अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि खामेनेई Ali Khamenei संयुक्त अमेरिका और इजरायल के हमले में शहीद हो गए। ईरानी मीडिया ने भी शोक जताया और पूरे देश में मातम का माहौल बताया गया।

ईरान की राजनीति और दुनिया की कूटनीति में उस समय हलचल मच गई जब सोशल मीडिया पर यह दावा तेजी से फैलने लगा कि ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत हो गई है। इसी बीच उनके आधिकारिक अकाउंट से एक धार्मिक संदेश पोस्ट हुआ जिसने लोगों के बीच हलचल पैदा कर दी है। यह पोस्ट फारसी भाषा में था “Be nām-e nāmi-ye Heydar, alayhis-salām”। इसका मतलब बताया जा रहा है “हैदर (उन पर शांति हो) के पवित्र नाम से।” इस संदेश को कई लोग आध्यात्मिक संकेत या श्रद्धांजलि के रूप में देख रहे हैं। हालांकि, इस पूरे मामले पर अभी तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर लिखा कि “खामेनेई मर चुके हैं।” उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि अमेरिका और इज़राइल की ओर से हमला किया गया। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि प्रमुख वैश्विक समाचार एजेंसियों से नहीं हुई है। इसलिए स्थिति को लेकर अब भी संशय बना हुआ है।
खामेनेई के आधिकारिक अकाउंट से जो पोस्ट किया गया उसमें “हैदर” शब्द का इस्तेमाल हुआ। ‘हैदर’ शिया इस्लाम में पहले इमाम हज़रत अली का एक नाम है। इस तरह के शब्द आमतौर पर धार्मिक और भावनात्मक संदर्भ में उपयोग किए जाते हैं। इस पोस्ट के बाद कई लोगों ने इसे आखिरी संदेश बताया जबकि कुछ का कहना है कि यह सिर्फ धार्मिक भाव प्रकट करने वाला वाक्य हो सकता है। अभी तक इस पोस्ट को लेकर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।
ईरान के सरकारी चैनल Press TV ने अपने लोगो को काले रंग में दिखाया और कथित तौर पर शोक जताया। चैनल ने इसे “शहादत” बताया। वहीं, Tasnim News Agency और Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) की ओर से भी बयान जारी होने की खबरें सामने आईं। इनमें खामेनेई को महान नेता बताया गया। हालांकि, इन रिपोर्ट्स की भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पुष्टि नहीं हुई है।
कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया कि खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर घोषित किया गया है। लेकिन ईरान की संवैधानिक प्रक्रिया के तहत सुप्रीम लीडर का चयन विशेषज्ञों की एक परिषद करती है। इस प्रक्रिया को लेकर भी कोई आधिकारिक और स्पष्ट घोषणा सामने नहीं आई है। खामेनेई 1989 से ईरान के सर्वोच्च नेता थे। उन्होंने रूहोल्लाह खुमैनी के बाद यह पद संभाला था और लंबे समय तक देश की राजनीति और सुरक्षा व्यवस्था पर मजबूत पकड़ बनाए रखी।
इस समय सोशल मीडिया पर कई तरह के दावे और खबरें चल रही हैं, लेकिन विश्वसनीय अंतरराष्ट्रीय स्रोतों से स्पष्ट पुष्टि का इंतजार है। ऐसे संवेदनशील मामलों में आधिकारिक बयान और पक्की जानकारी का इंतजार करना जरूरी होता है। फिलहाल, “In The Name Of Haidar” वाला पोस्ट चर्चा का केंद्र बना हुआ है और लोग इसके धार्मिक और राजनीतिक अर्थ तलाश रहे हैं। आने वाले समय में ही साफ होगा कि इन दावों में कितनी सच्चाई है।