सऊदी अरब ने खत्म किया कफाला सिस्टम : भारत समेत अरब देशों के कामगारों मिली आजादी
भारत
चेतना मंच
23 Oct 2025 02:15 PM
सऊदी अरब ने इतिहास रचते हुए कफाला (स्पॉन्सरशिप) सिस्टम को खत्म कर दिया है। यह फैसला लाखों प्रवासी मजदूरों के लिए राहत और नई उम्मीद लेकर आया है। 70 साल से चले आ रहे इस कफाला प्रणाली ने अरब देशों में प्रवासी मजदूरों की जिदगियों को सीमित कर रखा था। अब सवाल यह है कि क्या यह कफाला सिस्टम में बदलाव सिर्फ कागजों तक ही सीमित रहेगा या वाकई मजदूरों को उनकी हककी आजादी मिलेगी। Kafala System :
कफाला सिस्टम क्या था?
कफाला सिस्टम यानी स्पॉन्सरशिप सिस्टम, 1950 के दशक में शुरू हुआ। तेल उद्योग के उछाल के साथ भारत, बांग्लादेश, नेपाल और फिलीपींस के लाखों मजदूर सऊदी अरब आए। पर यह सिस्टम दरअसल एक बंधन था। हर प्रवासी मजदूर को स्थानीय नागरिक यानी कफील के अधीन रहना पड़ता था। कफील तय करता था कि मजदूर कहां काम करेगा, कब छुट्टी लेगा और देश छोड़ सकता है या नहीं।
पासपोर्ट अक्सर कफील के पास ही रहता था और नौकरी बदलने के लिए स्पॉन्सर की इजाजत अनिवार्य थी। ह्यूमन राइट्स वॉच और एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इसे आधुनिक गुलामी कहा।
70 साल का दर्द
सऊदी अरब में लगभग 13 मिलियन मजदूर हैं, जो कुल आबादी का 42% हैं। ये लोग शहरों का निर्माण करते, तेल की पाइपलाइनों को बिछाते और महलों को सजाते, लेकिन अपनी किस्मत खुद नहीं लिख पाते थे। कई बार उनके पासपोर्ट छीन लिए जाते, तनख्वाह रोकी जाती, और घरेलू कामगार महिलाओं को तो कैद जैसी स्थिति में रखा जाता। जून 2025 में सऊदी अरब ने कफाला सिस्टम को खत्म करने का ऐलान किया। अक्टूबर 2025 तक यह पूरी तरह लागू हो गया। अब स्पॉन्सरशिप सिस्टम की जगह कॉन्ट्रैक्ट-बेस्ड एम्प्लॉयमेंट मॉडल आ गया है।
बदलाव का मतलब
* नौकरी बदलने की आजादी : अब विदेशी वर्कर्स बिना स्पॉन्सर की अनुमति के नौकरी बदल सकते हैं।
* आने-जाने की आजादी : एग्जिट वीजा की जरूरत खत्म, मजदूर अपने एम्प्लॉयर की मंजूरी के बिना देश छोड़ सकते हैं।
* बेहतर कानूनी सुरक्षा : वर्कर्स अपनी शिकायत सीधे अदालत तक पहुंचा सकते हैं।
यह बदलाव 13 मिलियन प्रवासी मजदूरों, जिनमें भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल और फिलीपींस के नागरिक शामिल हैं, के लिए नई स्वतंत्रता लेकर आया है।
दुनिया पर असर
सऊदी अरब का यह कदम कतर के 2022 में हुए सुधार के बाद आया है। अब उम्मीद है कि कुवैत, बहरीन और ओमान जैसे अन्य खाड़ी देश भी इस दिशा में कदम बढ़ाएँगे। भारत ने इस फैसले का स्वागत किया और इसे भारतीय प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा और सम्मान बढ़ाने वाला कदम बताया। एमनेस्टी इंटरनेशनल के अनुसार कफाला खत्म होना सिर्फ शुरुआत है। असली सुधार तब होगा जब सऊदी अदालतें इन कानूनों को सख्ती से लागू करें। भाषा, डर और सामाजिक दबाव के कारण प्रवासी मजदूरों को अभी भी न्याय पाने में कठिनाई हो सकती है।
भविष्य की राह
सऊदी अरब विजन 2030 के तहत अपनी छवि को आधुनिक और निवेशक अनुकूल बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। 13 मिलियन प्रवासी अधिक स्वतंत्र और उत्पादक होंगे, जिससे अर्थव्यवस्था को भी लाभ मिलेगा। 70 साल का बंधन अब इतिहास बन चुका है, लेकिन असली आजादी तब होगी जब हर मजदूर अपनी आवाज खुद बुलंद कर सके। कानूनों का पालन ही असली आजादी की कसौटी है।