अगर ट्रंप ने भारत को रूसी तेल से रोका, पुतिन दबा सकते हैं अमेरिका की 'तेल नस'
Oil Politics :
भारत
चेतना मंच
02 Aug 2025 08:28 PM
डोनाल्ड ट्रंप की वापसी की अटकलों के बीच उनकी विदेश नीति एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार निशाने पर है भारत, जो रूस से सस्ती दरों पर कच्चा तेल खरीद रहा है। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि भारत को यह सौदा बंद करना चाहिए। लेकिन जानकार मानते हैं कि इस 'तेल राजनीति' में ट्रंप का दांव उलटा भी पड़ सकता है। Oil Politics :
भारत पर नहीं, अमेरिका पर भी पड़ेगा असर
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है और साल 2022 से वह प्रतिदिन करीब 20 लाख बैरल रूसी तेल खरीद रहा है। यह मात्रा वैश्विक आपूर्ति का लगभग 2% है। अगर यह सप्लाई बाधित होती है, तो न केवल भारत को झटका लगेगा, बल्कि रूस और अमेरिका दोनों की ऊर्जा नीतियों पर भी असर पड़ेगा।
जेपी मॉर्गन की चेतावनी : रूस दबा सकता है अमेरिका की ऊर्जा शिरा
जेपी मॉर्गन की एक विश्लेषण रिपोर्ट में आशंका जताई गई है कि अगर भारत रूसी तेल खरीदना बंद करता है, तो रूस कजाखस्तान से चल रही 'सीपीसी पाइपलाइन' को बंद कर सकता है। इस पाइपलाइन में चेवरोन और इक्सोन मोबिल जैसी अमेरिकी दिग्गज कंपनियों की हिस्सेदारी है। अगर यह पाइपलाइन बंद होती है, तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें एक बार फिर $80 प्रति बैरल के पार जा सकती हैं, जिससे अमेरिका और यूरोप को भी महंगाई की मार झेलनी पड़ेगी।
भारत की तेल जरूरत का 35% रूस से
यूक्रेन युद्ध के बाद यूरोपीय प्रतिबंधों के चलते भारत ने रूस से कच्चा तेल खरीदना तेज किया। आज भारत अपनी कुल तेल आवश्यकता का 35% हिस्सा रूस से पूरा करता है, जिसकी सालाना लागत करीब $50.2 अरब डॉलर है। *रोसनेफ्ट* जैसी रूसी कंपनियां भारत की रिफाइनरियों में सीधे हिस्सेदार भी हैं। भारत यूराल्स, एस्पो और आर्कटिक जैसे रूसी ग्रेड के कच्चे तेल का बड़ा खरीदार है। अगर यह आपूर्ति रोकी जाती है, तो भारत को अमेरिकी या खाड़ी देशों से महंगा तेल खरीदना होगा, या फिर रिफाइनिंग घटानी पड़ेगी जिसका सीधा असर यूरोप में ईंधन कीमतों पर पड़ेगा, जहां भारत से डीजल और पेट्रोल का निर्यात होता है।
रूस के पास विकल्प सीमित, लेकिन तैयारी चालू
यदि भारत रूसी तेल खरीदना रोकता है, तो रूस मिस्र, मलेशिया, पेरू, पाकिस्तान और दक्षिण अफ्रीका जैसे छोटे बाजारों की ओर झुक सकता है। मगर भारत जैसे बड़े और भरोसेमंद खरीदार का विकल्प ढूंढना आसान नहीं होगा। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि रूस 'सीपीसी पाइपलाइन' बंद कर देता है और भारत को तेल बेचना भी बंद करता है, तो इससे कुल 3.5 मिलियन बैरल प्रतिदिन की वैश्विक आपूर्ति पर असर पड़ेगा जो विश्व उत्पादन का 3.5% है। यह ट्रंप प्रशासन के लिए एक गंभीर ऊर्जा संकट की स्थिति पैदा कर सकता है। भारत पर दबाव बनाना भले ट्रंप की रणनीति का हिस्सा हो, मगर अंतरराष्ट्रीय तेल समीकरण इतने सरल नहीं हैं। एकतरफा निर्णय वैश्विक बाजार को हिला सकते हैं और अमेरिका को भी खुद इसकी बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती है।