वैश्विक तेल व्यापार के बीच पाकिस्तान एक नई रणनीतिक चाल चल रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह दुनिया की बड़ी तेल कंपनियों और शिपिंग ट्रेडर्स से संपर्क कर रहा है और उन्हें प्रस्ताव दे रहा है कि वे अपने जहाजों को अस्थायी रूप से पाकिस्तान के झंडे के तहत चलाएं।

Hormuz Gamble : वैश्विक तेल व्यापार के बीच पाकिस्तान एक नई रणनीतिक चाल चल रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह दुनिया की बड़ी तेल कंपनियों और शिपिंग ट्रेडर्स से संपर्क कर रहा है और उन्हें प्रस्ताव दे रहा है कि वे अपने जहाजों को अस्थायी रूप से पाकिस्तान के झंडे के तहत चलाएं। इस आॅफर के पीछे मकसद साफ है, संवेदनशील समुद्री रास्तों पर सुरक्षित आवाजाही और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करना। बताया जा रहा है कि कम से कम दो बड़ी तेल कंपनियों ने ऐसे प्रस्ताव मिलने की पुष्टि भी की है।
मध्य पूर्व में स्थित होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। यही वजह है कि इस क्षेत्र में हर छोटी-बड़ी गतिविधि का असर सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार पर पड़ता है। अगर इस मार्ग पर कोई बाधा आती है, तो तेल की कीमतों में उछाल और सप्लाई चेन में संकट तय है।
इस पूरे सिस्टम में ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की भूमिका बेहद अहम है। होर्मुज स्ट्रेट पर उनका प्रभावी नियंत्रण माना जाता है और वही तय करते हैं कि कौन सा जहाज सुरक्षित तरीके से इस रास्ते से गुजर सकता है। जो भी जहाज इस रूट से गुजरना चाहता है, उसे पहले आईआरजीसी से जुड़ी एक मध्यस्थ कंपनी को अपनी पूरी जानकारी देनी होती है। इसके बाद जांच होती है कि जहाज का संबंध अमेरिका, इजराइल या ईरान के विरोधी देशों से तो नहीं है।
अगर जहाज जांच में क्लियर हो जाता है, तो उसे आगे बढ़ने की अनुमति दी जाती है। इसके साथ ही एक टोल (फीस) तय की जाती है, जो आमतौर पर करीब 1 डॉलर प्रति बैरल से शुरू होती है। दिलचस्प बात यह है कि यह भुगतान डॉलर में नहीं, बल्कि युआन या डिजिटल करेंसी में किया जाता है जो वैश्विक वित्तीय सिस्टम में एक बड़े बदलाव का संकेत है। टोल देने के बाद जहाज को एक विशेष कोड और निर्धारित रास्ता दिया जाता है। जब जहाज होर्मुज के करीब पहुंचता है, तो वह रेडियो के जरिए यह कोड साझा करता है और फिर ईरानी पेट्रोल बोट उसे सुरक्षित बाहर निकालती है।
पाकिस्तान खास तौर पर उन बड़े तेल टैंकरों को टारगेट कर रहा है, जिनकी क्षमता करीब 20 लाख बैरल तक होती है। अगर ये जहाज पाकिस्तान के झंडे के तहत चलते हैं, तो पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार में नई पहचान मिलेगी। उसकी कूटनीतिक स्थिति मजबूत होगी और वह खुद को एक सुरक्षित ट्रांजिट पार्टनर के रूप में पेश कर सकेगा। यह पूरा मॉडल जितना आकर्षक दिखता है, उतना ही जोखिम भरा भी है। पाकिस्तान का यह कदम सिर्फ एक आर्थिक प्रस्ताव नहीं, बल्कि एक बड़ा जियोपॉलिटिकल संकेत है जहां समुद्री रास्ते अब सिर्फ व्यापार नहीं, बल्कि ताकत और प्रभाव का खेल बन चुके हैं।