अमेरिकी तेल से काउंटर होगा ट्रंप का टैरिफ टेरर, भारत ने बढ़ाई खरीद
भारत
चेतना मंच
28 Oct 2025 03:31 PM
वैश्विक तेल बाजार में इन दिनों भूचाल मचा हुआ है। रूस पर बढ़ते अमेरिकी प्रतिबंधों और पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के "टैरिफ टेरर" की धमकी के बीच भारत अपनी ऊर्जा नीति को नए सिरे से संतुलित करता दिख रहा है। ताजा आंकड़े बताते हैं कि भारत ने अमेरिकी कच्चे तेल की खरीद में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की है और यह रुख आने वाले महीनों में और तेज हो सकता है। Oil Game :
रूस से अमेरिका की ओर शिफ्ट
27 अक्टूबर 2025 तक भारत अमेरिका से प्रतिदिन 5.4 लाख बैरल कच्चा तेल आयात कर रहा है। एक बैरल यानी लगभग 159 लीटर। ऊर्जा विश्लेषकों का कहना है कि अक्टूबर के अंत तक यह आंकड़ा 5.75 लाख बैरल प्रति दिन तक पहुंच सकता है। यह ट्रेंड तब उभर रहा है जब अमेरिका ने रूस पर नई ऊर्जा-आधारित पाबंदियां लगाई हैं, जिनसे रूसी कच्चे तेल की वैश्विक सप्लाई सीमित हो गई है। भारत, जो अब तक रूस से सबसे सस्ता क्रूड खरीदता रहा है, अब इंपोर्ट डायवर्सिफिकेशन यानी आपूर्ति के नए स्रोतों की तलाश में जुट गया है।
इंडियन आयल की रणनीति
भारत की सबसे बड़ी तेल विपणन कंपनी इंडियन आॅयल कॉपोर्रेशन (आईओसी) ने संकेत दिए हैं कि वह उन रूसी कंपनियों से तेल खरीद नहीं सकेगी जिन पर अमेरिका या यूरोपीय संघ के प्रतिबंध लागू हैं। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, आईओसी अभी अपने कुल आयात का एक बड़ा हिस्सा रूस से लाती है, लेकिन अब कंपनी धीरे-धीरे अमेरिकी और अफ्रीकी क्रूड की ओर शिफ्ट कर रही है।
ट्रंप की टैरिफ पॉलिसी और भारत
दूसरी ओर, अमेरिकी राजनीति में ट्रंप की वापसी और उनका अमेरिका फर्स्ट एजेंडा नई अनिश्चितता लेकर आया है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने कई भारतीय उत्पादों पर टैरिफ बढ़ाने की तैयारी की है, जिससे भारत-अमेरिका व्यापारिक समीकरण प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि, सितंबर-अक्टूबर 2025 में हुई उच्चस्तरीय वार्ताओं के बाद अमेरिका ने संकेत दिए हैं कि रणनीतिक उत्पादों पर आंशिक छूट दी जा सकती है। इसी के तहत ऊर्जा क्षेत्र को संभावित राहत मिलने की उम्मीद है यानी भारत के लिए अमेरिकी तेल खरीद अब केवल विकल्प नहीं, बल्कि रणनीतिक साझेदारी बन सकती है।
ऊर्जा से कूटनीति तक
विशेषज्ञ मानते हैं कि अमेरिकी तेल आयात में बढ़ोतरी केवल आर्थिक नहीं, बल्कि राजनीतिक संकेत भी है। रूस पर निर्भरता घटाकर भारत अपने भू-राजनीतिक जोखिम को संतुलित कर रहा है। और अगर ट्रंप प्रशासन दोबारा सत्ता में आता है, तो यह कदम भारत को टैरिफ टेरर के असर से बचाने की रणनीति के रूप में देखा जाएगा। अर्थात अब भारत का ग्रोथ इंजन अमेरिकी तेल पर दौड़ने को तैयार है, और वॉशिंगटन के साथ ऊर्जा साझेदारी नई ऊंचाई छू सकती है।