तुर्की भारत का विरोध और पाकिस्तान का समर्थन क्यों करता है, आइए जानें
Operation Sindoor
भारत
चेतना मंच
13 May 2025 09:00 PM
Operation Sindoor : तुर्की का भारत विरोध यह न केवल एक सामयिक प्रश्न है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति की जटिलता को भी दर्शाता है। आइए इस विषय को विस्तार से समझते हैं। दरअसल तुर्की पाकिस्तान से भाईचारा और इस्लामी एकता का कार्ड खेलता है। तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोआन खुद को इस्लामी दुनिया का नेता बनाना चाहते हैं। वो आटोमन खलीफा की विरासत को पुनर्जीवित करने का सपना देख रहे हैं, जिसके तहत मुस्लिम जगत में उनका नेतृत्व स्वीकार किया जाए।
मुस्लिम उम्मा का नेता बनने के लिए पाकिस्तान का साथ
पाकिस्तान एकमात्र इस्लामी परमाणु शक्ति है और इस्लामी देशों में उसकी एक अलग अहमियत है। एर्दोआन को लगता है कि पाकिस्तान के साथ खड़े होकर वो मुस्लिम उम्मा (इस्लामी एकता) का नेतृत्व मजबूत कर सकते हैं। कश्मीर के मुद्दे पर भी तुर्की ने कई बार पाकिस्तान का साथ देते हुए भारत की आलोचना की है। तुर्की ने कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने की भारत की कार्रवाई की आलोचना की है। 2019 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में एर्दोआन ने कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान का पक्ष लिया था। इसके जवाब में भारत ने तुर्की के साथ कई रक्षा और व्यापारिक समझौतों की समीक्षा की थी।
व्यापारिक असंतुलन और सामरिक ईर्ष्या
भारत और तुर्की के बीच व्यापारिक असंतुलन भारत के पक्ष में है। यानी तुर्की भारत से ज्यादा सामान आयात करता है, लेकिन उसका निर्यात कम है। तुर्की चाहता है कि भारत मिडिल ईस्ट (मध्य एशिया) में उसके साथ ज्यादा सहयोग करे, लेकिन भारत की प्राथमिकताएं यूएई, सऊदी अरब और कतर जैसे देशों के साथ हैं। इससे तुर्की को लगता है कि उसे नजरअंदाज किया जा रहा है।
भू-राजनीतिक महत्वाकांक्षा और भारत की अनदेखी
तुर्की मल्टी पावर पोल बनने की कोशिश कर रहा है। यानी ऐसा देश जो अमेरिका, चीन, रूस के समानांतर खुद को स्थापित कर सके।
भारत की बढ़ती वैश्विक छवि तुर्की को असहज करती है। एर्दोआन यह चाहते हैं कि भारत तुर्की को बराबरी की भूमिका में देखे, लेकिन भारत की रणनीति और प्राथमिकताएं अलग हैं। तुर्की में एर्दोआन की पार्टी एकेपी की राजनीति इस्लामिक नैरेटिव पर आधारित है। भारत के खिलाफ बयानबाजी कर वे अपने घरेलू मुस्लिम वोटबैंक और अंतरराष्ट्रीय मुस्लिम समाज में लोकप्रियता अर्जित करना चाहता है।
भारत की प्रतिक्रिया
भारत ने भी समय-समय पर तुर्की को जवाब दिया है। तुर्की के स्टील, आयरन, और रक्षा उपकरणों के आयात में कटौती की गई। भारत ने ग्रीस, साइप्रस और आर्मेनिया जैसे देशों के साथ रणनीतिक संबंधों को मजबूत किया, जो तुर्की के विरोधी माने जाते हैं। यूएनजीए और अन्य मंचों पर भारत ने तुर्की के बयान को आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करार दिया। इन तमाम कारणों से तुर्की पाक का साथ देता है। Operation Sindoor