लॉन्च के बाद मीडिया से बात करते हुए डॉ. नारायणन ने कहा कि रॉकेट के तीसरे चरण के अंत में तकनीकी गड़बड़ी का सामना करना पड़ा, जिससे मिशन की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई।

PSLV Launch : सोमवार को सुबह हुए पीएसएलवी-सी62 मिशन के तीसरे चरण में तकनीकी खामी आ गई, जिसके कारण मिशन को आगे नहीं बढ़ाया जा सका। इसरो के चेयरमैन डॉ. वी. नारायणन ने इस तकनीकी समस्या की पुष्टि करते हुए बताया कि इसकी जांच प्रारंभ कर दी गई है। इस मिशन का उद्देश्य ईओएस-एन1 नामक पृथ्वी अवलोकन उपग्रह और साथ में भेजे गए 15 छोटे उपग्रहों को सूर्य समकालिक कक्षा में स्थापित करना था। यह प्रक्षेपण श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से सुबह 10:17 बजे किया गया था।
लॉन्च के बाद मीडिया से बात करते हुए डॉ. नारायणन ने कहा कि रॉकेट के तीसरे चरण के अंत में तकनीकी गड़बड़ी का सामना करना पड़ा, जिससे मिशन की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई। उन्होंने बताया कि पहले तीन चरणों में रॉकेट का प्रदर्शन सामान्य था, लेकिन चौथे चरण के दौरान एक हल्का बदलाव देखा गया, जिससे रॉकेट का मार्ग बदल गया। इस समय वैज्ञानिक टीम ग्राउंड स्टेशन से प्राप्त आंकड़ों का अध्ययन कर रही है, ताकि समस्या का कारण स्पष्ट किया जा सके।
पीएसएलवी रॉकेट में चार चरण होते हैं। पहला ठोस ईंधन से, दूसरा तरल ईंधन से, तीसरा फिर ठोस ईंधन से और चौथा तरल ईंधन से। तीसरे चरण तक रॉकेट ने अपेक्षित प्रदर्शन किया था, लेकिन उसके बाद कुछ समस्या उत्पन्न हो गई। इसरो के प्रमुख ने यह भी कहा कि पिछले साल मई में हुए पीएसएलवी-सी61 मिशन में भी तीसरे चरण में तकनीकी समस्या आई थी, जिससे वह मिशन भी पूरी तरह सफल नहीं हो सका था।
ईओएस-एन1 उपग्रह, जिसे अन्वेषा भी कहा जा रहा है, का उद्देश्य भारत की कृषि, शहरी योजना और पर्यावरण निगरानी क्षमता को बढ़ाना था। साथ ही, मिशन के तहत स्पेन की एक स्टार्टअप द्वारा विकसित केआईडी नामक एक छोटे पुन:प्रवेश यान का प्रदर्शन भी किया जाना था। यह मिशन इसरो की वाणिज्यिक शाखा न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड का नौवां वाणिज्यिक मिशन था। हालांकि पीएसएलवी रॉकेट का यह मिशन सफल नहीं हो सका, लेकिन इसरो का पीएसएलवी कार्यक्रम अब तक 63 सफल उड़ानें पूरी कर चुका है। इसके प्रमुख मिशनों में चंद्रयान-1, मंगल कक्षा मिशन, आदित्य-एल1 और एस्ट्रोसैट जैसे ऐतिहासिक अभियान शामिल हैं। 2017 में पीएसएलवी ने एक ही मिशन में 104 उपग्रहों को लॉन्च कर विश्व रिकॉर्ड भी स्थापित किया था। इसरो की टीम ने जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है, और पूरी उम्मीद है कि वे इस समस्या का समाधान जल्द निकालेंगे और भविष्य में इस तरह की गड़बड़ी से बचने के उपाय अपनाएंगे। अब यह देखना होगा कि यह गड़बड़ी भविष्य में भारतीय अंतरिक्ष मिशनों पर क्या असर डालती है। क्या आपको लगता है कि इसरो जल्द ही इस समस्या का समाधान निकाल पाएगा?