14,000 किमी तक अचूक वार पुतिन ने दिखाई व्यूरेवेस्टनिक न्यूक्लियर क्रूज मिसाइल, हिला दी दुनिया की नींव
भारत
चेतना मंच
26 Oct 2025 06:36 PM
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने एक बार फिर दुनिया को अपनी परमाणु शक्ति का अहसास कराया है। पुतिन ने दावा किया है कि रूस ने अपनी व्यूरेवेस्टनिक (9एम730) न्यूक्लियर-पावर्ड क्रूज मिसाइल का सफल परीक्षण कर लिया है। ऐसी मिसाइल जो 14,000 किलोमीटर दूर तक अपने लक्ष्य को भेद सकती है और किसी भी मौजूदा अमेरिकी मिसाइल डिफेंस सिस्टम को निष्प्रभावी कर सकती है। रविवार को मॉस्को में आयोजित कार्यक्रम के दौरान पुतिन ने कहा कि व्यूरेवेस्टनिक रूस की रणनीतिक क्षमताओं को नई ऊंचाई पर ले जाएगी। यह भविष्य की परमाणु रक्षा अवधारणाओं को पूरी तरह बदल देगी। Moscow News :
क्या है व्यूरेवेस्टनिक मिसाइल?
व्यूरेवेस्टनिक (रूसी में अर्थ है स्टॉर्म पेट्रल यानी तूफानी पक्षी) एक न्यूक्लियर-पावर्ड, लो-फ्लाइंग ग्राउंड लॉन्च क्रूज मिसाइल है, जो खुद भी परमाणु ऊर्जा से संचालित होती है और न्यूक्लियर वारहेड ले जाने में सक्षम है। नाटो इसे एसएससी-एक्स-9 स्काईफाल नाम से पहचानता है। यह प्रोजेक्ट पहली बार मार्च 2018 में सामने आया था, जब पुतिन ने अपने सुपर वेपन प्रोग्राम के तहत इसका अनावरण किया था। तब से वे लगातार दावा करते रहे हैं कि यह मिसाइल असीमित रेंज वाली है। यानी यह ग्रह के किसी भी कोने तक हमला कर सकती है।
सफल परीक्षण और दावे
रूस के जनरल स्टाफ प्रमुख वैलेरी जेरासिमोव के अनुसार, 21 अक्टूबर को इस मिसाइल का सफल परीक्षण किया गया।
उनके मुताबिक मिसाइल ने करीब 14,000 किलोमीटर की उड़ान भरी और लगभग 15 घंटे तक हवा में रही। यह पूरी तरह न्यूक्लियर ऊर्जा से संचालित थी। जेरासिमोव ने कहा कि व्यूरेवेस्टनिक मौजूदा सभी मिसाइल डिफेंस सिस्टम को मात देने में सक्षम है। इसकी सबसे बड़ी ताकत इसकी अनलिमिटेड रेंज और साइलेंट आॅपरेशन है।
पश्चिमी देशों को शक
हालांकि, अमेरिका और यूरोपीय रक्षा विशेषज्ञों ने इस दावे पर संदेह जताया है। उनका कहना है कि रूस ने अब तक इस परीक्षण के कोई ठोस सबूत या फुटेज सार्वजनिक नहीं किए हैं। साथ ही, विशेषज्ञों ने यह भी चेतावनी दी है कि न्यूक्लियर-पावर्ड मिसाइल उड़ान के दौरान रेडिएशन लीक का खतरा पैदा कर सकती है, जिससे पर्यावरणीय संकट और सुरक्षा जोखिम दोनों बढ़ सकते हैं। पुतिन का यह ऐलान ऐसे समय में आया है जब रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच मॉस्को और वॉशिंगटन के रिश्ते बेहद तनावपूर्ण हैं। ऐसे में इस मिसाइल का सफल परीक्षण सिर्फ तकनीकी उपलब्धि नहीं बल्कि एक सियासी और सामरिक संदेश भी माना जा रहा है। खासकर अमेरिका और नाटो देशों के लिए।