel Syria Conflict : पश्चिम एशिया एक बार फिर तनाव के विस्फोटक मोड़ पर खड़ा है। इजराइल ने सीरिया की राजधानी दमिश्क में स्थित रक्षा मंत्रालय और सेना मुख्यालय को निशाना बनाकर बड़ा हमला किया है। यह हमला ड्रोन और विस्फोटक बमों के जरिए किया गया, जिसके बाद दमिश्क के आकाश में धुएं का घना गुबार छा गया। इजराइल ने इस हमले की पुष्टि करते हुए इसे ड्रूज समुदाय पर हमले का प्रतिशोध बताया है।
सीधे राजधानी पर हमला: अब क्या जंग निकट है?
इजराइली रक्षा बल (IDF) के अनुसार, यह हमला "संकेतात्मक" रूप में दो ड्रोन से शुरू किया गया। हालांकि स्थानीय मीडिया और सीरियाई सेना के सूत्रों का दावा है कि हमला बेहद सटीक और रणनीतिक महत्व की इमारतों पर केंद्रित था। जिनमें उमय्यद स्क्वायर के पास स्थित रक्षा मंत्रालय और मिलिट्री हेडक्वार्टर शामिल हैं। इस हमले से सीरिया-इजराइल संबंधों में अचानक तेजी से तनाव बढ़ गया है और क्षेत्रीय संघर्ष की नई आशंका पैदा हो गई है।
समझौते के 24 घंटे बाद हमला, क्या बदल गया इरादा?
महज एक दिन पहले यानी 15 जुलाई को, दोनों देशों के बीच ड्रूज समुदाय से जुड़े मुद्दों पर एक अस्थायी समझौता हुआ था। लेकिन 24 घंटे के भीतर ही इजराइल द्वारा किया गया यह हमला संकेत देता है कि या तो यह पूर्व-नियोजित सैन्य प्रतिक्रिया थी या फिर राजनयिक वार्ता विफल हो चुकी थी। सीरियाई सेना के अनुसार, ड्रोन अटैक दमिश्क के सबसे संवेदनशील और केंद्रीय क्षेत्रों में किया गया, जो सीधा सैन्य और राजनीतिक संदेश देता है।
जब हमला हुआ, नेतन्याहू कोर्ट में थे
इजराइली मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, जब यह हमला किया गया, उस वक्त प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू तेल अवीव की एक अदालत में कतरगेट भ्रष्टाचार मामले में गवाही देने पहुंचे थे। जैसे ही दमिश्क पर हमले की खबर कोर्ट तक पहुंची, सुनवाई स्थगित कर दी गई और नेतन्याहू तुरंत वार रूम बैठक के लिए रवाना हो गए।
सीरिया पर हमला : क्या यह बड़ा भू-राजनीतिक मोड़ है?
विश्लेषकों का मानना है कि यह हमला सिर्फ सीरिया और इजराइल के रिश्तों को ही नहीं, बल्कि अमेरिका, सऊदी अरब, तुर्की और ईरान जैसे देशों की क्षेत्रीय भूमिका को भी प्रभावित कर सकता है। खासतौर पर इसलिए क्योंकि सीरिया के नए राष्ट्रपति अल-शरा को सऊदी अरब और तुर्की का करीबी माना जाता है। अमेरिका हाल ही में अल-शरा सरकार के साथ सीधे संवाद में रुचि दिखा चुका है। अमेरिका ने दोनों देशों से सीजफायर की अपील भी की थी। लेकिन अब, जब इजराइल ने सीधी सैन्य कार्रवाई कर दी है, तो सवाल उठ रहा है कि क्या वॉशिंगटन की भूमिका कमजोर हो रही है? और क्या सीरिया अब जवाबी कार्रवाई करेगा?
इजराइल पहले से कई मोर्चों पर युद्ध में उलझा है
गौरतलब है कि इजराइल पिछले दो वर्षों में ईरान, यमन, लेबनान और गाजा जैसे क्षेत्रों में सैन्य अभियान चला चुका है। अगर सीरिया ने अब कोई जवाबी कार्रवाई की, तो यह इजराइल को एक और लंबे और जटिल युद्ध में धकेल सकता है। दमिश्क पर यह हमला केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि एक भूराजनैतिक चुनौती है। इजराइल ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपनी सुरक्षा चिंताओं पर समझौता नहीं करेगा, चाहे इसके लिए उसे किसी भी देश की राजधानी में हमला क्यों न करना पड़े। अब निगाहें सीरिया की प्रतिक्रिया और अमेरिका की रणनीतिक चाल पर है।