कॉलेज ड्रॉपआउट से शिक्षा में बदलाव की मिसाल कैसे बनी सफीना हुसैन
भारत
चेतना मंच
01 Sep 2025 03:47 PM
कभी खुद पढ़ाई बीच में छोड़नी पड़ी थी, लेकिन आज वही महिला करोड़ों बच्चियों की जिंदगी रोशन कर रही है। हम बात कर रहे हैं सफीना हुसैन की, जो एजुकेट गर्ल्स फाउंडेशन की संस्थापक हैं। सफीना और उनके संगठन को अब एशिया का सबसे बड़ा सम्मान रेमन मैग्सेसे अवार्ड 2025 मिलने जा रहा है। इसे एशिया का नोबेल भी कहा जाता है। खास बात यह है कि पहली बार किसी गैर सरकारी संगठन को यह प्रतिष्ठित अवार्ड दिया जा रहा है। New Delhi News :
20 लाख बच्चियों को स्कूल तक पहुँचाया
साल 2007 में शुरू हुए एजुकेट गर्ल्स फाउंडेशन ने अब तक 20 लाख बच्चियों को स्कूल में दाखिला दिलवाया है। राजस्थान के गांवों से शुरुआत करने वाले इस अभियान ने धीरे-धीरे यूपी, बिहार और मध्य प्रदेश तक अपनी जड़ें फैला दीं। संगठन आज 30 हजार गांवों में काम कर रहा है और 77 हजार गर्ल लीडर्स तैयार कर चुका है, जो खुद पढ़ाई करने के बाद अन्य लड़कियों को स्कूल से जोड़ने का काम करती हैं। रेमन मैग्सेसे अवार्ड समिति ने घोषणा की है कि यह अवार्ड 7 नवंबर 2025 को फिलीपींस की राजधानी मनीला में प्रदान किया जाएगा। संगठन को यह सम्मान लड़कियों की शिक्षा के क्षेत्र में असाधारण योगदान और जमीनी स्तर पर किए गए काम के लिए दिया जा रहा है।
कौन हैं सफीना हुसैन?
54 वर्षीय सफीना हुसैन का जन्म नई दिल्ली में हुआ। वह मशहूर बॉलीवुड अभिनेता युसुफ हुसैन की बेटी और फिल्म निर्माता हंसल मेहता की पत्नी हैं। सफीना ने **लंदन स्कूल आॅफ इकोनॉमिक्स** से पढ़ाई की, लेकिन इस मुकाम तक पहुँचने का सफर आसान नहीं था। वह खुद तीन साल तक कॉलेज ड्रॉपआउट रहीं और अपनी चाची की मदद से पढ़ाई दोबारा शुरू कर पाईं। शायद यही वजह है कि वह बच्चियों की शिक्षा को लेकर इतनी संवेदनशील हैं।
क्यों है यह उपलब्धि खास?
एजुकेट गर्ल्स ने न सिर्फ बच्चियों को स्कूल से जोड़ा, बल्कि डेवलपमेंट इम्पैक्ट बॉन्ड जैसे इनोवेटिव मॉडल लाकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान बनाई। यही वजह है कि संगठन को आज शेयर मार्केट में भी लिस्टेड दर्जा मिला है। रेमन मैग्सेसे अवार्ड जीतकर सफीना हुसैन और उनकी टीम ने साबित कर दिया है कि एक महिला की जिद और संघर्ष करोड़ों बच्चियों का भविष्य बदल सकता है। New Delhi News