
काठमांडू से लेकर पोखरा और वीरगंज तक नेपाल इस समय एक ऐसे दौर से गुजर रहा है, जिसे वैश्विक मीडिया “Gen-Z विद्रोह” करार दे रहा है। भ्रष्टाचार, सत्ता के दुरुपयोग और राजनीतिक अस्थिरता से तंग आ चुके युवाओं ने सोशल मीडिया प्रतिबंध को चिंगारी बनाकर सड़कों पर उतरने का फैसला किया। प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के इस्तीफे के बाद भी हालात सामान्य नहीं हुए हैं। सेना को हवाई अड्डे तक की कमान संभालनी पड़ी है और राजधानी में तनावपूर्ण शांति पसरी हुई है। Nepal Protests
गार्जियन (ब्रिटेन): अखबार ने लिखा कि यह आंदोलन केवल सोशल मीडिया बैन का विरोध नहीं था, बल्कि दशकों से चले आ रहे भ्रष्टाचार और धीमी अर्थव्यवस्था का परिणाम है। बड़ी संख्या में नेपाली युवाओं को रोज़गार के लिए विदेश पलायन करना पड़ रहा है। इस बीच नेताओं के बच्चों—जिन्हें “नेपो किड्स” कहा जा रहा है—की आलीशान जिंदगी की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रहीं, जिसने जनाक्रोश और भड़का दिया।
वॉशिंगटन पोस्ट (अमेरिका): इस अखबार ने रिपोर्ट किया कि नेपाल में पुलिस कार्रवाई के दौरान 19 लोगों की मौत हो चुकी है। ज़्यादातर प्रदर्शनकारी युवा हैं, जो सरकार की नीतियों से बेहद नाराज थे। अखबार ने आंदोलन को भ्रष्टाचार और दमनकारी नीतियों के खिलाफ युवाओं का गुस्सा बताया।
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट (हांगकांग): अखबार के मुताबिक, काठमांडू में कर्फ्यू तोड़कर प्रदर्शनकारियों का संसद भवन तक पहुंचना इस बात का सबूत है कि जनता का असंतोष गहराता जा रहा है। रिपोर्ट में यह भी लिखा गया कि नेपाल की 43 प्रतिशत आबादी युवा है, लेकिन बेरोजगारी और कम आय के चलते वे हताश हो रहे हैं।
अल जज़ीरा (कतर): इस चैनल ने अपने कवरेज में कहा कि शुरुआती दौर में आंदोलन सांस्कृतिक कार्यक्रमों और शांतिपूर्ण प्रदर्शनों तक सीमित था। लेकिन राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता और बाहरी तत्वों के शामिल होने के बाद हिंसा भड़क उठी। रिपोर्ट में उन छात्रों का भी ज़िक्र है जो यूनिफॉर्म में ही गोलीबारी का शिकार हुए।
द डेली स्टार (बांग्लादेश): अखबार ने “नेपो किड्स” पर खास रिपोर्ट लिखी। उसने बताया कि कैसे “नेपो बेबी” शब्द से प्रेरित होकर नेपाल के यूजर्स ने नेताओं के बच्चों की आलीशान जीवनशैली को सोशल मीडिया पर उजागर किया। उनके महंगे विदेशी दौरे और शाही खर्चों ने आम जनता की नाराज़गी को भड़काया।
शिन्हुआ (चीन): चीन की सरकारी एजेंसी ने सिर्फ ओली के इस्तीफे पर संक्षिप्त रिपोर्ट दी और बड़े राजनीतिक विश्लेषण से परहेज किया। Nepal Protests