चीन के लिए निकला रूस के 7 तेल टैंकर यू टर्न लेकर भारत पहुंचे
हाल ही में आई रिपोर्ट्स के मुताबिक, रूस का कच्चा तेल लेकर जा रहे कई टैंकर, जो पहले चीन की ओर जा रहे थे, उन्होंने बीच समुद्र में ही अपना रास्ता बदलकर भारत की तरफ रुख कर लिया। डेटा के अनुसार कम से कम 7 रूसी तेल टैंकर चीन जाने के बजाय भारत की ओर मोड़ दिए गए।

Global Situation : हाल ही में आई रिपोर्ट्स के मुताबिक, रूस का कच्चा तेल लेकर जा रहे कई टैंकर, जो पहले चीन की ओर जा रहे थे, उन्होंने बीच समुद्र में ही अपना रास्ता बदलकर भारत की तरफ रुख कर लिया। डेटा के अनुसार कम से कम 7 रूसी तेल टैंकर चीन जाने के बजाय भारत की ओर मोड़ दिए गए। इनमें एक्वा टाइटन जैसे टैंकर शामिल हैं, जिसने साउथ चाइना सी में ही यू-टर्न लेकर भारत के बंदरगाह की दिशा पकड़ ली।
क्यों बदला गया रूट?
भारत की बढ़ती मांग और अमेरिका की ढील की वजह से भारत ने रूसी तेल की खरीद अचानक बढ़ा दी है। एक हफ्ते में करीब 30 मिलियन बैरल तेल खरीदा गया। अमेरिका की ओर से कुछ शर्तों में ढील मिलने के बाद आयात बढ़ा है। इस वजह से रूस ने अपने तेल की सप्लाई चीन से हटाकर भारत की ओर शिफ्ट करना शुरू किया है।
मिडिल ईस्ट तनाव का असर
मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और सप्लाई में बाधा के कारण भारत को वैकल्पिक स्रोत की जरूरत पड़ी। इसी कारण भारत ने सस्ते रूसी तेल की खरीद तेज कर दी। हालांकि, भारतीय सरकार के एक अधिकारी ने कहा है कि भारत के पास अभी तक सभी टैंकरों के डायवर्जन की पुख्ता जानकारी नहीं है। यानी खबरें पूरी तरह कन्फर्म नहीं हैं, लेकिन बाजार संकेत दे रहे हैं कि बदलाव हो रहा है।
भारत को क्या होगा फायदा?
सस्ता तेल, मजबूत ऊर्जा सुरक्षा तथा कम कीमत पर कच्चा तेल मिलने का फायदा होगा। रिफाइनरियों को स्थिर सप्लाई और ऊर्जा संकट से राहत मिलेगी। विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे भारत की एनर्जी सिक्योरिटी और मजबूत होगी। विश्लेषकों के अनुसार मांग बढ़ने से कीमतें बढ़ सकती हैं। चीन और भारत के बीच प्रतिस्पर्धा तेज होगी तथा वैश्विक सप्लाई चेन में बदलाव दिखेगा।
Global Situation : हाल ही में आई रिपोर्ट्स के मुताबिक, रूस का कच्चा तेल लेकर जा रहे कई टैंकर, जो पहले चीन की ओर जा रहे थे, उन्होंने बीच समुद्र में ही अपना रास्ता बदलकर भारत की तरफ रुख कर लिया। डेटा के अनुसार कम से कम 7 रूसी तेल टैंकर चीन जाने के बजाय भारत की ओर मोड़ दिए गए। इनमें एक्वा टाइटन जैसे टैंकर शामिल हैं, जिसने साउथ चाइना सी में ही यू-टर्न लेकर भारत के बंदरगाह की दिशा पकड़ ली।
क्यों बदला गया रूट?
भारत की बढ़ती मांग और अमेरिका की ढील की वजह से भारत ने रूसी तेल की खरीद अचानक बढ़ा दी है। एक हफ्ते में करीब 30 मिलियन बैरल तेल खरीदा गया। अमेरिका की ओर से कुछ शर्तों में ढील मिलने के बाद आयात बढ़ा है। इस वजह से रूस ने अपने तेल की सप्लाई चीन से हटाकर भारत की ओर शिफ्ट करना शुरू किया है।
मिडिल ईस्ट तनाव का असर
मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और सप्लाई में बाधा के कारण भारत को वैकल्पिक स्रोत की जरूरत पड़ी। इसी कारण भारत ने सस्ते रूसी तेल की खरीद तेज कर दी। हालांकि, भारतीय सरकार के एक अधिकारी ने कहा है कि भारत के पास अभी तक सभी टैंकरों के डायवर्जन की पुख्ता जानकारी नहीं है। यानी खबरें पूरी तरह कन्फर्म नहीं हैं, लेकिन बाजार संकेत दे रहे हैं कि बदलाव हो रहा है।
भारत को क्या होगा फायदा?
सस्ता तेल, मजबूत ऊर्जा सुरक्षा तथा कम कीमत पर कच्चा तेल मिलने का फायदा होगा। रिफाइनरियों को स्थिर सप्लाई और ऊर्जा संकट से राहत मिलेगी। विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे भारत की एनर्जी सिक्योरिटी और मजबूत होगी। विश्लेषकों के अनुसार मांग बढ़ने से कीमतें बढ़ सकती हैं। चीन और भारत के बीच प्रतिस्पर्धा तेज होगी तथा वैश्विक सप्लाई चेन में बदलाव दिखेगा।












