काठमांडू जल उठा: त्रिभुवन एयरपोर्ट बंद, फंसे 2500 भारतीय
भारत
चेतना मंच
02 Dec 2025 04:10 AM
नेपाल इन दिनों उथल-पुथल के दौर से गुजर रहा है। राजधानी काठमांडू में हालात बेकाबू हो चुके हैं। सोशल मीडिया बैन के खिलाफ शुरू हुआ Gen Z यानी युवा वर्ग का आंदोलन अब एक बड़े राजनीतिक संकट में तब्दील हो गया है। हिंसक प्रदर्शनों के चलते प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने इस्तीफा दे दिया है और अब राजधानी की कमान नेपाली सेना के हाथों में है। Nepal Protests
2500 भारतीय नागरिक फंसे
काठमांडू का त्रिभुवन इंटरनेशनल एयरपोर्ट पूरी तरह बंद कर दिया गया है। अंतरराष्ट्रीय और घरेलू उड़ानों पर रोक लगा दी गई है। एयरपोर्ट प्राधिकरण के अनुसार, 10 सितंबर 2025 दोपहर 12 बजे तक सभी उड़ानें स्थगित रहेंगी। इसके चलते करीब 2500 भारतीय नागरिक नेपाल में फंसे हुए हैं।
हर गली-चौराहे पर सेना तैनात
काठमांडू में हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि सेना ने चप्पे-चप्पे पर मोर्चा संभाल लिया है। पूरे शहर में कर्फ्यू लगा दिया गया है और आम जनता से घरों में ही रहने की अपील की गई है। सेना के प्रवक्ता ने कहा है कि स्थिति को काबू में करने के लिए आम लोगों से सहयोग की जरूरत है।
क्या है पूरा मामला?
सब कुछ तब शुरू हुआ जब नेपाल सरकार ने सोशल मीडिया साइट्स को बैन करने का फैसला लिया। सरकार के इस फैसले से नाराज युवा वर्ग (Gen Z) सड़कों पर उतर आया। 8 सितंबर को काठमांडू में एक शांतिपूर्ण प्रदर्शन हुआ जिसमें करीब 12,000 छात्र शामिल हुए। यह प्रदर्शन 'स्टूडेंट्स फॉर जस्टिस' नाम के एक छात्र संगठन द्वारा आयोजित किया गया था। प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा बल प्रयोग और कथित फायरिंग के बाद मामला बिगड़ गया। प्रदर्शनकारियों का गुस्सा इस कदर फूटा कि संसद भवन तक आग के हवाले कर दिया गया। इसके बाद हालात बेकाबू हो गए और सेना को मैदान में उतरना पड़ा।
भारत-नेपाल सीमा पर भी अलर्ट
पिछली रात से लेकर अब तक लूटपाट और हिंसा में शामिल 26 लोगों को सेना ने गिरफ्तार किया है। सरकारी इमारतों को जलाने और लूटने की घटनाएं भी सामने आई हैं। फिलहाल, सेना युवाओं से बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश कर रही है। नेपाल की स्थिति को देखते हुए भारत ने भी अपनी सीमा सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट कर दिया है। उत्तर प्रदेश, बिहार पुलिस और सशस्त्र सीमा बल (SSB) को हाई अलर्ट पर रखा गया है। सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि नेपाल की हिंसा का असर सीमावर्ती भारतीय क्षेत्रों में भी पड़ सकता है। Nepal Protests
नेता नहीं जवाबदेही चाहिए: Gen Z
प्रदर्शनकारी युवाओं की मांग साफ है, “हमें नया नेता नहीं, ईमानदार और जवाबदेह व्यवस्था चाहिए।” प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के इस्तीफे के बाद नई अंतरिम सरकार के गठन पर अब भी असमंजस बना हुआ है। इस बीच, खबर है कि राष्ट्रपति प्रदर्शनकारी छात्रों से मुलाकात करेंगे। सेना प्रमुख अशोक राज सिगडेल के साथ देर रात कुछ छात्र नेताओं की सीधी बातचीत भी हुई है।
नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. केआई सिंह के पोते यशवंत शाह का कहना है कि देश वर्षों से भ्रष्टाचार, गरीबी और बेरोजगारी से जूझ रहा है। "पर्यटन और व्यापार की अपार संभावनाओं के बावजूद यहां के युवा बेरोजगार हैं। यही गुस्सा अब फूट पड़ा है।" नेपाल एक राजनीतिक संक्रमण के दौर में है। प्रधानमंत्री के इस्तीफे के बाद सरकार नहीं है और सेना की मौजूदगी अस्थायी समाधान है। सवाल यह है कि क्या नेपाल लोकतांत्रिक रास्ते पर लौटेगा या सेना की छाया में आगे बढ़ेगा? Nepal Protests