पूरी दुनिया में छा गए तीन बड़े वैज्ञानिक, मिला नोबेल प्राइज
भारत
RP Raghuvanshi
08 Oct 2025 07:11 PM
भारत
RP Raghuvanshi
08 Oct 2025 07:11 PM
2025 का नोबेल प्राइज इन केमिस्ट्री तीन दिग्गज वैज्ञानिको प्रोफेसर सुसुमु कितागावा (जापान), रिचर्ड रॉबसन (आॅस्ट्रेलिया) और ओमर एम. यागी (अमेरिका) को दिया गया है। नोबेल प्राइज के लिए इन वैज्ञानिकों ने मेटल-आॅर्गेनिक फ्रेमवर्क्स पर काम कर के केमिस्ट्री की दिशा बदल दी। रॉयल स्वीडिश एकेडमी आफ साइंसेज ने स्टॉकहोम में नोबेल प्राइज का ऐलान किया और बताया कि तीनों वैज्ञानिकों को 11 मिलियन स्वीडिश क्राउन (करीब 8.7 लाख पाउंड) की प्राइज मनी दी जाएगी। Nobel Prize 2025 :
कह सकते हैं मॉलिक्यूलर आर्किटेक्चर
तीनों वैज्ञानिकों ने मिलकर यह दिखाया कि कैसे अलग-अलग मॉलिक्यूल्स को एक खास तरीके से जोड़कर एक ऐसी संरचना बनाई जा सकती है जिसमें मॉलिक्यूल्स के बीच काफी खाली जगह यानी पोर्स रहती है। इन पोर्स के जरिए गैसें या अन्य केमिकल्स आसानी से गुजर सकते हैं। यही संरचनाएं आगे चलकर मेटल-आॅर्गेनिक फ्रेमवर्क्स कहलाईं। इन्हें आप मॉलिक्यूलर आर्किटेक्चर कह सकते हैं। जहां एटम्स और मॉलिक्यूल्स ईंटों की तरह इस्तेमाल होकर ऐसी संरचना बनाते हैं जो काम की चीजें कर सकती हैं।
कैसे बदलेंगे ये हमारी दुनिया
इन फ्रेमवर्क्स का सबसे कमाल का यूज है, डेजर्ट एयर से पानी निकालना, कार्बन डाइआॅक्साइड को कैप्चर करना और टॉक्सिक गैसों को स्टोर करना। यानी भविष्य में ये टेक्नोलॉजी जल संकट, क्लाइमेट चेंज और इंडस्ट्रियल पॉल्यूशन से लड़ने में गेम-चेंजर साबित हो सकती है। क्योटो यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर कितागावा, यूनिवर्सिटी आॅफ मेलबर्न के प्रोफेसर रॉबसन और यूनिवर्सिटी आॅफ कैलिफोर्निया के प्रोफेसर यागी ने इस दिशा में दशकों तक काम किया। आज एमओएफ एस का इस्तेमाल क्लीन एनर्जी, ग्रीन हाइड्रोजन, गैस स्टोरेज और एयर प्यूरीफिकेशन में तेजी से बढ़ रहा है।
तीसरा बड़ा केमिस्ट्री में नोबेल प्राइज
इस हफ्ते विज्ञान के तीनों प्रमुख क्षेत्रों में नोबेल प्राइज घोषित किए गए हैं। सोमवार को इम्यून सिस्टम पर रिसर्च करने वाले तीन वैज्ञानिकों को मेडिसिन का नोबेल मिला, मंगलवार को क्वांटम कंप्यूटर पर काम करने वाले जॉन क्लार्क, मिशेल डेवरेट और जॉन मार्टिनिस को फिजिक्स नोबेल दिया गया और अब बुधवार को केमिस्ट्री का ये सम्मान उन तीन वैज्ञानिकों को गया जिनकी रिसर्च से धरती पर जीवन के लिए एक नई उम्मीद जगी है।