नेपाल में रफ्ता-रफ्ता पटरी पर लौट रही आम जिंदगी, हटाया गया कर्फ्यू
भारत
चेतना मंच
13 Sep 2025 11:55 AM
नेपाल एक बड़े संकट और उथल-पुथल भरे दौर से गुजरने के बाद अब धीरे-धीरे शांति और स्थिरता की ओर लौटता दिख रहा है। हालिया हिंसा, आगजनी और भारी विरोध प्रदर्शनों के बाद राजधानी काठमांडू से शनिवार सुबह 5 बजे कर्फ्यू और निषेधाज्ञा हटा ली गई। सेना और प्रशासन ने स्थिति सामान्य होने के संकेत के बाद यह फैसला लिया है। Nepal News
नेपाल को मिली पहली महिला अंतरिम प्रधानमंत्री
देश की कमान अब पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की के हाथों में है जिन्होंने शुक्रवार को अंतरिम प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। सुशीला कार्की नेपाल की पहली महिला हैं जिन्होंने इस पद को संभाला है। उनके शपथ लेते ही आम जनता में एक नई उम्मीद और विश्वास जगा है।स्थानीय निवासी सुमन सिवाकोटी का कहना है, "हम आशा करते हैं कि सुशीला कार्की नेपाल को एक नए युग की ओर ले जाएंगी एक ऐसा युग, जहां विकास और ईमानदारी की जीत हो।"
हिंसा की आग से झुलसी राजधानी
पिछले कुछ हफ्तों से काठमांडू और देश के अन्य हिस्सों में भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन की आग ने विकराल रूप ले लिया था। पुलिस के मुताबिक, इस हिंसा में अब तक 51 लोगों की मौत हो चुकी है जिनमें प्रदर्शनकारी, पुलिसकर्मी, कैदी और अन्य नागरिक शामिल हैं। सबसे ज्यादा असर नेपाल की होटल इंडस्ट्री पर पड़ा है। करीब दो दर्जन होटलों में तोड़फोड़, लूटपाट और आगजनी के कारण इस सेक्टर को अब तक 25 अरब नेपाली रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है।
हिंसा से जुड़े वीडियो और सबूत भेजें
नेपाल पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि अगर किसी के पास हिंसा, आगजनी या लूटपाट से जुड़े वीडियो या सबूत हैं तो वे पुलिस के आधिकारिक ईमेल पर साझा करें। इसका उद्देश्य दोषियों की पहचान कर उन्हें कानून के दायरे में लाना है। इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत हुई जब प्रधानमंत्री के. पी. शर्मा ओली ने सोमवार को प्रदर्शन के बाद इस्तीफा दिया। प्रदर्शनकारी उनके कार्यालय में घुस गए थे और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज बुलंद कर रहे थे। उनकी मांग थी कि सरकार जिम्मेदारी ले और ईमानदारी से जवाबदेही सुनिश्चित करे। हालांकि ओली के इस्तीफे के बाद भी स्थिति नहीं सुधरी। प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन, राष्ट्रपति कार्यालय, प्रधानमंत्री आवास और कई सरकारी व राजनीतिक कार्यालयों में तोड़फोड़ और आगजनी की।
इन प्रदर्शनों में लगभग 1,700 लोग घायल हुए, जिनमें से 1,000 से अधिक लोग अब ठीक होकर घर लौट चुके हैं। शुक्रवार को कई मृतकों का अंतिम संस्कार काठमांडू के पशुपतिनाथ मंदिर परिसर के आर्यघाट में किया गया। पुलिस अब टूटी हुई चौकियों और थानों की मरम्मत कर उन्हें फिर से सक्रिय कर रही है। काठमांडू घाटी में धीरे-धीरे सुरक्षा व्यवस्था पटरी पर लौट रही है।
नई शुरुआत की उम्मीद
नेपाल के लोग इस संकट के बाद एक साफ-सुथरी, पारदर्शी और जवाबदेह सरकार की उम्मीद कर रहे हैं। सुशीला कार्की के नेतृत्व में उन्हें लगता है कि देश भ्रष्टाचार मुक्त और विकासशील रास्ते पर आगे बढ़ेगा। नेपाल ने हाल ही में एक गहरा जख्म झेला है लेकिन अब लगता है कि नई सुबह की शुरुआत हो चुकी है। Nepal News