तालिबान का जल फरमान : पाकिस्तान और ईरान के लिए चिंता का सबब
भारत
RP Raghuvanshi
18 Aug 2025 01:20 PM
अफगानिस्तान की तालिबानी सरकार ने बड़े पैमाने पर जल संसाधनों पर नियंत्रण की योजना शुरू कर दी है। इसके तहत ईरान, पाकिस्तान और मध्य एशिया की नदियों के प्रवाह को प्रभावित करने वाले बांध और नहरों का निर्माण किया जा रहा है। यह फैसला पड़ोसी देशों में तनाव और चिंता बढ़ा रहा है। इस जल संसाधनों पर नियंत्रण की योजना का भारत पर क्या असर होगा हम इसके बारे में भी जानते हैं। Kabul News :
तालिबान की योजना
उत्तरी अफगानिस्तान में कोश तेपा नहर जैसी परियोजनाएं चल रही हैं। यह नहर 560,000 हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई के लिए डिजाइन की गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस नहर से अमू दरिया का प्रवाह 21% तक बदल सकता है। इससे पड़ोसी देशों ईरान और पाकिस्तान की चिंता स्वाभाविक है। ईरान और पाकिस्तान ने पहले ही चिंता जताई है। मध्य एशिया में कजाकिस्तान समर्थित उज्बेकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान भी सतर्क हैं। इसका कारण है कि यह परियोजना अरब सागर की जल मात्रा और क्षेत्रीय जल-बंटवारे की व्यवस्था को प्रभावित कर सकती है।
विशेषज्ञों की चेतावनी
जल प्रशासन विशेषज्ञ मोहम्मद फैजी ने कहा कि अभी चाहे तालिबान कितना भी दोस्ताना रुख अपनाए, नहर के संचालन से उज्बेकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान को निश्चित ही असर पड़ेगा। भारत सीधे तौर पर कोश तेपा नहर परियोजना से प्रभावित नहीं होगा, क्योंकि यह मुख्य रूप से मध्य एशियाई देशों और पाकिस्तान-ईरान के जल संसाधनों से जुड़ी है। लेकिन, दक्षिण एशिया में जल-संघर्ष की बढ़ती घटनाओं और जल-संपदा के राजनीतिक इस्तेमाल पर भारत को दूर से नजर रखनी होगी। तालिबान की यह जल नीति केवल अफगानिस्तान की आंतरिक नीति नहीं, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया और मध्य एशिया के जल-संतुलन और भू-राजनीति को चुनौती देने वाली साबित हो सकती है।