ईरान में विरोध प्रदर्शन : 5 बड़ी बातें जो जानना हैं जरूरी

ईरान को लेकर दुनिया भर की मीडिया में बहुत कुछ कहा जा रहा है। कई विश्लेषक दावा कर रहे हैं कि ईरान में इस्लामिक शासन के अब गिनती के दिन ही बचे हैं। लेकिन ईरान एक ऐसा देश है जिस पर कोई भी राय बनाने से पहले हमें बेहद सावधानी बरतने की जरुरत है।

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locationभारत
userआरपी रघुवंशी
calendar12 Jan 2026 03:35 PM
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IRAN NEWS: ईरान एक बार फिर उथल पुथल के दौर से गुजर रहा है। सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन 15 दिनों से जारी है। अर्थव्यवस्था के बुरे हालात से उपजा अंसतोष अब सत्ता परिवर्तन की दिशा में मुड़ता दिख रहा है। ईरान को लेकर दुनिया भर की मीडिया में बहुत कुछ कहा जा रहा है। कई विश्लेषक दावा कर रहे हैं कि ईरान में इस्लामिक शासन के अब गिनती के दिन ही बचे हैं। लेकिन ईरान एक ऐसा देश है जिस पर कोई भी राय बनाने से पहले हमें बेहद सावधानी बरतने की जरुरत है। हम उन पांच प्वाइंट पर चर्चा करेंगे जो ईरान को जानने-समझने के लिए जरुरी हैं:

1-ईरान पर सच कौन बोल रहा है?

ईरान में प्रेस और नागिरक अधिकारों पर कड़े प्रतिबंध लगे हैं। विरोध प्रदर्शन के चलते देश भर में इंटरनेट पर रोक लगा दी गई है। वैसे भी ईरान दुनियाभर में सबसे अधिक इंटरनेट सेंसरशिप वाला देश रहा है। ऐसे में ईरान की सही खबरें बाहर आना मुश्किल है। दूसरी तरफ है वेस्टर्न मीडिया जो मुख्य तौर पर ईरान का आलोचक रही है। उसकी जानकारी पर भरोसा करना बड़ी गलती हो सकती है। ईरान और अमेरिका की दुश्मनी जग जाहिर है। ईरान मिडिल ईस्ट में अमेरिका हितों के रास्ते में सबसे बड़ी रुकावट रहा है। ईरान की जनता सड़कों पर उतरी तो यूएस प्रेसिडेंट तुरंत एक्टिव हुए और प्रदर्शनकारियों के पक्ष में बयान देने लगे। दूसरी तरफ ईरानी सुप्रीम लीडर ने कहा कि प्रदर्शनकारी यूएस प्रेसिडेंट को खुश करने में लगे हैं।

इन दो विरोधी नजरियों के बीच ईरान की वास्तविकता को समझना एक चुनौती है। इसके लिए हमें लगातार फैक्ट्स को क्रॉस चेक करना होगा और घटनाक्रम का निष्पक्ष आकलन करना पड़ेगा?

2-क्या ईरान में हो सकता है सत्ता परिवर्तन?

यह पहली बार नहीं है जब ईरान में बड़े विरोध प्रदर्शन हुए हैं। पिछले 2 दशकों में देश में कई बार विरोध की लहरे उठीं लेकिन ईरानी सरकार इनसे पार पाने में सफल रही है। इससे पहले सबसे बड़े विरोध प्रदर्शन 2009 में देखे गए थे जिसे ग्रीन मूवमेंट का नाम दिया गया। राष्ट्रपति चुनाव में धांधली के आरोप इस आंदोलन की वजह बने थे। हालांकि तेहरान इन पर काबू पाने में कामयाब रहा। 2022 का साल भी ईरान में उथल पुथल का साल बन कर आया जब महसा अमिनी की हिरासत में मौत के बाद विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। लेकिन काफी मशक्कत के बाद सरकार विरोध की आवाज दबाने में सफल रही। फिलहाल कहना मुश्किल है कि ईरान में सत्ता परिवर्तन हो सकता है या नहीं क्योंकि सरकार ऐसे प्रोटेस्ट को नियंत्रित करने का अनुभव रखती है। एतिहासिक रिकॉर्ड भी यही कहता है।

3-क्या अमेरिका कर सकता है सैन्य कार्रवाई ?

ट्रंप प्रशासन ने 3 जनवरी को वेनेजुएला में सत्ता परिवर्तन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। चीन और रूस की तरफ से सिर्फ औपचारिक विरोध दर्ज किया गया लेकिन कोई गंभीर चुनौती पेश नहीं की गई। ईरान का सहयोगी रूस यूक्रेन युद्ध में उलझा है इसलिए वह ईरान की मदद करने की स्थिति में नहीं है। चीन की नीति किसी भी देश में सीधे हस्तक्षेप की नहीं रही है ऐसे में बीजिंग ईरान में कोई बड़ी भूमिका निभाएगा इसकी संभावनाएं बेहद कम है। यूएस प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप के बयानों से साफ है कि वह ईरान को लेकर कड़ा फैसला कर सकते हैं। पिछले साल ही उन्होंने इजरायल के साथ मिलकर ईरान के परमाणु ठिकानों पर बमबारी की थी। अमेरिका की तरफ से फिर से सैन्य कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है।

4-ईरान की जनता राजशाही चाहती है या लोकतंत्र

ये सबसे बड़ा सवाल है जो इन विरोध प्रदर्शनों से खड़ा हुआ है। दरअसल प्रदर्शनों की शुरुआत से ही ऐसे वीडियो जमकर इंटरनेट पर वायरल हुए जिनमें लोग ईरान के अंतिम शाह मोहम्मद रेजा पहलवी के समर्थन में नारेबाजी करते दिखे। ईरान में नागरिक और महिला अधिकारों पर पाबंदियां लगी है लेकिन जनता याद कर रही है शाह पहलवी को जिनके दमनकारी शासन ने 1979 की इस्लामिक क्रांति को जन्म दिया था। वहीं शाह के निर्वासित बेटे लगातार लोगों से विरोध में शामिल होने और सिटी सेंटर्स पर कब्जे का आह्वान कर रहे हैं। वह जल्द ही देश लौटने की घोषणा भी कर रहे हैं। उन्होंने ट्रंप से भी प्रदर्शनाकारियों की मदद करने की अपील की थी। कोई भी पूर्व पीएम मोहम्मद मोसद्दक का नाम नहीं ले रहा है। जिन्होंने तेल उद्योग का राष्ट्रीयकरण किया था जिससे नाराज होकर यूएस और यूके ने मिलकर एक साजिश के तहत उन्हें 1953 में सत्ता से हटा दिया था।

 5- ईरान के साथ जुड़ा है दुनिया का भविष्य

ईरान तेल, गैस और खनिज संसाधनों के मामले में दुनिया के सबसे अमीर देशों में से एक है। यह तेल रिजर्व के मामले में तीसरे, गैस रिजर्व के बारे में दूसरे नंबर पर है। ईरान में खनन (माइनिंग) अभी भी विकास के चरण में है, फिर भी यह देश दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण खनिज उत्पादकों में से एक है। यह दुनिया के टॉप-15 मेजर मिनिरल रिच देशों में शामिल है, जहां 68 प्रकार के खनिज पाए जाते हैं। अगर ईरान में इस्लामिक शासन का अंत होता तो और तेल और अन्य संसाधनों पर अमेरिका समर्थित सरकार का कब्जा होगा ऐसे में दुनिया भर में तेल और गैस की सप्लाई और कीमतों को तय करने अमेरिका अहम भूमिका निभाएगा। वो पहले ही सबसे बड़े तेल रिजर्व वाले वेनेजुएला पर कब्जा कर चुका है। अगर ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में लिया कड़ा एक्शन तो दुनिया में एक बड़ा तेल संकट खड़ा हो सकता है। ईरान को दुनिया के इस महत्वपूर्ण तेल रूट में एक अहम रणनीतिक बढ़त हासिल है। वह इसे ब्लॉक कर सकता है। यहां से दुनिया का 20 से 30 फीसदी तेल गुजरता है। अगर हालात काबू से बाहर होते देख ईरानी सरकार यह कदम उठा सकती है। IRAN NEWS

 

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तेल नहीं, समंदर असली निशाना, ट्रंप की रणनीति दुनिया के लिए खतरनाक

वेनेजुएला दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार वाले देशों में गिना जाता है। लंबे समय से यह देश अमेरिकी रणनीतिकारों की नजर में रहा है। माना जा रहा है कि ट्रंप प्रशासन वेनेजुएला को केवल ऊर्जा स्रोत के तौर पर नहीं, बल्कि कैरेबियन सागर में प्रभाव बढ़ाने के प्रवेश द्वार के रूप में देखता है।

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डोनाल्ड ट्रंप
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar11 Jan 2026 01:47 PM
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Trump's Strategy : डोनाल्ड ट्रंप की राजनीति हमेशा से सीधे टकराव और आक्रामक फैसलों के लिए जानी जाती रही है। 2025 में टैरिफ वॉर के जरिए जिस तरह उन्होंने वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बनाया, उसने कई देशों को हिला कर रख दिया। लेकिन 2026 की शुरुआत में ट्रंप की रणनीति और भी खतरनाक मोड़ पर जाती दिखाई दे रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अब ट्रंप सिर्फ व्यापार नहीं, बल्कि ऊर्जा और समुद्री रास्तों पर वर्चस्व की लड़ाई लड़ना चाहते हैं। तेल तो महज एक बहाना है, असली खेल दुनिया के समंदरों पर कब्जे का है।

वेनेजुएला और ऊर्जा नियंत्रण की रणनीति

वेनेजुएला दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार वाले देशों में गिना जाता है। लंबे समय से यह देश अमेरिकी रणनीतिकारों की नजर में रहा है। माना जा रहा है कि ट्रंप प्रशासन वेनेजुएला को केवल ऊर्जा स्रोत के तौर पर नहीं, बल्कि कैरेबियन सागर में प्रभाव बढ़ाने के प्रवेश द्वार के रूप में देखता है। कैरेबियन क्षेत्र पर मजबूत पकड़ का मतलब है मध्य और दक्षिण अमेरिका की शिपिंग पर प्रभाव। पनामा नहर के आसपास रणनीतिक दबदबा और अमेरिका की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती का मिलना। यही वजह है कि वेनेजुएला के बाद कोलंबिया, क्यूबा और मैक्सिको जैसे देशों की भूमिका भी अमेरिकी रणनीति में अहम मानी जा रही है।

ग्रीनलैंड : बर्फ नहीं, भू-राजनीति का खजाना

ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप की दिलचस्पी कोई नई बात नहीं है। आधिकारिक तौर पर इसे राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा बताया जाता है, लेकिन असल वजह कहीं ज्यादा गहरी है। ग्रीनलैंड डेनमार्क का स्वायत्त क्षेत्र है, आबादी भले ही बेहद कम हो, लेकिन इसका भौगोलिक स्थान इसे बेहद अहम बना देता है। विशेषज्ञों के अनुसार, ग्रीनलैंड पर प्रभाव होने से आर्कटिक क्षेत्र में अमेरिका की पकड़ मजबूत होगी। बर्फ पिघलने से खुलने वाले नए शिपिंग रूट्स पर नियंत्रण मिलेगा। रूस और चीन की आर्कटिक गतिविधियों पर नजर रखी जा सकेगी। ग्रीनलैंड के जरिए अमेरिका को बैफिन बे, लैब्राडोर सी, हडसन बे और बैरेंट्स सी जैसे रणनीतिक समुद्री इलाकों में प्रभाव बढ़ाने का मौका मिल सकता है।

आर्कटिक : भविष्य का ट्रेड हाइवे

जलवायु परिवर्तन के कारण आर्कटिक की बर्फ तेजी से पिघल रही है। इससे ऐसे समुद्री रास्ते खुल रहे हैं जो पारंपरिक रूट्स के मुकाबले छोटे और सस्ते हैं। जिस देश का इन रास्तों पर नियंत्रण होगा, वही भविष्य के वैश्विक व्यापार को दिशा देगा। ट्रंप यह भलीभांति जानते हैं कि अगर आर्कटिक में रूस या चीन का दबदबा बढ़ता है, तो अमेरिका की समुद्री बादशाहत को सीधी चुनौती मिलेगी। इसी आशंका के चलते ग्रीनलैंड ट्रंप की रणनीति का केंद्र बनता जा रहा है।

समंदर पर कब्जा = वैश्विक व्यापार पर नियंत्रण

विश्लेषकों के अनुसार ट्रंप की रणनीति सिर्फ अटलांटिक या आर्कटिक तक सीमित नहीं है। लाल सागर, फारस की खाड़ी और बंगाल की खाड़ी जैसे इलाकों पर प्रभाव बढ़ाने की कोशिशों को भी इसी बड़े प्लान का हिस्सा माना जा रहा है। अगर कोई ताकत इन समुद्री रूट्स को प्रभावित करने की स्थिति में आ जाती है, तो वैश्विक सप्लाई चेन बाधित हो सकती है। व्यापार महंगा और अस्थिर हो जाएगा

और छोटे और विकासशील देशों की निर्भरता बढ़ेगी। 

अमेरिका फर्स्ट से दुनिया कंट्रोल तक?

ट्रंप का नारा अमेरिका फर्स्ट अब सिर्फ घरेलू राजनीति तक सीमित नहीं दिखता। आलोचकों का कहना है कि उनका उद्देश्य दुनिया के देशों को दो ही विकल्प देना है। अमेरिकी शर्तों पर व्यापार करो या वैश्विक बाजार से बाहर हो जाओ। रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर भारी टैरिफ की धमकी और समुद्री रास्तों पर नियंत्रण की कोशिशें इसी दिशा में उठाए गए कदम माने जा रहे हैं।

क्यों खतरनाक है यह रणनीति?

अगर वैश्विक व्यापार कुछ गिने-चुने समुद्री रास्तों और एक ताकत के नियंत्रण में चला गया, तो अंतरराष्ट्रीय कानून कमजोर पड़ेंगे। वैश्विक असंतुलन बढ़ेगा और टकराव और संघर्ष की आशंका बढ़ेगी। ट्रंप का अब तक का रिकॉर्ड बताता है कि वे अंतरराष्ट्रीय सहमति से ज्यादा ताकत की भाषा में भरोसा रखते हैं। यही वजह है कि उनकी यह समुद्री रणनीति दुनिया के लिए चिंता का विषय बनती जा रही है।

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Elon Musk के X पर चला बड़ा हथौड़ा, डिलीट हुए 600 अकाउंट

Elon Musk के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अश्लील कंटेंट को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है। हजारों पोस्ट ब्लॉक होने और सैकड़ों अकाउंट डिलीट होने के बाद कई सवाल खड़े हो रहे हैं। Grok AI से जुड़े इस विवाद ने सरकार और टेक कंपनियों के रिश्ते पर नई बहस छेड़ दी है।

Elon Musk
अश्लील कंटेंट को लेकर बड़ा फैसला
locationभारत
userअसमीना
calendar11 Jan 2026 11:14 AM
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सोशल मीडिया आज हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है लेकिन जब यही प्लेटफॉर्म गलत इस्तेमाल का ज़रिया बन जाए तो सवाल उठना लाजमी है। बीते कुछ दिनों से Elon Musk के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पहले Twitter) पर अश्लील और आपत्तिजनक कंटेंट को लेकर विवाद गहराता जा रहा था। अब इस पूरे मामले में X ने बड़ा कदम उठाते हुए सख्त फैसला लिया है जो भारत में डिजिटल कंटेंट की दिशा तय कर सकता है।

सरकार की सख्ती के बाद हरकत में आया X

भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने जब X प्लेटफॉर्म पर मौजूद आपत्तिजनक कंटेंट पर आपत्ति जताई तब जाकर यह मामला गंभीर हुआ। मंत्रालय ने X को एक लेटर लिखकर साफ कहा कि ऐसे कंटेंट को तुरंत हटाया जाए खासकर वह सामग्री जो महिलाओं और नाबालिगों से जुड़ी हो। सरकार की इस चेतावनी के करीब एक हफ्ते बाद अब X ने माना है कि उनसे कंटेंट मॉडरेशन में गलती हुई है और वह आगे भारत के कानून और सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार काम करेगा।

3,500 पोस्ट ब्लॉक और 600 अकाउंट्स डिलीट

X की ओर से की गई कार्रवाई काफ़ी बड़ी मानी जा रही है। प्लेटफॉर्म ने 3,500 से ज्यादा आपत्तिजनक पोस्ट ब्लॉक किए हैं और 600 अकाउंट्स को हमेशा के लिए डिलीट कर दिया है। ये वही अकाउंट्स थे जो अश्लील कंटेंट फैलाने या उसे बढ़ावा देने में शामिल पाए गए। सूत्रों के मुताबिक, X ने साफ कर दिया है कि अब ऐसे कंटेंट को किसी भी हालत में अनुमति नहीं दी जाएगी और कंटेंट मॉनिटरिंग को और सख्त किया जाएगा।

Grok AI बना विवाद की जड़

इस पूरे विवाद के केंद्र में रहा Grok AI, जो कि Elon Musk की कंपनी xAI द्वारा बनाया गया एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस चैटबॉट है। Grok को X प्लेटफॉर्म के साथ जोड़ा गया है और इसे अलग ऐप के ज़रिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है। समस्या तब शुरू हुई जब कुछ यूजर्स ने Grok AI का गलत इस्तेमाल करते हुए अश्लील इमेज तैयार करना शुरू कर दिया। खास तौर पर महिलाओं और नाबालिगों की तस्वीरों को एडिट कर आपत्तिजनक कंटेंट बनाया गया जो सोशल मीडिया पर तेजी से फैलने लगा।

Grok AI क्या है और कैसे होता है इसका इस्तेमाल?

Grok AI एक ऐसा चैटबॉट है जो टेक्स्ट या वॉयस कमांड के जरिए यूजर्स के सवालों का जवाब देता है और कंटेंट जनरेट करता है। आम तौर पर इसका इस्तेमाल जानकारी पाने, सवाल पूछने या क्रिएटिव कामों के लिए किया जाता है लेकिन जब इसी तकनीक का इस्तेमाल गलत इरादों से किया जाए तो यह समाज के लिए खतरा बन सकता है। यही वजह है कि Grok AI के फीचर्स को लेकर सरकार और आम लोगों दोनों ने चिंता जताई।

आगे नहीं दोहराई जाएगी गलती

इस पूरे मामले के बाद X ने यह भरोसा दिलाया है कि वह आगे से ऐसे किसी भी कंटेंट को प्लेटफॉर्म पर जगह नहीं देगा जो कानून के खिलाफ हो। कंपनी ने कहा है कि वह भारत सरकार के साथ मिलकर काम करेगी और अपने नियमों को और मजबूत बनाएगी।

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