अंतरराष्ट्रीय संकट समूह के विश्लेषक अली वाएज ने खुलासा किया कि ईरानी मिसाइल फैक्ट्रियां “24 घंटे बिना रुके काम कर रही हैं।” सूत्रों के अनुसार, अगर दोबारा जंग छिड़ी तो ईरान एक साथ करीब 2,000 मिसाइलें दागने की तैयारी में है। यह संख्या जून के युद्ध में दागी गई लगभग 500 मिसाइलों से चार गुना ज्यादा है।

मध्यपूर्व (Middle East) एक बार फिर युद्ध की दहलीज पर खड़ा दिखाई दे रहा है। ईरान और इजरायल के बीच जून में हुए 12 दिन के युद्ध के बाद ऐसा माना जा रहा था कि दोनों देशों के बीच तनाव अब थम जाएगा, लेकिन हालात एक बार फिर गरमाने लगे हैं। इस बार मामला सिर्फ बयानों तक सीमित नहीं है। ईरान खुलकर अपने मिसाइल भंडार को दोगुना करने का दावा कर रहा है, जबकि चीन भी चुपचाप अपनी चाल चलने में जुट गया है।
रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक जून में चले 12 दिन के युद्ध में ईरान ने इजरायल पर सैकड़ों मिसाइलें दागी थीं। तब यह माना गया कि उसका मिसाइल भंडार काफी हद तक खत्म हो चुका है। लेकिन अब तेहरान ने दावा किया है कि उसने न सिर्फ अपनी मिसाइल क्षमता बहाल कर ली है, बल्कि उसे कई गुना बढ़ा भी लिया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची का कहना है, “हमारी मिसाइल क्षमता 12 दिन के युद्ध से कहीं आगे निकल चुकी है। दुश्मन अपने किसी भी लक्ष्य में सफल नहीं हो पाया। वहीं रक्षा मंत्री अजीज नसिरजादेह ने भी दोहराया कि ईरान की रक्षा उत्पादन क्षमता अब संख्या और गुणवत्ता दोनों में पहले से बेहतर है।
अंतरराष्ट्रीय संकट समूह के विश्लेषक अली वाएज ने खुलासा किया कि ईरानी मिसाइल फैक्ट्रियां “24 घंटे बिना रुके काम कर रही हैं।” सूत्रों के अनुसार, अगर दोबारा जंग छिड़ी तो ईरान एक साथ करीब 2,000 मिसाइलें दागने की तैयारी में है। यह संख्या जून के युद्ध में दागी गई लगभग 500 मिसाइलों से चार गुना ज्यादा है।
ईरान की रणनीति अब स्पष्ट दिख रही है। कम समय में इतनी अधिक मिसाइलें दागना कि इजरायल की आधुनिक रक्षा प्रणाली “आयरन डोम” भी दबाव में आ जाए। रक्षा विशेषज्ञ बेहनाम बिन तालेब्लू का कहना है - “ईरान ने 12 दिन के युद्ध से कई रणनीतिक सबक सीखे हैं। अब वह मिसाइलों की सटीकता और मारक क्षमता दोनों को बढ़ाने पर ध्यान दे रहा है।
ईरान ने दावा किया है कि उसने पिछले युद्ध में फत्ताह-1 जैसी मध्यम दूरी की मिसाइलें इस्तेमाल की थीं, जो अंतिम चरण में दिशा बदलने की क्षमता रखती हैं। इनके अलावा हाज कासिम और खेबर शेकन जैसी मिसाइलें इतनी तेज गति से वार करती हैं कि इन्हें रोकना मुश्किल होता है।
इजरायल के अनुसार, जून में दागी गई 631 मिसाइलों में से 500 ने उसके क्षेत्र को निशाना बनाया। इनमें से 221 मिसाइलें रोकी गईं और 36 आबादी वाले इलाकों में गिरीं। इजरायल का दावा है कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली की सफलता दर 86 प्रतिशत रही।
मध्यपूर्व की हलचल के बीच चीन भी अपने मिसाइल नेटवर्क का तेजी से विस्तार कर रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, 2020 के बाद से चीन ने अपने रॉकेट फोर्स ठिकानों की संख्या 136 तक पहुंचा दी है, जिनमें से लगभग 60 प्रतिशत सिर्फ पिछले पांच सालों में बने हैं। CNN की रिपोर्ट के अनुसार, सैटेलाइट तस्वीरों में नए कारखाने, बंकर और परीक्षण केंद्र स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। कई ग्रामीण इलाकों को मिसाइल अड्डों में तब्दील किया जा चुका है। विश्लेषकों का मानना है कि यह सब अमेरिका को ताइवान संघर्ष से दूर रखने की रणनीति का हिस्सा है।