Nepal Latest Update: नेपाल और तिब्बत को मिलाकर 1,468 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। खराब सड़कों, टूटे पुलों और लगातार बने हुए बाढ़ के खतरे के कारण राहत और बचाव दलों के लिए कई इलाकों तक पहुंचना अभी भी मुश्किल बना हुआ है।

नेपाल और तिब्बत में अचानक आई भीषण बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। तेज पानी, कीचड़ और मलबे के सैलाब ने कई गांवों और कस्बों को अपनी चपेट में ले लिया। घर, सड़कें और पुल बह गए जबकि कई इलाकों का संपर्क पूरी तरह टूट गया है। इस आपदा में नेपाल में अब तक 469 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। वहीं नेपाल और तिब्बत को मिलाकर 1,468 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। खराब सड़कों, टूटे पुलों और लगातार बने हुए बाढ़ के खतरे के कारण राहत और बचाव दलों के लिए कई इलाकों तक पहुंचना अभी भी मुश्किल बना हुआ है।
नेपाल-तिब्बत सीमा के पास ग्लेशियर टूटने के बाद चट्टानें खिसकने और मलबा गिरने की घटनाएं हुईं। इसके बाद पानी, मिट्टी और पत्थरों का तेज बहाव मध्य नेपाल की तरफ बढ़ गया। अचानक आए इस सैलाब ने रास्ते में आने वाली बस्तियों को भारी नुकसान पहुंचाया। कई मकान और वाहन पानी में बह गए जबकि सड़कें और पुल टूटने से कई इलाके बाकी हिस्सों से कट गए। जलविद्युत परियोजनाओं और दूसरे जरूरी ढांचे को भी नुकसान पहुंचा है। नेपाल पुलिस के अनुसार, प्रभावित इलाकों से अब तक बड़ी संख्या में लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। करीब 50 विदेशी नागरिकों समेत 796 लोगों को हेलीकॉप्टर के जरिए बाहर निकाला गया जबकि 796 अन्य लोगों को सड़क मार्ग से सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया गया है।
पहली आपदा के बाद अब एक नई चिंता सामने आ गई है। भोटेकोशी नदी के ऊपरी हिस्से में एक प्राकृतिक अवरोध के कारण नई झील बन गई है। अधिकारियों को डर है कि अगर यह अवरोध टूट गया तो बड़ी मात्रा में पानी अचानक नीचे की ओर आ सकता है। इससे पहले से प्रभावित निचले इलाकों में एक बार फिर बाढ़ की स्थिति पैदा हो सकती है। चीनी अधिकारियों के अनुमान के मुताबिक गुरुवार सुबह तक इस झील में करीब 20 लाख घन मीटर पानी जमा हो चुका था। अगले तीन दिनों में इसमें करीब 30 लाख घन मीटर और पानी पहुंचने की आशंका जताई गई है। नेपाल के जल विज्ञान और मौसम विज्ञान विभाग ने भोटेकोशी और त्रिशूली नदी के आसपास रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और नदी किनारे से दूर रहने की सलाह दी है।
बाढ़ के बाद नेपाल में 910 लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। राहत दल कीचड़ और मलबे से भरे इलाकों में लगातार तलाश अभियान चला रहे हैं। कई परिवार अपने लापता रिश्तेदारों की जानकारी लेने के लिए अस्पतालों और राहत केंद्रों के चक्कर लगा रहे हैं। चितवन में अब तक 137 शव बरामद किए गए हैं, जो प्रभावित जिलों में सबसे ज्यादा हैं। इसके अलावा रसुवा, नुवाकोट, धादिंग, गोरखा, तनहूं और नवलपरासी से भी शव मिले हैं। नेपाल सेना के 44, नेपाल पुलिस के 28 और सशस्त्र पुलिस बल के 13 जवानों के भी लापता होने की जानकारी दी गई है।
बाढ़ और मलबे की इस तबाही का असर तिब्बत में भी हुआ है। अधिकारियों के मुताबिक वहां 558 लोग अब तक लापता हैं। नेपाल के 910 और तिब्बत के 558 लोगों को मिलाकर सीमा के दोनों ओर लापता लोगों की संख्या 1,468 हो गई है। चीन ने भी प्रभावित क्षेत्र में बचाव दल भेजे हैं। संचार और खोज उपकरणों से लैस एक टीम ग्यिरोंग पहुंची है, जहां नदी के ऊपरी हिस्से में बने प्राकृतिक अवरोध की स्थिति का जायजा लिया जा रहा है। चीन की सेना ने भी राहत और बचाव अभियान में मदद के लिए एक दल तैनात किया है।
इस प्राकृतिक आपदा के बाद भारत सरकार भी नेपाल और तिब्बत में मौजूद भारतीय नागरिकों को लेकर लगातार जानकारी जुटा रही है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक करीब 290 भारतीय नागरिकों से अभी संपर्क नहीं हो पाया है। उनका पता लगाने और सुरक्षित निकालने के लिए स्थानीय अधिकारियों और दूसरे संबंधित विभागों के साथ संपर्क किया जा रहा है। अब तक 84 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। इनमें त्रिशूली-1 जलविद्युत परियोजना में काम करने वाले 63 कर्मचारी और तमिलनाडु के 21 लोग शामिल हैं। तिब्बत में मौजूद करीब 200 भारतीय नागरिकों ने भी सुरक्षित बाहर निकालने के लिए मदद मांगी है।
भारत ने नेपाल में राहत अभियान के लिए मानवीय सहायता भी भेजी है। बुधवार को 10 टन राहत सामग्री भेजने के बाद गुरुवार को एक सैन्य परिवहन विमान के जरिए 37.5 टन और सहायता सामग्री, दवाएं और जरूरी खाद्य सामग्री भेजी गई। इस तरह नेपाल को अब तक कुल 47.5 टन राहत सामग्री भेजी जा चुकी है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने नेपाल और चीन में मौजूद भारतीय राजदूतों के साथ बातचीत कर स्थिति की जानकारी ली। भारतीय अधिकारियों की ओर से नेपाल सरकार, राज्य सरकारों, टूर ऑपरेटरों और अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा जा रहा है।
बाढ़ ने नेपाल के परिवहन ढांचे को भी बुरी तरह प्रभावित किया है। नुवाकोट के बेत्रावती से रसुवागढ़ी तक करीब 42 किलोमीटर लंबी सड़क कई जगह क्षतिग्रस्त हो गई है। कई कंक्रीट पुल भी बह गए हैं। नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार बाढ़ में 35 सड़क पुल, 45 सस्पेंशन पुल और करीब 40 किलोमीटर सड़क को नुकसान पहुंचा है। इससे राहत दलों के लिए प्रभावित इलाकों तक पहुंचना मुश्किल हो रहा है। धादिंग में गलछी-बैरेनी सड़क को दोबारा खोलने की कोशिश की जा रही है क्योंकि यह काठमांडू और नेपाल के दूसरे हिस्सों के बीच एक अहम संपर्क मार्ग है।
आपदा के बाद अस्पतालों में भी बड़ी संख्या में लोग अपने परिजनों की तलाश में पहुंच रहे हैं। काठमांडू के त्रिभुवन विश्वविद्यालय शिक्षण अस्पताल में बचाए गए लोगों और लाए गए शवों की जानकारी प्रदर्शित की गई है। लापता लोगों की जानकारी दर्ज करने के लिए अलग काउंटर भी बनाए गए हैं। चितवन के भरतपुर अस्पताल में भी परिवार अपने लोगों की जानकारी लेने पहुंच रहे हैं। लगातार शव मिलने के कारण अधिकारियों के सामने उन्हें सुरक्षित रखने की चुनौती भी बढ़ गई है। राहत और बचाव दलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती मलबे और खराब संपर्क वाले इलाकों में फंसे लोगों तक पहुंचना है।
बाढ़ प्रभावित रसुवा जिले में फंसे 27 विदेशी पर्यटकों को भी सुरक्षित निकाल लिया गया है। इनमें 11 भारतीय, चार दक्षिण कोरियाई, दो इतालवी और दो अमेरिकी नागरिक शामिल हैं। बाकी आठ लोगों की राष्ट्रीयता की पुष्टि नहीं हो सकी है। नेपाल सेना ने इन सभी को हेलीकॉप्टर की मदद से काठमांडू पहुंचाया। नेपाल पर्यटन बोर्ड के मुताबिक प्रभावित भारतीय पर्यटकों में कई लोग तिब्बत में कैलाश मानसरोवर और नेपाल के बागमती क्षेत्र में गोसाईंकुंड की यात्रा पर गए थे।
नेपाल में बचाव अभियान लगातार जारी है लेकिन टूटे रास्तों, बह चुके पुलों और भारी मलबे के कारण राहत टीमों की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं। दूसरी तरफ पहाड़ी इलाके में बनी नई झील ने एक और बाढ़ का खतरा पैदा कर दिया है। ऐसे में प्रशासन नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को लगातार सतर्क कर रहा है। फिलहाल सुरक्षाकर्मी, स्थानीय प्रशासन और बचाव दल नदी किनारों, मलबे और अलग-थलग पड़ी बस्तियों में लोगों की तलाश कर रहे हैं। तबाही का पूरा आंकड़ा सामने आने में अभी समय लग सकता है लेकिन अब तक के आंकड़े बता रहे हैं कि नेपाल और तिब्बत ने हाल के वर्षों की सबसे गंभीर प्राकृतिक आपदाओं में से एक का सामना किया है।
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