बड़ी खबर : मारिया कोरिना मचाडो को मिला शांति का नोबेल प्राइज
भारत
चेतना मंच
10 Oct 2025 02:38 PM
दुनिया
के
सबसे
बड़े
पुरस्कार
नोबेल
शांति
पुरस्कार
-2025 (Nobel Peace Prize 2025)
की
घोषणा
हो
गई
है।
वर्ष
-2025
का
नोबेल
शांति
पुरस्कार
-2025 (Nobel Peace Prize 2025) मारिया कोरिना मचाडो
को
दिया
गया
है।
नोबेल
शांति
पुरस्कार
-2025 (Nobel Peace Prize 2025)
की
घोषणा
होने
के
साथ
ही मारिया कोरिना मचाडो
सबसे
बड़े
शांति
दूत
बन
गई
हैं।
इस
वर्ष
-2025
में
शांति
का
नोबेल
पुरस्कार
(Nobel Peace Prize 2025)
पाने
की
इच्छा
पाले
बैठे
हुए
दुनिया
भर
के
ढ़ेर
सारे
नेताओं
के
सपनों
पर
पानी
फिर
गया
है।
Nobel Peace Prize 2025
नोबेल समिति के अध्यक्ष जॉर्जेन वाटनर फ्राइडनेस ने की नोबेल पुरस्कार की घोषणा
पूरी
दुनिया
की
निगाह
शुक्रवार
को
नोबेल
समिति
के
फैसले
पर
टिकी
हुई
थीं।
दुनिया
भर
के
मीडिया
की
उपस्थिति
में
नोबेल
समिति
के
अध्यक्ष
जॉर्जेन
वाटनर
फ्राइडनेस
ने
शांति
के
नोबेल
पुरस्कार
-2025 (Nobel Peace Prize 2025)
की
विधिवत
घोषणा
की।
नोबेल
समिति
में
फ्राइडनेस
के
अलावा
चार
सदस्य
और
शामिल
हैं।
इस
प्रकारर
यह
नोबेल
पुरस्कार
समिति
में
कुल
पांच
सदस्य
हैं।
समिति
के
अध्यक्ष
जॉर्जेन
वाटनर
फ्राइडनेस
प्रसिद्ध
मानवाधिकार
अधिवक्ता
हैं।
उनके
अलावा
विदेश
नीति
के
प्रसिद्ध
विद्वान
एस्ले
टोजे
,
नॉर्वे
के
पूर्व
कार्यवाहक
प्रधानमंत्री
ऐनी
एंगर
,
पूर्व
नार्वेजियन
शिक्षा
मंत्री
क्रिस्टिन
क्लेमेट
तथा
नॉर्वेजियन
विदेशी
मामलों
के
सचिव
ग्रिलार्सन
नोबेल
समिति
के
सदस्य
हैं।
नोबेल
पुरस्कार
की
घोषणा
के
साथ
ही
शांति
के
नोबेल
पुरस्कार
को
लेकर
चल
रही
तमाम
चर्चाओं
पर
विराम
लग
गया
है।
अमेरिका के चार राष्ट्रपतियों को मिल चुका है शांति का नोबेल पुरस्कार
शांति
के
नोबेल
पुरस्कार
के
इतिहास
की
बात
करें
तो
वर्तमान
से
पहले
अमेरिका
के
चार
राष्ट्रपतियों
को
शांति
का
नोबेल
पुरस्कार
मिल
चुका
है।
इसी
कड़ी
में
सबसे
पहला
नाम
अमेरिका
के
पूर्व
राष्ट्रपति
थियोडोर
रूजवेल्ट
का
नाम
आता
है।
अमेरिका
के
पूर्व
राष्ट्रपति
थियोडोर
रूजवेल्ट
को
वर्ष
-1906
में
शांति
का
नोबेल
पुरस्कार
मिला
था।
थियोडोर
रूजवेल्ट
नोबेल
शांति
पुरस्कार
पाने
वाले
पहले
अमेरिकी
राष्ट्रपति
थे।
उन्हें
पोर्ट्समाउथ
की
संधि
के
जरिए
से
रूस
-
जापान
युद्ध
में
मध्यस्थता
के
लिए
यह
पुरस्कार
दिया
गया
था।
उनका
पदक
आज
भी
व्हाइट
हाउस
के
पश्चिमी
विंग
के
रूजवेल्ट
कक्ष
में
रखा
हुआ
है।
वुडरो विल्सन को वर्ष- 1919 में मिला था नोबेल पुरस्कार
अमेरिका
के
28
वें
राष्ट्रपति
,
वुडरो
विल्सन
को
प्रथम
विश्व
युद्ध
को
समाप्त
करने
और
शांति
बनाए
रखने
के
उद्देश्य
से
दुनिया
के
पहले
अंतर
-
सरकारी
संगठन
,
लीग
ऑफ
नेशन
की
स्थापना
में
उनकी
भूमिका
के
लिए
सम्मानित
किया
गया
था।
Nobel Peace Prize 2025
जिमी कार्टर को वर्ष-2002 में मिला था शांति का नोबेल पुरस्कार
अमेरिका
के
39
वें
राष्ट्रपति
,
कार्टर
को
पद
छोडऩे
के
21
साल
बाद
यह
पुरस्कार
मिला।
उन्हें
"
अंतर्राष्ट्रीय
संघर्षों
का
शांतिपूर्ण
समाधान
खोजने
,
लोकतंत्र
और
मानवाधिकारों
को
आगे
बढ़ाने
,
और
आर्थिक
एवं
सामाजिक
विकास
को
बढ़ावा
देने
के
उनके
दशकों
के
अथक
प्रयासों
के
लिए
"
यह
पुरस्कार
दिया
गया।
बराक ओबामा को वर्ष-2009 में मिल चुका है नोबेल पुरस्कार
अपने
राष्ट्रपति
कार्यकाल
के
एक
वर्ष
से
भी
कम
समय
में
अमेरिकी
के
44
वें
राष्ट्रपति
ओबामा
को
अंतर्राष्ट्रीय
कूटनीति
और
लोगों
के
बीच
सहयोग
को
मजबूत
करने
के
उनके
असाधारण
प्रयासों
के
लिए
सम्मानित
किया
गया
,
जिसमें
परमाणु
निरस्त्रीकरण
और
जलवायु
कार्रवाई
की
वकालत
भी
शामिल
है।
भारत के केवल एक नागरिक को मिला है नोबेल शांति पुरस्कार
आपको
बता
दें
कि
भारत
के
नाम
पर
तीन
बार
शांति
का
नोबेल
पुरस्कार
दिया
गया
है।
सही
मायने
में
भारत
के
एकमात्र
मूल
नागरिक
को
ही
शांति
का
नोबेल
पुरस्कार
मिला
है।
वर्ष
-1979
में
भारत
के
नाम
पर
मदर
टेरेसा
को
शांति
का
नोबेल
पुरस्कार
दिया
गया
था।
उसके
बाद
वर्ष
-1989
में
भारत
के
नाम
पर
दलाई
लामा
को
शांति
का
नोबेल
पुरस्कार
दिया
गया
था।
वर्ष
-2014
में
भारत
के
मूल
निवासी
प्रसिद्ध
समाजसेवी
कैलाश
सत्यार्थी
को
शांति
का
नोबेल
पुरस्कार
मिला
था।
Nobel Peace Prize 2025
बताना
जरूरी
है
कि
मदर
टेरेसा
ने
भारत
में
खूब
काम
किया
था
,
किन्तु
वें
अल्बेनिया
की
मूल
निवासी
थीं।
इसी
प्रकार
दलाई
लामा
ने
भी
भारत
में
भरपूर
काम
किया
किन्तु
वे
मूल
रूप
से
चीन
के
रहने
वाले
थे।
इस
प्रकार
भारत
के
नाम
पर
मिले
शांति
के
तीन
नोबेल
पुरस्कारों
में
से
केवल
कैलाश
सत्यार्थी
ही
अकेले
ऐसे
व्यक्ति
हैं
जो
मूल
रूप
से
भारतीय
हैं।
इसी
प्रकार
स्पष्अ
है
कि
केवल
एक
ही
भारतीय
को
शांति
का
नोबेल
पुरस्कार
मिला
है।
Nobel Peace Prize 2025
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