हूती विद्रोहियों के गढ़ में भी गूंजी भारत की आवाज : भारतीय बुजुर्ग ने नर्स की फांसी को दिया टलवा
Nurse Nimisha Priya :
भारत
चेतना मंच
01 Dec 2025 09:12 PM
Nurse Nimisha Priya : जहाँ दुनिया के बड़े-बड़े देश हूती विद्रोहियों से बात करने से कतराते हैं, वहीं एक भारतीय बुजुर्ग ने धर्म और संवाद के सहारे वो कर दिखाया जो किसी चमत्कार से कम नहीं। केरल की नर्स निमिषा प्रिया को यमन में मिलने वाली फांसी की सजा एकदम अंतिम मोड़ पर आकर टल गई और इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में हैं 94 वर्षीय भारतीय इस्लामिक विद्वान, कंथापुरम एपी अबूबक्कर मुसलियार।
हूती कब झुकते हैं? मगर इस बार झुके
रेड सी में मिसाइलें बरसाने वाले हूती विद्रोही आमतौर पर किसी की नहीं सुनते। अमेरिका और यूरोप की कोशिशें भी कई बार नाकाम रही हैं। लेकिन इस बार भारत की एक मानवीय अपील, और उससे भी बढ़कर धार्मिक संवाद की शक्ति, असर दिखा गई। सना की जेल में बंद निमिषा प्रिया को 16 जुलाई को फांसी दी जानी थी। लेकिन ठीक एक दिन पहले, यमन की अदालत ने सजा पर रोक लगा दी।
धार्मिक कूटनीति बना भारत का मजबूत पुल
भारत सरकार द्वारा की जा रही आधिकारिक कोशिशों के साथ-साथ, मुसलियार ने यमन के विख्यात सूफी विद्वान शेख हबीब उमर बिन हाफिज से संपर्क साधा। शेख उमर ने न सिर्फ यमन के कबायली और धार्मिक नेटवर्क को सक्रिय किया, बल्कि पीड़ित परिवार और अदालत से बातचीत की पहल भी की। यह वही यमन है जहां हर दिन बम और ड्रोन गूंजते हैं वहां बैठकर एक भारतीय महिला की फांसी पर पुनर्विचार की बात होना, अभूतपूर्व घटना है।
ब्लड मनी पर चर्चा शुरू, नई उम्मीद जगी
यमन में हत्या के मामलों में "ब्लड मनी" की परंपरा है। यदि मृतक का परिवार स्वीकार करे, तो दोषी की जान बच सकती है। हबीब उमर की अगुवाई में सना में एक विशेष बैठक हुई, जिसमें जज, पीड़ित परिवार, कबायली नेता और धार्मिक प्रतिनिधि शामिल हुए। इसके बाद महदी के परिजनों ने सकारात्मक संकेत दिए कि वे ब्लड मनी पर बातचीत को तैयार हैं। भारत में ग्रैंड मुफ्ती आॅफ इंडिया के नाम से विख्यात, मुसलियार न केवल एक धर्मगुरु हैं, बल्कि कई इस्लामिक देशों में उनका सम्मानपूर्ण प्रभाव भी है। उनका हस्तक्षेप न होता, तो शायद यह दरवाजा कभी खुलता ही नहीं।
क्या है निमिषा प्रिया का मामला?
निमिषा 2008 में नर्स के रूप में यमन गई थीं। बाद में उन्होंने वहां एक क्लिनिक शुरू किया, जिसके लिए उन्हें एक स्थानीय पार्टनर की आवश्यकता थी। इसी दौरान उनका संपर्क यमनी नागरिक तालाल अब्दो महदी से हुआ। निमिषा के परिजनों के अनुसार, महदी ने उनका पासपोर्ट जब्त कर लिया और उन्हें प्रताड़ित करने लगा। इस दौरान एक दिन निमिषा ने उसे बेहोश करने के लिए सिडेटिव दवा दी, जिससे उसकी मृत्यु हो गई। उन्हें एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया और 2020 में सजा-ए-मौत सुना दी गई।
भारत सरकार की सक्रियता, न्याय की उम्मीद
भारत सरकार पहले ही सुप्रीम कोर्ट को बता चुकी है कि वह सभी स्तरों पर प्रयास कर रही है, लेकिन यमन की जटिल स्थिति और हूती नियंत्रण के कारण सीधा हस्तक्षेप संभव नहीं। ऐसे में मुसलियार की मध्यस्थता एक नई राह लेकर आई है। शेख हबीब उमर के प्रतिनिधि एक बार फिर महदी के परिजनों से संपर्क करेंगे। यदि बातचीत "ब्लड मनी" के अंतिम समझौते तक पहुँचती है, तो निमिषा की जान पूरी तरह बच सकती है। यह सिर्फ एक कानूनी मामला नहीं, बल्कि एक मानवीय मिशन बन चुका ह। जहाँ धर्म, संवेदना और संवाद की शक्ति ने राजनीति और युद्ध से आगे निकलकर उम्मीद की लौ जलाई है।