अमेरिका में नेपाली मूल की ममता काफ्ले की गुमशुदगी और कथित हत्या के मामले में अदालत के भीतर ऐसा घटनाक्रम सामने आया है, जिसने पूरे मुकदमे को चर्चा में ला दिया है। पति नरेश भट्ट की गवाही, दो साल पुराना रहस्य और फॉरेंसिक सबूतों से जुड़े इस मामले में जानिए अब तक की पूरी कहानी।

International News : विदेशों में रह रहे भारतीय मूल के लोगों से जुड़ी घटनाएं अक्सर भारत में भी चर्चा का विषय बन जाती हैं। अमेरिका से सामने आया ऐसा ही एक मामला इन दिनों सुर्खियों में है। भारतीय मूल के नरेश भट्ट पर अपनी नेपाली मूल की पत्नी ममता काफ्ले भट्ट की हत्या का आरोप है। करीब दो साल से लापता ममता के मामले में अमेरिकी अदालत में नरेश की गवाही ने नया मोड़ ला दिया है। नरेश ने स्वीकार किया है कि उसने पत्नी के शव को बिजली से चलने वाली आरी से काटकर टुकड़ों में बांटा और कचरे के बैग में डालकर ठिकाने लगाने की कोशिश की थी। हालांकि, उसने पत्नी की हत्या करने से इनकार किया है। उसका दावा है कि उसने ममता को घर में मृत अवस्था में पाया था और घबराहट में शव को छिपाने का फैसला किया। भारत से हजारों किलोमीटर दूर अमेरिका में चल रहे इस मुकदमे की चर्चा भारतीय मूल के लोगों और नेपाली समुदाय के बीच भी हो रही है। खास बात यह है कि आरोपी भारतीय मूल का है, जबकि उसकी पत्नी नेपाल की रहने वाली थी। अमेरिका के वर्जीनिया में चल रहे इस मामले में ममता का शव आज तक बरामद नहीं हुआ है। अभियोजन पक्ष इसे हत्या का मामला बता रहा है, जबकि नरेश का दावा है कि उसकी पत्नी ने आत्महत्या की थी।
भारतवंशी समुदाय से जुड़े इस सनसनीखेज मामले ने अमेरिका की अदालत में नरेश भट्ट की गवाही ने सबको चौंका दिया है। भारतीय मूल के 39 वर्षीय नरेश भट्ट पर अपनी 28 वर्षीय पत्नी ममता काफ्ले भट्ट की हत्या करने, शव छिपाने और उसके साथ छेड़छाड़ करने के आरोप हैं। यह मामला अमेरिका के वर्जीनिया राज्य के प्रिंस विलियम काउंटी का है। 5 नवंबर 2026 को अदालत में अपनी गवाही के दौरान नरेश ने स्वीकार किया कि उसने पत्नी के शव को काटने के लिए पावर सॉ यानी बिजली से चलने वाली आरी का इस्तेमाल किया था। उसने बताया कि शुरुआत में शव को कचरे के डिब्बे में डालने की कोशिश की गई थी, लेकिन पूरा शव उसमें नहीं समा रहा था। इसके बाद उसने शव के टुकड़े किए और उन्हें कचरे के बैग में डाल दिया। हालांकि, उसने पत्नी की हत्या करने से इनकार किया है।
नरेश भट्ट ने अदालत में बताया कि 29 जुलाई 2024 की रात वह अपनी बेटी के साथ सोने चला गया था। उसकी पत्नी ममता घर के निचले हिस्से में थी। अगले दिन सुबह करीब चार बजे जब वह उठा तो उसे घर में कुछ अजीब गंध महसूस हुई। उसका दावा है कि जब वह बेडरूम की तरफ गया तो ममता जमीन पर पड़ी हुई थी। उसके चेहरे और आसपास उल्टी फैली हुई थी। नरेश के मुताबिक, उल्टी में दवाइयों के कैप्सूल और अन्य पदार्थ दिखाई दे रहे थे। उसने पास में कृषि कार्यों में इस्तेमाल होने वाले जहरीले रसायन सेल्फोस का पैकेट भी देखने की बात कही। नरेश ने दावा किया कि उसने पत्नी को होश में लाने की कोशिश की और करीब 45 मिनट से एक घंटे तक CPR सहित अन्य उपाय किए। इसके बावजूद वह उसे बचा नहीं सका। हालांकि, यह नरेश भट्ट का अदालत में दिया गया बयान है। ममता की मौत का वास्तविक कारण अभी स्थापित नहीं हुआ है।
अदालत में नरेश भट्ट से सबसे अहम सवाल यह पूछा गया कि पत्नी को मृत देखने के बाद उसने पुलिस या आपातकालीन सेवा को फोन क्यों नहीं किया? इस पर उसने कहा कि वह बहुत डर गया था और उसे आशंका थी कि पत्नी की मौत के लिए उसी को जिम्मेदार ठहराया जाएगा। उसके बयान के मुताबिक, उसने शुरुआत में पत्नी के शव को पोटोमैक नदी में फेंकने के बारे में सोचा था। इसके बाद वह अपनी छोटी बेटी को एक परिचित के पास छोड़कर होम डिपो गया। उसने अदालत में स्वीकार किया कि वहां उसका उद्देश्य शव को छिपाने के लिए सामान तलाशना था। बाद में उसने शव को कचरे के डिब्बे में डालने का प्रयास किया, लेकिन शव का आकार बड़ा होने के कारण ऐसा नहीं कर पाया। इसके बाद उसने शव के टुकड़े करने का फैसला किया।
मुकदमे के दौरान नरेश भट्ट ने स्वीकार किया कि उसने अपनी पत्नी के शव को काटने के लिए आरी और चाकू का इस्तेमाल किया था। उसने बताया कि शुरुआत में वह शव के पैरों को अलग करने की कोशिश कर रहा था, लेकिन मानसिक और शारीरिक रूप से ऐसा करना उसके लिए मुश्किल हो रहा था। उसने यह भी बताया कि वह पहले दिन इस प्रक्रिया को पूरा नहीं कर पाया था। बाद में उसने फिर से शव को काटने की कोशिश की और उसे कई कचरे के बैग में रख दिया। अदालत में जब उससे पूछा गया कि क्या उसने शव को इसलिए काटा था ताकि उसे कचरे के डिब्बे में डालकर गायब किया जा सके, तो उसने इसका जवाब हां में दिया। यह स्वीकारोक्ति मुकदमे का एक बड़ा घटनाक्रम है। हालांकि, शव को काटने और हत्या करने के आरोप दोनों अलग-अलग कानूनी सवाल हैं। अदालत को यह तय करना है कि ममता की मौत किन परिस्थितियों में हुई थी।
इस मामले की जांच में सबसे बड़ी चुनौती ममता के शव का बरामद नहीं होना है। जुलाई 2024 में गायब हुई ममता का अब तक कोई पता नहीं चल सका है। अभियोजन पक्ष ने अदालत में कई तरह के सबूत पेश किए हैं। इनमें दंपती के घर से मिले खून के निशान, बाथरूम और बेडरूम में फॉरेंसिक जांच, आरी पर मिले संभावित जैविक साक्ष्य और कचरे के बैग फेंकने से जुड़े सीसीटीवी फुटेज शामिल हैं। जांचकर्ताओं को घर के बेडरूम और बाथरूम में खून के निशान मिले थे। इसके अलावा एक पावर सॉ भी बरामद हुई थी, जिस पर बालों के अंश पाए गए थे। अभियोजन पक्ष का कहना है कि ये सभी सबूत ममता की हत्या और उसके बाद शव को ठिकाने लगाने की साजिश की तरफ इशारा करते हैं। वहीं बचाव पक्ष का कहना है कि अभियोजन पक्ष के पास हत्या साबित करने के लिए पर्याप्त प्रत्यक्ष सबूत नहीं हैं।
मुकदमे के दौरान ममता के भाई महेश काफ्ले ने भी गवाही दी थी। उन्होंने अपनी बहन के वैवाहिक जीवन और नरेश भट्ट के साथ उसके संबंधों को लेकर जानकारी दी। महेश ने बताया कि ममता ने पहले उन्हें एक ऐसी तस्वीर भेजी थी, जिसमें उसकी आंख के आसपास चोट दिखाई दे रही थी। ममता ने इस चोट के लिए अपने पति को जिम्मेदार बताया था। अभियोजन पक्ष ने इस गवाही के जरिए दंपती के बीच तनाव और घरेलू हिंसा के आरोपों को अदालत के सामने रखा। दूसरी तरफ नरेश भट्ट ने पत्नी के साथ मारपीट करने के आरोपों से इनकार किया है।
ममता काफ्ले भट्ट मूल रूप से नेपाल की रहने वाली थीं। वह वर्ष 2021 में अमेरिका आई थीं और वर्जीनिया के यूवीए हेल्थ प्रिंस विलियम मेडिकल सेंटर में नर्स के रूप में काम करती थीं। ममता और नरेश की एक छोटी बेटी भी है। ममता को आखिरी बार 27 जुलाई 2024 को उनके कार्यस्थल पर देखा गया था। 29 जुलाई को उन्होंने नेपाल में अपनी मां से वीडियो कॉल पर बात की थी। इसके बाद उनका फोन और सोशल मीडिया अकाउंट शांत हो गए। 2 अगस्त 2024 को जब ममता लगातार काम पर नहीं पहुंचीं तो उनके सहकर्मियों ने चिंता जताई और पुलिस से संपर्क किया। इसके बाद मामला जांच के दायरे में आया। 5 अगस्त को नरेश ने पत्नी की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। बाद में पुलिस ने जांच के आधार पर 22 अगस्त 2024 को उसे गिरफ्तार कर लिया।
इस मामले में एक महत्वपूर्ण बात यह है कि नरेश भट्ट ने अदालत में हत्या के आरोप से इनकार किया है। उसने शव को काटने और छिपाने की बात स्वीकार की है, लेकिन उसका दावा है कि ममता की मौत आत्महत्या से हुई थी। उसके खिलाफ फर्स्ट डिग्री मर्डर, शव छिपाने और शव के साथ छेड़छाड़ करने के आरोप हैं। उसने हत्या के आरोप स्वीकार नहीं किए हैं और मुकदमा जारी है। 6 नवंबर 2026 तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अदालत ने उसे हत्या का दोषी घोषित नहीं किया है। अब जूरी के सामने अभियोजन पक्ष के सबूतों और नरेश भट्ट के दावों का मूल्यांकन होना बाकी है। भारतवंशियों से जुड़े इस मामले में ममता का शव बरामद नहीं होना भी मुकदमे का अहम पहलू बना हुआ है। अदालत का अंतिम फैसला ही यह स्पष्ट करेगा कि ममता की मौत किन परिस्थितियों में हुई थी और नरेश भट्ट इसके लिए कितना जिम्मेदार है।
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