
बलूचिस्तान के केच जिले में सोमवार की रात एक बार फिर गोलियों की आवाज गूंज उठी। थिसिल टेम्प के तेलकान क्षेत्र में स्थित बलूच कार्यकर्ता जंगयान बलूच के घर पर पाकिस्तान समर्थित संदिग्ध भाड़े के हमलावरों ने धावा बोला।
स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, हमले में किसी के घायल होने की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन यह हमला बलूचिस्तान में लंबे समय से चल रही संगठित हिंसा की एक और कड़ी जोड़ता है। यह पहला मौका नहीं है जब जंगयान बलूच को निशाना बनाया गया हो। उनके घर पर पूर्व में भी कई बार हमले हो चुके हैं। द बलूचिस्तान पोस्ट की बलूची सेवा के मुताबिक, यह हमला देर रात अंजाम दिया गया और इसकी जिम्मेदारी अब तक किसी संगठन ने नहीं ली है। Balochistan
बलूचिस्तान में कथित ‘मौत दस्तों’ की गतिविधियों को लेकर वर्षों से आवाज़ उठती रही है। इन समूहों पर जबरन गायब करने, न्यायेतर हत्याओं और असहमति जताने वालों को निशाना बनाने जैसे गंभीर आरोप लगते रहे हैं। स्थानीय आबादी और मानवाधिकार संगठन बार-बार यह आरोप लगाते रहे हैं कि इन कार्रवाइयों को सरकारी संरक्षण प्राप्त है, लेकिन इन आरोपों पर राज्य की ओर से अब तक कोई संतोषजनक जवाब नहीं आया। Balochistan
इसी बीच कराची से आई एक और कहानी ने बलूचिस्तान की जमीनी हकीकत को एक बार फिर बेपर्दा कर दिया। अमीर बख्श बलूच, जो वर्ष 2014 से लापता हैं, उनके परिवार ने कराची प्रेस क्लब में प्रेस वार्ता कर संघीय सरकार से उनके बारे में सच बताने और यदि कोई आरोप हो तो अदालत में पेश करने की मांग की। प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद उनकी बेटी सदाफ बलूच ने भारी मन से कहा: मेरे पिता को 4 अगस्त 2014 को ग्वादर के कुलांच इलाके से जबरन उठा लिया गया था। तब से लेकर आज तक हम नहीं जानते कि वह कहां हैं, किस हालत में हैं... या क्या वे अब भी जीवित हैं।
सदाफ ने कहा कि परिवार ने सारे संवैधानिक, कानूनी और शांतिपूर्ण रास्ते अपनाए, लेकिन हर जगह से केवल निराशा ही मिली। यह सिर्फ मेरे पिता की गुमशुदगी नहीं है, यह हमारे पूरे परिवार की मानसिक और सामाजिक मृत्यु है। ग्यारह साल हो गए, हर सुबह हम उम्मीद लेकर उठते हैं, और हर रात टूटकर सोते हैं।
सदाफ बलूच ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि उनकी अपील किसी राजनीतिक एजेंडे से नहीं जुड़ी, बल्कि यह एक आम नागरिक — एक बेटी — की अपील है जो न्याय, जवाबदेही और मानवता की उम्मीद लिए खड़ी है। मैं हर रोज़ उम्मीद लेकर उठती हूं और हर रात इस डर में सोती हूं कि शायद मेरे पिता अब कभी लौटकर नहीं आएंगे। यह कोई आंदोलन नहीं, एक इंसानी पीड़ा है। उनके साथ प्रेस वार्ता में मौजूद केंद्रीय बलूच यकजेहती समिति (BYC) की नेता सम्मी दीन बलूच ने भी सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा: अगर अमीर बख्श बलूच ने कोई अपराध किया है, तो उन्हें अदालत में पेश किया जाए। उन्हें वर्षों तक लापता रखना कानून और इंसाफ दोनों का मज़ाक है। उन्होंने कहा कि अब बलूच महिलाओं ने केवल विरोध प्रदर्शनों की भूमिका नहीं, बल्कि प्रतिरोध की अगुवाई करना भी शुरू कर दिया है। Balochistan