हॉकी का वो जादूगर जिसे देखकर दंग रह गया था पूरा बर्लिन
भारत
चेतना मंच
02 Dec 2025 02:19 AM
आज पूरे देश में राष्ट्रीय खेल दिवस (National Sports Day) मनाया जा रहा है। इस दिन को भारत के महानतम हॉकी खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद की जयंती (Major Dhyan Chand) के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। मेजर ध्यानचंद के अद्वितीय खेल और देशभक्ति के किस्से आज भी लोगों को प्रेरणा देते हैं। Major Dhyan Chand
क्यों मनाते हैं 29 अगस्त को राष्ट्रीय खेल दिवस?
ज्यादातर लोग यह बात नहीं जानते कि 29 अगस्त को राष्ट्रीय खेल दिवस क्यों मनाया जाता है। हम आपको बता दें कि 29 अगस्त को मेजर ध्यानचंद का जन्म हुआ था जिसके कारण आज के दिन यह दिवस मनाया जाता है। मेजर ध्यानचंद जन्म 29 अगस्त 1905 को उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद (अब प्रयागराज) में हुआ था। वे बचपन से ही खेलों में रुचि रखते थे और सेना में भर्ती होने के बाद उन्होंने हॉकी में अपना करियर शुरू किया।
'चंद' नाम कैसे पड़ा?
ध्यानचंद का असली नाम तो ध्यान सिंह था लेकिन उनके साथी उन्हें 'चंद' कहकर बुलाने लगे। जिसकी वजह से ध्यान सिंह का नाम ध्यानचंद पड़ा। बता दें कि, मेजर ध्यानचंद ड्यूटी खत्म होने के बाद भी चांदनी रात में घंटों अभ्यास करते थे । उनके इसी समर्पण ने उन्हें 'हॉकी का जादूगर' बना दिया।
जब ठुकरा दिया हिटलर का ऑफर
मेजर ध्यानचंद ने भारत को लगातार तीन ओलंपिक में गोल्ड मेडल 1928 में एम्स्टर्डम, 1932 में लॉस एंजेलेस, 1936 में बर्लिन दिलाए। कहा जाता है कि उन्होंने अपने करियर में 1000 से भी ज्यादा गोल किए। 1936 के बर्लिन ओलंपिक में ध्यानचंद के खेल से जर्मन तानाशाह एडोल्फ हिटलर इतना प्रभावित हुआ कि उसने उन्हें जर्मन सेना में हाई रैंक देने की पेशकश की लेकिन ध्यानचंद ने गर्व से भारत को चुना और इस ऑफर को ठुकरा दिया।
'जादुई स्टिक' की जांच
नीदरलैंड में एक बार अधिकारियों को शक हुआ कि ध्यानचंद की हॉकी स्टिक में कोई चुंबक या गोंद है क्योंकि गेंद उनसे चिपकी रहती थी उनकी स्टिक तोड़कर जांच की गई, लेकिन नतीजा वही यह जादू उनकी मेहनत का था। ध्यानचंद की आत्मकथा का नाम 'गोल' है जिसे उन्होंने खुद लिखा और यह 1952 में प्रकाशित हुई थी। इसमें उनके संघर्ष, समर्पण और खेल के अनसुने किस्से दर्ज हैं।
महान क्रिकेटर सर डॉन ब्रैडमैन ने एक बार कहा था, “ध्यानचंद गोल वैसे करते हैं जैसे हम क्रिकेट में रन बनाते हैं।” ध्यानचंद को 1956 में भारत सरकार ने पद्म भूषण से सम्मानित किया। उनकी याद में भारत सरकार ने 'मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार' की भी शुरुआत की जो देश का सर्वोच्च खेल सम्मान है। Major Dhyan Chand