चीन के लिए निकला रूस के 7 तेल टैंकर यू टर्न लेकर भारत पहुंचे

हाल ही में आई रिपोर्ट्स के मुताबिक, रूस का कच्चा तेल लेकर जा रहे कई टैंकर, जो पहले चीन की ओर जा रहे थे, उन्होंने बीच समुद्र में ही अपना रास्ता बदलकर भारत की तरफ रुख कर लिया। डेटा के अनुसार कम से कम 7 रूसी तेल टैंकर चीन जाने के बजाय भारत की ओर मोड़ दिए गए।

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रूसी तेल टैंकर
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar18 Mar 2026 07:40 PM
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Global Situation : हाल ही में आई रिपोर्ट्स के मुताबिक, रूस का कच्चा तेल लेकर जा रहे कई टैंकर, जो पहले चीन की ओर जा रहे थे, उन्होंने बीच समुद्र में ही अपना रास्ता बदलकर भारत की तरफ रुख कर लिया। डेटा के अनुसार कम से कम 7 रूसी तेल टैंकर चीन जाने के बजाय भारत की ओर मोड़ दिए गए। इनमें एक्वा टाइटन जैसे टैंकर शामिल हैं, जिसने साउथ चाइना सी में ही यू-टर्न लेकर भारत के बंदरगाह की दिशा पकड़ ली।

क्यों बदला गया रूट?

भारत की बढ़ती मांग और अमेरिका की ढील की वजह से भारत ने रूसी तेल की खरीद अचानक बढ़ा दी है। एक हफ्ते में करीब 30 मिलियन बैरल तेल खरीदा गया। अमेरिका की ओर से कुछ शर्तों में ढील मिलने के बाद आयात बढ़ा है। इस वजह से रूस ने अपने तेल की सप्लाई चीन से हटाकर भारत की ओर शिफ्ट करना शुरू किया है। 

मिडिल ईस्ट तनाव का असर

मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और सप्लाई में बाधा के कारण भारत को वैकल्पिक स्रोत की जरूरत पड़ी। इसी कारण भारत ने सस्ते रूसी तेल की खरीद तेज कर दी। हालांकि, भारतीय सरकार के एक अधिकारी ने कहा है कि भारत के पास अभी तक सभी टैंकरों के डायवर्जन की पुख्ता जानकारी नहीं है। यानी खबरें पूरी तरह कन्फर्म नहीं हैं, लेकिन बाजार संकेत दे रहे हैं कि बदलाव हो रहा है।

भारत को क्या होगा फायदा?

सस्ता तेल, मजबूत ऊर्जा सुरक्षा तथा कम कीमत पर कच्चा तेल मिलने का फायदा होगा। रिफाइनरियों को स्थिर सप्लाई और ऊर्जा संकट से राहत मिलेगी। विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे भारत की एनर्जी सिक्योरिटी और मजबूत होगी। विश्लेषकों के अनुसार मांग बढ़ने से कीमतें बढ़ सकती हैं। चीन और भारत के बीच प्रतिस्पर्धा तेज होगी तथा वैश्विक सप्लाई चेन में बदलाव दिखेगा।


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शिपिंग कंपनियों ने निर्यातकों पर लगाया वार टैक्स, कंटेनर पर 2.82 लाख रुपये तक अतिरिक्त शुल्क

बढ़ते संघर्ष के बीच, भारतीय निर्यातकों को शिपिंग कंपनियों द्वारा इमरजेंसी कॉन्फ्लिक्ट सरचार्ज (वार टैक्स) देना पड़ रहा है। यह शुल्क एक 40 फुट के कंटेनर पर लगभग $3,000 या 2.82 लाख तक है। विशेषज्ञों के अनुसार, बड़े मालवाहक जहाजों में औसतन 3,500 कंटेनर लदे होते हैं।

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मालवाहक जहाज
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar08 Mar 2026 05:06 PM
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Iran War : पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के बीच, भारतीय निर्यातकों को शिपिंग कंपनियों द्वारा इमरजेंसी कॉन्फ्लिक्ट सरचार्ज (वार टैक्स) देना पड़ रहा है। यह शुल्क एक 40 फुट के कंटेनर पर लगभग $3,000 या 2.82 लाख तक है। विशेषज्ञों के अनुसार, बड़े मालवाहक जहाजों में औसतन 3,500 कंटेनर लदे होते हैं। ऐसे में, केवल एक जहाज से ही शिपिंग कंपनियों को करीब 90 करोड़ का अतिरिक्त लाभ हो रहा है। छोटे जहाजों में लगभग 300 कंटेनर होते हैं, जिससे निर्यातकों पर लगभग 80 करोड़ का अतिरिक्त दबाव बनता है।

अतिरिक्त शुल्क क्यों लगाया गया?

कंपनियों के अनुसार यह कदम समुद्री सुरक्षा जोखिम और परिचालन लागत में वृद्धि के कारण उठाया गया है। विशेष रूप से, तनावग्रस्त क्षेत्रों के पास के समुद्री मार्ग, जैसे कि स्ट्रेट आॅफ होर्मुज और बाब-अल-मनदेव स्ट्रेट, जोखिम बढ़ा रहे हैं। ईरान से जुड़े हालात के कारण जहाज, चालक दल और माल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहा है।

प्रभावित क्षेत्र

यह अतिरिक्त शुल्क उन कंटेनरों पर लागू है जो निम्नलिखित देशों को जा रहे हैं जिनमें बहरीन, जिबूती, मिस्र, इरिट्रिया, इराक, जॉर्डन, सऊदी अरब, कुवैत, ओमान, कतर, सूडान, संयुक्त अरब अमीरात और यमन हैं। अधिकांश निर्यातक प्रति कंटेनर $2,500-$3,000 का मुनाफा कमाते हैं। वार टैक्स इसी मुनाफे के बराबर होने के कारण निर्यातकों की लाभप्रदता पर गंभीर असर डाल रहा है। छोटे और मध्यम व्यवसायों के लिए यह अतिरिक्त खर्च वित्तीय चुनौती बन सकता है। पश्चिम एशिया में तनाव और सुरक्षा खतरों के कारण शिपिंग कंपनियों ने करोड़ों रुपये का अतिरिक्त शुल्क लगाया है। यह कदम विशेष रूप से उत्तर प्रदेश जैसे निर्यातक केंद्रों के व्यापारियों के लिए आर्थिक चुनौती साबित हो रहा है। Iran War


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ईरान-यूएस संघर्ष की नई चुनौती, हो सकता है खाड़ी देशों में पानी का संकट

ईरान ने खाड़ी देशों में पानी की सप्लाई को निशाना बनाया है। तेल और गैस बुनियादी ढांचे पर हमलों के बाद अब डीसेलिनेशन प्लांट और पानी-उपलब्धता से जुड़े सिस्टम भी खतरे में हैं। बहरीन में एक डीसेलिनेशन प्लांट पर ड्रोन हमला हुआ।

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पानी संकट की संभावना
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar08 Mar 2026 02:48 PM
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Iran-US-Conflict : हाल ही में रिपोर्ट मिली है कि ईरान ने खाड़ी देशों में पानी की सप्लाई को निशाना बनाया है। तेल और गैस बुनियादी ढांचे पर हमलों के बाद अब डीसेलिनेशन प्लांट और पानी-उपलब्धता से जुड़े सिस्टम भी खतरे में हैं। बहरीन में एक डीसेलिनेशन प्लांट पर ड्रोन हमला हुआ। यूएई और कुवैत में भी पानी और बिजली संयंत्रों को निशाना बनाने की कोशिशें हुईं। इस कदम से खाड़ी देशों के लिए पानी संकट की संभावना बढ़ गई है।

पानी की अहमियत

खाड़ी देश जैसे सऊदी अरब, यूएई, कुवैत और कतर प्राकृतिक रूप से मीठा पानी नहीं रखते। इन देशों का अधिकांश पीने का पानी समुद्र के पानी को शुद्ध करके आता है। कुवैत लगभग 90% पानी शुद्धिकरण से एवं सऊदी अरब लगभग 70% और ओमान लगभग 86% समुद्री पानी को शुद्ध करके पीने लायक पानी बनाता है। अगर डीसेलिनेशन प्लांट बंद हो जाएं, तो कुछ शहरों में पानी सिर्फ कुछ दिनों तक ही उपलब्ध रहेगा।

पानी का रणनीतिक महत्व

युद्ध में महत्वपूर्ण ढाँचों को निशाना बनाना आम रणनीति है। इसमें तेल, गैस, बिजली और अब पानी के संयंत्र शामिल हैं। यूएई में पावर स्टेशन पर हमला हुआ, जो बड़े डीसेलिनेशन प्लांट को ऊर्जा देता है। कुवैत में ड्रोन हमले से पानी और बिजली संयंत्रों में आग लगी। इसी तरह डीसेलिनेशन प्लांट को नुकसान पहुंचाया जाता रहा तो शहरों में पीने का पानी कम हो जाएगा। अस्पताल, उद्योग और रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होगी। लोगों को पलायन करना पड़ सकता है। बड़े पैमाने पर मानवीय संकट पैदा होने की संभावना है।

वर्तमान स्थिति

28 फरवरी 2026 से शुरू हुए युद्ध में अब पानी की सप्लाई भी खतरे में है। कई खाड़ी देशों ने चेतावनी दी है कि वे हमलों का जवाब दे सकते हैं। खाड़ी देशों की सबसे बड़ी कमजोरी तेल नहीं, बल्कि पानी की उपलब्धता है। अगर डीसेलिनेशन प्लांट पर बड़े हमले हुए, तो वहां कुछ ही दिनों में पानी की कमी हो सकती है। यह क्षेत्रीय और वैश्विक दोनों स्तर पर गंभीर संकट खड़ा कर सकता है। Iran-US-Conflict


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