अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला का भावुक संदेश : कामना, तुम्हारे बिना कुछ भी मायने नहीं रखता
Kennedy Space Center
भारत
RP Raghuvanshi
02 Dec 2025 01:16 AM
भारत
RP Raghuvanshi
02 Dec 2025 01:16 AM
Kennedy Space Center : उत्तर प्रदेश के लाल शुभांशु शुक्ला के अंतरिक्ष यात्रा से भारत के अंतरिक्ष इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। शुभांशु शुक्ला अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (ISS) पर जाने वाले दूसरे भारतीय अंतरिक्ष यात्री बन गए हैं। बुधवार दोपहर AXIOM-4 मिशन के तहत अमेरिका के फ्लोरिडा स्थित NASA के कैनेडी स्पेस सेंटर से रवाना हो गए। लेकिन लॉन्च से ठीक पहले, उत्तर प्रदेश के इस लाल का अपनी पत्नी कामना के लिए लिखा गया एक भावनात्मक संदेश सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जो न सिर्फ उनके निजी रिश्ते की गहराई दिखाता है, बल्कि उस इंसानी पहलू को भी उजागर करता है जो किसी भी अंतरिक्ष मिशन के पीछे छिपा होता है।
पत्नी को समर्पित भावुक संदेश
शुभांशु ने इंस्टाग्राम पर लिखा कि "25 जून की सुबह हम इस ग्रह को छोड़ने की योजना बना रहे हैं। मैं इस मिशन से जुड़े हर इंसान का शुक्रगुजार हूं, और खासकर कामना तुम्हारे बिना ये सब मुमकिन नहीं था। लेकिन सबसे जरूरी बात इनमें से कुछ भी मायने नहीं रखता... तुम्हारे बिना।" साथ में उन्होंने एक तस्वीर भी साझा की जिसमें शुभांशु और कामना एक कांच की दीवार के आर-पार एक-दूसरे को भावुक विदाई देते नजर आते हैं। यह क्षण न सिर्फ एक अंतरिक्ष यात्रा की शुरुआत है, बल्कि दो दिलों के मजबूत रिश्ते की भी पुष्टि है।
बचपन से लेकर ब्रह्मांड तक का साथ
कामना और शुभांशु की कहानी भी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं। दोनों की पहली मुलाकात लखनऊ के एक प्राइमरी स्कूल में तीसरी कक्षा के दौरान हुई थी। कामना ने बताया, मैं गुंजन (शुभांशु का पुकार नाम) को तब से जानती हूं जब वो बहुत शर्मीला था। आज वही बच्चा करोड़ों के लिए प्रेरणा बन गया है। इस जोड़े का एक छह साल का बेटा भी है, जो अपने पिता की इस ऐतिहासिक उड़ान को गौरव से देख रहा है।
घर वालों की प्रतिक्रिया: 'कामना सबसे बड़ा सहारा'
शुभांशु की मां आशा शुक्ला ने भी अपने बेटे की उपलब्धि पर गर्व व्यक्त करते हुए बहू कामना की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ हमारे बेटे की नहीं, हमारी बहू की भी जीत है। उसके समर्थन और समझदारी के बिना ये मुमकिन नहीं था। लखनऊ के त्रिवेणी नगर से उठकर अंतरिक्ष तक पहुंचने वाले शुभांशु शुक्ला की इस यात्रा में भावनाओं, सपनों और दृढ़ संकल्प का ऐसा संगम है जो सिर्फ एक वैज्ञानिक मिशन नहीं, बल्कि मानवीय प्रेरणा का प्रतीक बन चुका है।