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अमेरिका ने एक बार फिर ईरान के तेल नेटवर्क पर सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा आर्थिक कदम उठाया है। अमेरिकी प्रशासन ने ईरान से जुड़े 12 व्यक्तियों और कंपनियों पर प्रतिबंध लगा दिए हैं।

Iran-US War : अमेरिका ने एक बार फिर ईरान के तेल नेटवर्क पर सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा आर्थिक कदम उठाया है। अमेरिकी प्रशासन ने ईरान से जुड़े 12 व्यक्तियों और कंपनियों पर प्रतिबंध लगा दिए हैं। इन पर आरोप है कि ये संस्थाएं ईरानी तेल को चीन तक पहुंचाने और उसकी बिक्री में मदद कर रही थीं। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के चीन दौरे की तैयारियां चल रही हैं और वैश्विक कूटनीतिक माहौल पहले से ही तनावपूर्ण है। Iran-US War
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के अनुसार, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूसनरी गार्ड कार्प्स (आईआरजीसी) तेल बिक्री के लिए कई देशों में फर्जी और फ्रंट कंपनियों का इस्तेमाल करती है। इन कंपनियों के जरिए तेल बेचकर मिलने वाली रकम का इस्तेमाल कथित तौर पर सैन्य गतिविधियों और परमाणु कार्यक्रमों में किया जाता है। इस नए प्रतिबंध में ईरान के 3 व्यक्ति और हांगकांग व संयुक्त अरब अमीरात की 9 कंपनियां शामिल हैं। सभी की अमेरिकी संपत्तियों को फ्रीज कर दिया गया है और इनके साथ किसी भी तरह के व्यापार पर रोक लगा दी गई है। Iran-US War
अमेरिका का आरोप है कि ईरान अपने तेल निर्यात का बड़ा हिस्सा चीन को बेचता है, जो उसका सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। इसी नेटवर्क को रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कार्रवाई केवल आर्थिक नहीं, बल्कि एक रणनीतिक संदेश भी है, जिससे चीन पर ईरान के मामले में दबाव बनाया जा सके। Iran-US War
वॉशिंगटन लंबे समय से ईरान पर आर्थिक प्रतिबंधों के जरिए दबाव बना रहा है। अमेरिका का कहना है कि उसका उद्देश्य ईरान को हथियार कार्यक्रम और परमाणु गतिविधियों के लिए फंड जुटाने से रोकना है। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव के अनुसार, आने वाले समय में भी इस तरह की कार्रवाई जारी रहेगी ताकि ईरान की आर्थिक गतिविधियों को सीमित किया जा सके।
ईरान और पश्चिमी देशों के बीच तनाव का सीधा असर वैश्विक तेल बाजार पर भी देखा जा रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य, जिससे दुनिया का करीब 20% तेल और गैस गुजरता है, वहां स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। इससे आपूर्ति और कीमतों को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है। ट्रंप के आगामी चीन दौरे में व्यापार विवादों के साथ-साथ ईरान का मुद्दा भी अहम एजेंडा हो सकता है। अमेरिका चाहता है कि चीन ईरान पर दबाव बढ़ाए, जिससे उसकी तेल बिक्री प्रभावित हो सके। इससे पहले भी अमेरिका कई चीनी और हांगकांग कंपनियों पर प्रतिबंध लगा चुका है, जो ईरानी तेल नेटवर्क से जुड़ी बताई जाती हैं। यह कार्रवाई सिर्फ प्रतिबंध नहीं बल्कि एक बड़े भू-राजनीतिक संदेश के रूप में देखी जा रही है। अमेरिका एक तरफ ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ा रहा है, तो दूसरी तरफ चीन को भी अप्रत्यक्ष रूप से कूटनीतिक संकेत दे रहा है कि वैश्विक तेल और ऊर्जा राजनीति में उसकी भूमिका पर कड़ी नजर रखी जा रही है। Iran-US War
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