दक्षिण चीन सागर में भारत की दस्तक से बौखलाया चीन, फिलीपींस संग मिलिट्री ड्रिल से बदले समीकरण
भारत
चेतना मंच
29 Nov 2025 09:06 PM
New Delhi/Manila : भारत ने पहली बार चीन के प्रभाव वाले दक्षिण चीन सागर में अपनी सैन्य ताकत का ऐसा प्रदर्शन किया है, जिसने बीजिंग की चिंताओं को बढ़ा दिया है। फिलीपींस के साथ भारतीय नौसेना की संयुक्त नौसैनिक युद्धाभ्यास ने न सिर्फ क्षेत्रीय संतुलन को नए सिरे से परिभाषित किया, बल्कि चीन को यह संदेश भी दे दिया कि भारत अब केवल सीमाओं तक सीमित रहने वाला देश नहीं है।
चीनी क्षेत्र में भारत की 'प्रोजेक्शन पावर'
भारतीय युद्धपोत आईएनएस दिल्ली, टैंकर आईएनएस शक्ति और आईएनएस किल्टन ने फिलीपींस की नौसेना के साथ संयुक्त सैन्य अभ्यास किया, जो फिलीपींस के विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) में संपन्न हुआ। इस दौरान दोनों देशों ने समुद्री सुरक्षा, आपसी तालमेल, हमले की प्रतिक्रिया और बचाव अभियानों पर फोकस किया। यह ड्रिल ऐसे वक्त में हुई जब दक्षिण चीन सागर में चीन की दादागिरी को लेकर कई देश पहले से असहज हैं। भारत की इस सैन्य मौजूदगी ने चीन के लिए यह साफ कर दिया कि अब वह अकेले नहीं खेल रहा।
भारत के कदम से बौखलाया ड्रैगन
चीन ने भारत-फिलीपींस अभ्यास को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा कि समुद्री विवादों का समाधान केवल शामिल पक्षों के बीच होना चाहिए और तीसरे पक्ष का दखल अस्वीकार्य है। वहीं चीन की सदर्न थिएटर कमांड ने भी भारत की इस उपस्थिति को क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा बताया है। चीन की बौखलाहट इतनी बढ़ी कि उसने फिलीपींस को "उपद्रवी" देश तक कह दिया और चेतावनी दी कि भविष्य में कोई भी उकसावे की कार्रवाई हुई तो कड़ा जवाब मिलेगा।
क्यों खफा है चीन?
दरअसल, चीन दक्षिण चीन सागर पर अपना संप्रभु दावा जताता है, जबकि फिलीपींस, वियतनाम, मलेशिया और इंडोनेशिया जैसे देश इसे अस्वीकार करते रहे हैं। फिलीपींस ने तो अंतरराष्ट्रीय ट्रिब्यूनल से इस पर फैसला भी करवाया, जिसमें चीन के दावों को खारिज कर दिया गया। लेकिन बीजिंग अब तक उस निर्णय को नहीं मानता। अब जब भारत ने इस सामरिक क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी दर्ज कराई है, तो यह बीजिंग के लिए एक रणनीतिक झटका है। यह कदम न सिर्फ भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका को दर्शाता है, बल्कि इंडो-पैसिफिक रणनीति में उसकी निर्णायक उपस्थिति का भी संकेत देता है।