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पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर पैदा हुई अनिश्चितता के बीच भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर बड़ा और दीर्घकालिक कदम उठाने की तैयारी में है।

West Asia Crisis : पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर पैदा हुई अनिश्चितता के बीच भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर बड़ा और दीर्घकालिक कदम उठाने की तैयारी में है। देश अब ओमान से सीधे गहरे समुद्री मार्ग के जरिए प्राकृतिक गैस पाइपलाइन जोड़ने की महत्वाकांक्षी योजना पर काम कर रहा है, जिसकी अनुमानित लागत करीब 40,000 करोड़ बताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार, यह परियोजना सफल होने पर आने वाले कई दशकों तक भारत को स्थिर और निर्बाध गैस आपूर्ति सुनिश्चित कर सकती है। साथ ही, यह कदम भारत की खाड़ी देशों पर निर्भरता और एलएनजी के स्पॉट मार्केट से होने वाली अस्थिरता को भी काफी हद तक कम करेगा। West Asia Crisis
वर्तमान में भारत अपनी गैस जरूरतों के लिए मुख्य रूप से खाड़ी देशों से आयात पर निर्भर है। लेकिन क्षेत्रीय तनाव और आपूर्ति श्रृंखला में संभावित बाधाओं के चलते सरकार अब वैकल्पिक और सुरक्षित ऊर्जा मार्गों की तलाश तेज कर चुकी है। पेट्रोलियम मंत्रालय से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, इस प्रस्तावित परियोजना पर सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों गेल, इंडियन आॅयल कार्पोरेशन को विस्तृत व्यवहार्यता रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी दी जा सकती है। West Asia Crisis
यह पहल निजी कंसोर्टियम साउथ एशिया गैस एंटरप्राइज के प्री-फिजिबिलिटी अध्ययन पर आधारित बताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह परियोजना आगे बढ़ती है तो यह भारत की ऊर्जा सुरक्षा रणनीति में ऐतिहासिक बदलाव साबित हो सकती है। इसके तहत समुद्री मार्ग से सीधी पाइपलाइन के जरिए गैस आपूर्ति होगी, जिससे ट्रांजिट देशों और होर्मुज स्ट्रेट जैसे संवेदनशील मार्गों पर निर्भरता काफी कम हो जाएगी। भारत की गैस मांग तेजी से बढ़ रही है। वर्तमान खपत जहां लगभग के आसपास है, वहीं 2030 तक इसके 300 तक पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है। ऐसे में यह परियोजना भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए एक रणनीतिक कदम मानी जा रही है। West Asia Crisis
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