इस बात पर Nepal में भड़का बवाल, सामने आई सबसे बड़ी वजह!
भारत
चेतना मंच
09 Sep 2025 04:41 PM
नेपाल में जेन-जी के गुस्से ने एक बड़ा विद्रोह रूप ले लिया है जो अब तक थमने का नाम नहीं ले रहा। यह आंदोलन सोशल मीडिया पर #NepoKid और #NepoChild जैसे हैशटैग से शुरू हुआ, जो नेपाल के राजनीतिक अभिजात वर्ग और उनके बच्चों की लग्जरी जिंदगी पर सवाल उठाने लगा। इस आंदोलन की शुरुआत 25 अगस्त को तब हुई जब नेपाल सरकार ने देश में विदेशी सोशल मीडिया कंपनियों को पंजीकरण कराने का आदेश दिया। कंपनियों के इस आदेश को पूरा न करने पर 4 सितंबर को फेसबुक, ट्विटर (X), यूट्यूब, इंस्टाग्राम, व्हाट्सऐप समेत 26 प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बैन लगा दिया गया और इंटरनेट की गति भी धीमी कर दी गई। Nepal Protests
जेनरेशन Z में भड़क उठी नाराजगी
सोशल मीडिया बैन के बाद खासकर युवा वर्ग और जेनरेशन Z में नाराजगी भड़क उठी। युवा वर्ग ने सोशल मीडिया के जरिए नेताओं के बच्चों की महंगी कारें, ब्रांडेड कपड़े और विदेशी छुट्टियों की तस्वीरें साझा करते हुए भ्रष्टाचार और राजनीतिक अभिजात वर्ग की विलासिता के खिलाफ आवाज बुलंद की। इसी गुस्से ने 7 सितंबर को #NoMoreCorruption और #WakeUpChallenge जैसे हैशटैग के जरिए 8 सितंबर को संसद के पास बानेश्वर में विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया, जो बड़ी संख्या में युवाओं को एकजुट करने में सफल रहा।
8 सितंबर को विरोध इतना तीव्र हो गया कि प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हिंसक संघर्ष हुआ, जिसमें 14 प्रदर्शनकारी मारे गए और 200 से ज्यादा घायल हुए। इस हिंसा के बाद सरकार पर दबाव बढ़ा और कई मंत्रियों ने इस्तीफा दे दिया। विरोध प्रदर्शन का केंद्र भ्रष्टाचार के खिलाफ जवाबदेही और राजनीतिक अभिजात वर्ग की विलासिता पर रोक लगाने की मांग बन गया। दबाव बढ़ने पर सरकार ने 9 सितंबर को सोशल मीडिया पर लगाए गए प्रतिबंध हटा लिए, लेकिन विरोध अभी भी जारी है। प्रदर्शनकारी अब केवल सोशल मीडिया बैन नहीं बल्कि पूरे भ्रष्टाचार तंत्र के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं। यह आंदोलन नेपाल की राजनीति में एक नई चेतना और बदलाव की उम्मीद जगाता दिख रहा है। Nepal Protests