हिंसा की भेंट चढ़े नेपाल के कई शहर, अब तक 20 की मौत, 250 से ज्यादा हुए घायल
भारत
चेतना मंच
02 Dec 2025 01:07 AM
नेपाल में सोशल मीडिया पर प्रतिबंध के खिलाफ शुरू हुआ युवाओं का गुस्सा अब हिंसक आंदोलन में तब्दील हो गया है। सोमवार को राजधानी काठमांडू सहित देशभर के कई शहरों में प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर उतरकर सरकार के खिलाफ जमकर विरोध किया। हालात इतने बिगड़े कि हजारों की संख्या में गुस्साए युवा संसद परिसर में घुस गए। हालात काबू करने के लिए पुलिस को आंसू गैस, पानी की बौछारों और अंत में गोलीबारी तक करनी पड़ी। पुलिस की फायरिंग में अब तक कम से कम 20 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है जबकि तीन पत्रकारों समेत 250 से ज्यादा घायल हुए हैं। Kathmandu News
संसद परिसर बना रणभूमि, नेपाल के कई शहर हिंसा की भेंट चढ़े
प्रदर्शनकारी युवा संसद भवन के बाहर लगे पुलिस बैरिकेड्स को तोड़ते हुए जबरन न्यू बानेश्वर स्थित संघीय संसद परिसर में घुस गए। शुरुआत में प्रदर्शन शांतिपूर्ण थी लेकिन जब पुलिस ने उन्हें हटाने के लिए बल प्रयोग किया तो हालात बेकाबू हो गए। जवाब में प्रदर्शनकारियों ने जमकर नारेबाजी की और कुछ जगहों पर पत्थरबाजी भी की। नेपाल के कई शहर हिंसा की भेंट चढ़ गए हैं, और अब तक 20 लोगों की मौत हो चुकी है और 250 से ज्यादा लोग घायल हो गए हैं।
पुलिस और सेना ने संभाला मोर्चा
पुलिस ने भीड़ को काबू में करने के लिए पहले आंसू गैस और फिर रबर की गोलियों का इस्तेमाल किया, लेकिन जब हालात और बिगड़ने लगे तो सीधी गोलीबारी शुरू कर दी गई। इसके बाद सेना को मैदान में उतारा गया। पूरे इलाके में कर्फ्यू लगा दिया गया है और इंटरनेट सेवाएं भी बंद कर दी गई हैं। प्रदर्शन के दौरान गोली लगने से तीन पत्रकार घायल हो गए हैं। इनमें वरिष्ठ पत्रकार श्याम श्रेष्ठ की हालत गंभीर बताई जा रही है जिन्हें सिविल हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है।
क्यों भड़के युवा?
नेपाल सरकार ने 4 सितंबर को बड़ा कदम उठाते हुए फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब, वॉट्सऐप, रेडिट और X समेत 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बैन लगा दिया था। सरकार का तर्क है कि ये कंपनियां नेपाल में रजिस्ट्रेशन नहीं करवा रही हैं और देश में डिजिटल अराजकता को बढ़ावा दे रही हैं। सरकार की शर्त है कि जब तक ये कंपनियां नेपाल में ऑफिस नहीं खोलतीं और नियमों के तहत पंजीकरण नहीं करातीं तब तक बैन जारी रहेगा। फिलहाल सिर्फ टिकटॉक, वाइबर, निम्बज, विटक और पोपो लाइव ने ही नेपाल में अपने ऑफिस पंजीकृत कराए हैं।
प्रधानमंत्री ओली की सख्त चेतावनी
प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने प्रदर्शनकारियों को चेतावनी देते हुए कहा है कि, युवाओं को समझना होगा कि हर आजादी की एक कीमत होती है।” ओली सरकार का कहना है कि वह सोशल मीडिया पर नियंत्रण के बिना देश को अराजकता का अखाड़ा नहीं बनने देगी।
Gen-Z यानी जनरेशन Z वो युवा हैं जो 1997 से 2012 के बीच जन्मे हैं। ये पीढ़ी इंटरनेट और डिजिटल दुनिया में पली-बढ़ी है। सोशल मीडिया इनके जीवन का अहम हिस्सा है। ये युवा इंस्टाग्राम, यूट्यूब, टिकटॉक जैसे प्लेटफॉर्म पर सबसे ज्यादा सक्रिय रहते हैं। ये खुद को खुले विचारों, क्रिएटिविटी और सोशल जस्टिस के लिए खड़ा होने वाली पीढ़ी मानते हैं। फिलहाल काठमांडू सहित देशभर में भारी तनाव बना हुआ है। सेना की तैनाती और इंटरनेट बंदी के बीच ये सवाल उठ रहा है कि क्या सरकार और युवा पीढ़ी के बीच टकराव और गहराएगा या कोई समाधान निकलेगा? Kathmandu News