कौन है सुदन गुरुंग? जिसने सोशल मीडिया बैन को बना दिया जनक्रांति
भारत
चेतना मंच
09 Sep 2025 11:06 AM
नेपाल की सड़कों पर गूंजती आवाजें, उठी हुई मुट्ठियां और जलते हुए पोस्टर... यह महज एक विरोध नहीं था बल्कि एक पीढ़ी का विद्रोह था और इस विद्रोह के केंद्र में था एक नाम सुदन गुरुंग। 36 वर्षीय सुदन गुरुंग वही युवा हैं जिसने 8 सितंबर को नेपाल की GenZ पीढ़ी को एकजुट किया और भ्रष्टाचार, तानाशाही और राजनीतिक अभिजात्य वर्ग के खिलाफ आवाज बुलंद करने का आह्वान किया। Sudan Gurang
सितंबर 8 सिर्फ एक तारीख नहीं...
8 सितंबर की सुबह जब नेपाल की राजधानी काठमांडू और अन्य शहरों की सड़कों पर हजारों छात्र-छात्राएं उतर आए तो यह किसी नेता की रैली नहीं थी, यह युवा वर्ग की आत्मा की पुकार थी। सुदन गुरुंग ने आंदोलन से पहले इंस्टाग्राम पर लिखा था, “भाइयों और बहनों सितंबर 8 सिर्फ एक तारीख नहीं है। ये वो दिन है जब हम कहेंगे अब बहुत हो गया। हम अपनी आवाज उठाएंगे, मुट्ठियां भीचेंगे और उन लोगों को ताकत दिखाएंगे जो खुद को अजेय समझते हैं।”
कौन हैं सुदन गुरुंग?
एक दशक पहले सुदन गुरुंग इवेंट मैनेजमेंट की दुनिया में सक्रिय था, पार्टीज और आयोजनों के बीच उसकी पहचान एक 'अर्बन कूल' युवक के तौर पर थी। लेकिन 2015 के विनाशकारी भूकंप ने उसकी सोच और जीवन की दिशा दोनों बदल दी। इसी साल सुदन गुरुंग ने हामी नेपाल नामक एक गैर-लाभकारी संगठन की नींव रखी। यह संगठन आज आपदा राहत, सामाजिक सहायता और युवा सशक्तिकरण के लिए जाना जाता है। इसे 2020 में आधिकारिक रूप से रजिस्टर किया गया।
क्यों उबला GenZ का गुस्सा?
सरकार द्वारा 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बैन लगाने के बाद जेन-Z का गुस्सा उबल पड़ा। गुरुंग ने इसी गुस्से को दिशा दी। उन्होंने इंस्टाग्राम, डिस्कॉर्ड और वीपीएन जैसे माध्यमों से हजारों छात्रों और युवाओं को जोड़ा। सुदन गुरुंग की 27 अगस्त को एक पोस्ट वायरल हुई जिसमें उन्होंने लिखा, "अगर हम खुद को बदलें तो देश खुद बदल जाएगा।" सुदन ने युवाओं को समझाया कि यह सरकार नेपो बेबीज (पारिवारिक पहुंच से बने नेता) और राजनीतिक अभिजात्य वर्ग की है जो आम नागरिकों की आवाज को दबा रही है।
20 मौतें, इस्तीफा और कर्फ्यू
8 सितंबर को काठमांडू सहित कई शहरों में हुए प्रदर्शन अचानक हिंसक हो गए। संसद भवन के पास पहुंचे प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने आंसू गैस, रबर बुलेट और गोलियां चलाईं जिसमें अब तक 20 लोगों की मौत और 300 से अधिक घायल होने की पुष्टि हो चुकी है। हालात काबू से बाहर होते देख, सरकार ने सोशल मीडिया बैन हटाया और गृह मंत्री रमेश लेखक ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे दिया। फिलहाल काठमांडू और अन्य प्रमुख शहरों में कर्फ्यू लागू है।
सुदन गुरुंग का कहना है कि यह सिर्फ एक आंदोलन नहीं बल्कि एक मानसिक क्रांति है। उनका उद्देश्य युवाओं को यह अहसास दिलाना है कि लोकतंत्र का मतलब सिर्फ वोट देना नहीं बल्कि जिम्मेदारी लेना भी है। वे कहते हैं, “ये हमारी लड़ाई है। ये हमसे शुरू होती है। और हम ही इसे अंजाम तक पहुंचाएंगे।” Sudan Gurang