कर्फ्यू के साए में लेह, इंटरनेट पर ब्रेक, 50 गिरफ्तार, जानें ताजा अपडेट
भारत
चेतना मंच
25 Sep 2025 11:14 AM
लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची में शामिल किए जाने की मांग को लेकर लंबे समय से चल रहा आंदोलन बुधवार को अचानक हिंसा में तब्दील हो गया। शांतिपूर्ण आंदोलन ने जब उग्र रूप लिया तो हालात बेकाबू हो गए। लेह की सड़कों पर प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच भिड़ंत में अब तक चार लोगों की जान चली गई जबकि 80 से अधिक लोग घायल हुए हैं जिनमें 40 सुरक्षाकर्मी भी शामिल हैं। स्थिति बिगड़ती देख प्रशासन ने लेह और करगिल में कर्फ्यू लागू कर दिया है। इंटरनेट की स्पीड को धीमा कर दिया गया है ताकि अफवाहें और भड़काऊ सामग्री फैलने से रोकी जा सके। पुलिस और सीआरपीएफ के जवान शहर की सड़कों पर तैनात हैं और माहौल अभी भी तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में बताया जा रहा है। Ladakh
हिंसा कैसे भड़की?
बुधवार दोपहर को प्रदर्शन उग्र हो गया जब भीड़ ने लेह में एक राजनीतिक दल के कार्यालय और सरकारी इमारतों में आग लगा दी। पुलिस वाहनों को फूंक दिया गया और सुरक्षाबलों पर पत्थरबाजी की गई। हालात को संभालने के लिए पुलिस ने बल प्रयोग किया और भीड़ को तितर-बितर करने के प्रयास किए। पुलिस ने 50 लोगों को गिरफ्तार किया है और अन्य उपद्रवियों की पहचान की जा रही है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
प्रशासन ने सोनम वांगचुक को बताया जिम्मेदार
प्रशासन ने इस हिंसा के लिए जाने-माने पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक को जिम्मेदार ठहराया है। गृह मंत्रालय के अनुसार, वांगचुक के भड़काऊ भाषणों ने युवाओं को उकसाया और हिंसा के लिए प्रेरित किया। उन्होंने अरब स्प्रिंग और नेपाल के आंदोलनों का हवाला देते हुए भीड़ को भड़काया। बताया गया कि जैसे ही हालात हिंसक हुए, वांगचुक ने बिना किसी जिम्मेदारी के अपनी भूख हड़ताल तोड़ दी और एंबुलेंस के जरिए अपने गांव लौट गए।
केंद्र का दावा- हम लद्दाख के हितों के लिए प्रतिबद्ध
गृह मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि लद्दाख के लोगों को संवैधानिक सुरक्षा देने के लिए सरकार पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। अब तक कई बड़े फैसले लिए जा चुके हैं जिनमें अनुसूचित जनजातियों का आरक्षण 45% से बढ़ाकर 84% करना, महिलाओं को एक-तिहाई आरक्षण देना, भोटी और पुर्गी भाषाओं को आधिकारिक भाषा का दर्जा, 1,800 से अधिक सरकारी पदों पर भर्ती की प्रक्रिया शुरू शामिल हैं। हालांकि सरकार का कहना है कि कुछ राजनीतिक शक्तियां उच्चाधिकार प्राप्त समिति (HPC) के जरिए चल रही बातचीत को विफल करने की कोशिश कर रही हैं।
इस घटना के बाद वामपंथी दलों ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। CPI(M) और CPI(ML) ने कहा कि जनता की जायज मांगों की अनदेखी और संवैधानिक अधिकारों की कटौती ने हालात को इस मोड़ पर ला खड़ा किया। कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस ने केंद्र से संवेदनशीलता और संवाद के जरिए हल निकालने की मांग की है, जबकि बीजेपी ने हिंसा को पूर्व नियोजित साजिश बताया है। जानकारों का मानना है कि यह 1989 के बाद लद्दाख में सबसे गंभीर हिंसक घटना है। प्रशासन ने दावा किया है कि बुधवार शाम 4 बजे तक हालात पर नियंत्रण पा लिया गया लेकिन क्षेत्र में तनाव अभी भी कायम है। लेह और करगिल में बीएनएसएस की धारा 163 लागू कर दी गई है और संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त बलों की तैनाती की गई है।
लोगों से शांति बनाए रखने की अपील
प्रशासन की ओर से लगातार शांति बनाए रखने की अपील की जा रही है। स्थानीय लोगों से अनुरोध किया गया है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और प्रशासन का सहयोग करें। फिलहाल लेह में कर्फ्यू लागू है, इंटरनेट की गति कम कर दी गई है और स्थिति पर नजर रखने के लिए राज्य और केंद्रीय एजेंसियां अलर्ट पर हैं। Ladakh