Rakesh Tikait: राकेश टिकैत ने चेतना मंच से दूरभाष पर हुई बातचीत में वहां के हालात की आंखों देखी साझा की। उन्होंने कहा कि जमीन पर तबाही का मंजर बेहद भयावह है और यह दावा किया है कि नेपाल की आपदा में हजारों मौत हुई है।

नेपाल में आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन ने तबाही का ऐसा मंजर दिखाया है जिसे देखकर वहां मौजूद लोग भी सहम गए हैं। इसी आपदा के बीच भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता और किसान नेता राकेश टिकैत भी अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ नेपाल में फंस गए हैं। राकेश टिकैत ने चेतना मंच से दूरभाष पर हुई बातचीत में वहां के हालात की आंखों देखी साझा की। उन्होंने कहा कि जमीन पर तबाही का मंजर बेहद भयावह है और यह दावा किया है कि नेपाल की आपदा में हजारों मौत हुई है।
राकेश टिकैत अपने साथियों के साथ नेपाल गए थे। अचानक आई बाढ़ के बाद उनकी आवाजाही भी प्रभावित हुई और उन्हें अपनी गाड़ी वहीं छोड़नी पड़ी। उपलब्ध ताजा रिपोर्टों के मुताबिक टिकैत और उनके साथ मौजूद प्रतिनिधिमंडल के सदस्य सुरक्षित हैं। उन्होंने एक वीडियो के जरिए भी अपनी स्थिति की जानकारी दी है। बाढ़ के कारण कई रास्ते बंद हैं और प्रभावित इलाकों में आवाजाही मुश्किल बनी हुई है। रिपोर्टों के अनुसार, टिकैत पहले पोखरा से काठमांडू जाने की कोशिश करेंगे और इसके बाद भारत लौटेंगे।
चेतना मंच से दूरभाष पर बातचीत में राकेश टिकैत ने नेपाल में देखे हालात को बेहद चिंताजनक बताया। उन्होंने कहा कि जो कुछ उन्होंने अपनी आंखों के सामने देखा उससे उन्हें लगता है कि आपदा में जान गंवाने वालों की संख्या बहुत बड़ी हो सकती है। टिकैत के मुताबिक, कई जगहों पर तबाही का असर इतना ज्यादा है कि वास्तविक नुकसान का अंदाजा लगाना भी मुश्किल है। उन्होंने कहा कि मलबे, बाढ़ के तेज बहाव और प्रभावित इलाकों में बिगड़े हालात के बीच लोगों को अपने परिजनों की तलाश में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
नेपाल की इस आपदा का असर भारतीय नागरिकों पर भी पड़ा है। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक 130 से ज्यादा भारतीय नागरिक लापता बताए जा रहे हैं। इनमें कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए श्रद्धालु भी शामिल हैं। प्रभावित इलाकों में संचार व्यवस्था बाधित होने के कारण लापता लोगों की सही जानकारी जुटाना चुनौती बना हुआ है। तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों के लोगों के नेपाल में फंसे होने या उनसे संपर्क टूटने की जानकारी सामने आई है। इसी वजह से भारतीय दूतावास और कई राज्य सरकारों ने हेल्पलाइन भी जारी की हैं।
नेपाल-चीन सीमा के पास आई अचानक फ्लैश फ्लड ने कई इलाकों में भारी नुकसान पहुंचाया है। पुल, सड़कें और दूसरी जरूरी सुविधाएं प्रभावित हुई हैं। राहत और बचाव टीमों के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित इलाकों तक पहुंचना और लापता लोगों को तलाशना है। ताजा रिपोर्टों में कम से कम 160 लोगों की मौत और 750 से अधिक लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है, हालांकि अलग-अलग समय पर आंकड़ों में बदलाव हो रहा है। इसलिए मृतकों और लापता लोगों की संख्या को लेकर अंतिम आंकड़े आने का इंतजार करना जरूरी है।
नेपाल में आई इस आपदा के बाद भारत सरकार ने स्थिति पर नजर तेज कर दी है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उत्तर प्रदेश और बिहार के मुख्यमंत्रियों से बात की है। सीमा से लगे संभावित प्रभावित इलाकों में स्थानीय प्रशासन, बचाव दल और NDRF को हाई अलर्ट पर रखा गया है। भारत ने नेपाल के लिए राहत और मेडिकल सहायता भी भेजी है। भारतीय वायुसेना के विमान के जरिए जरूरी राहत सामग्री नेपाल पहुंचाई गई है और बचाव कार्यों में मदद की जा रही है। फिलहाल राकेश टिकैत और उनके साथ मौजूद प्रतिनिधिमंडल के सुरक्षित होने की जानकारी है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार वह पहले काठमांडू पहुंचेंगे और इसके बाद भारत लौटने की तैयारी है।
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