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Kohinoor Controversy : कोहिनूर एक बार फिर चर्चा में आ गया है। इस बार न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी की वजह से। यह बहस फिर शुरू हो गई है कि कोहिनूर ब्रिटेन को भारत को लौटा देना चाहिए।

International News : न्यूयॉर्क शहर के मेयर जोहरान ममदानी ने बुधवार को कहा कि वह ब्रिटेन के किंग चार्ल्स को कोहिनूर हीरा लौटाने को कहेंगे। उनकी टिप्पणी ब्रिटिश सम्राट की अमेरिका यात्रा के दौरान आई है।
अमेरिकी-भारतीय ममदानी ने कहा, "अगर मुझे किंग से अलग से बात करने का मौका मिला, तो मैं शायद उन्हें कोहिनूर हीरा लौटाने के लिए प्रोत्साहित करूंगा। "
रॉयटर्स के मुताबिक 11 सितंबर, 2001 हमले के पीड़ितों की याद में आयोजित समारोह से कुछ घंटे पहले एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ममदानी से इस बारे में सवाल पूछा गया था।
चार्ल्स ने हमले के पीड़ितों को याद करते हुए, उस मेमोरियल पर फूलों का गुलदस्ता चढ़ाया जहां कभी वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के ट्विन टावर हुआ करते थे। समारोह के दौरान किंग और ममदानी की मुलाकात हुई। लेकिन बकिंघम पैलेस ने इस पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया और ममदानी के कार्यालय ने भी इस बारे में कोई जवाब नहीं दिया कि क्या उन्होंने किंग के सामने कोहिनूर का मुद्दा उठाया था।
कोहिनूर फिर चर्चा में
इस प्रकरण ने एक बार फिर कोहीनूर को चर्चा के केंद्र में ला दिया है जिसे भारत यूके से कई बार वापस मांग चुका है लेकिन लंदन इससे लगातार इनकार करता रहा है।
कोहिनूर (जिसका अर्थ है "प्रकाश का पर्वत") मूल रूप से भारत के गोलकुंडा खदानों से निकला था। यह मुगलों, नादिर शाह (फारस), अफगान शासकों और अंत में पंजाब के महाराजा रणजीत सिंह के पास पहुंचा। 1849 में दूसरा एंग्लो-सिख युद्ध के बाद ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने 10-12 वर्षीय महाराजा दलीप सिंह (रणजीत सिंह के पुत्र) से लाहौर की संधि के तहत इसे खुद को 'सौंपवा' लिया। दलीप सिंह की मां रानी जिंदान को कैद कर लिया गया था और नाबालिग शासक पर दबाव बनाया गया था।
1850 में इसे रानी विक्टोरिया को भेंट किया गया। बाद में कोहिनूर को फिर से काटा (रीकट) गया जिससे इसका वजन घटकर लगभग 105 कैरेट रह गया और अब यह ब्रिटिश क्राउन ज्वेल्स का हिस्सा है और टावर ऑफ लंदन में रखा हुआ है।
भारत ही नहीं पाकिस्तान, ईरान और अफगानिस्तान जैसे देश इसे अपना बताते आए हैं। लेकिन विवाद मुख्य रूप से भारत और ब्रिटेन के बीच रहा है।
ब्रिटेन क्यों करता है इनकार?
ब्रिटेन लगातार कोहिनूर लौटाने से इनकार करता रहा है। उसका मुख्य तर्क है कि कोहिनूर कानूनी रूप से प्राप्त हुआ था—लाहौर की संधि (1849) के तहत सौंपा गया, न कि चोरी किया गया। ब्रिटिश सरकार और पूर्व प्रधानमंत्री डेविड कैमरन जैसे नेताओं ने कहा कि इसे लौटाना "अव्यावहारिक मिसाल" कायम करेगा जिससे ब्रिटिश म्यूजियम और क्राउन ज्वेल्स खाली हो जाएंगे।
ब्रिटेन भले ही यह दावा करता है कि कोहिनूर को लाहौर की संधि के तहत कानूनी तौर पर सौंपा गया था, लेकिन कई इतिहासकार यह बताते हैं कि इसे सैन्य विजय के बाद और एक ऐसे नाबालिग शासक से हासिल किया गया था, जिस पर भारी दबाव डाला गया था।
ब्रिटेन को यह डर भी सताता है कि अगर उसने कोहिनूर लौटा दिया तो उसे कई और चीजें भी लौटानी होंगी जो उसने ब्रिटिश साम्राज्यवाद के दौर में गुलाम देशों से हासिल की थी।
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